विजय की ✒कलम

बिलासपुर :- कहते हैं जब तक राजनीतिक घर के अंदर समाज के अंदर ना आए तब तक अच्छी बात है और जब वह अंदर घुस जाए तो समझो महाभारत आरंभ हो जाएगा और ऐसा ही महाभारत आज समाज में चल रहा है कई सालों से यह लड़ाई चल रही है पर अब ज्वालामुखी का रूप ले चुका है लावा
बाहर निकल चुका है दबाने की कोशिश हो रही है पर दबेगा नहीं क्योंकि यह जन-जन की आवाज है यह जनता की आवाज है यह पिछड़ों दीन दुखियों की आवाज है यह जनता की आवाज है यह सच की आवाज है आजादी के बाद सिंधी समाज बिलासपुर में आया देश भर में सभी जगह अलग-अलग गांव में शहर में बस गया बिलासपुर में भी अलग-अलग जगह में बस गया कुछ समय बाद समाज को संगठित करने के लिए चलाने के लिए बड़े बुजुर्गों ने पंचायत का गठन किया कहा जाता है सबसे पुरानी पंचायत में जूना बिलासपुर सिंधी कॉलोनी हेमू नगर सरकंडा कहा जाता है
सन 1997 में जनरल पंचायत का गठन किया गया उस समय कुछ वार्ड पंचायत थी तो उनको ऊपर में एक जनरल पंचायत बनाई गई ताकि सुचारू रूप से कार्य हो सके और सब संगठित होकर समाज को आगे बढ़ा सके कुछ समय बाद जनरल पंचायत का नाम बदलकर पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत किया गया जब से यह नाम किया गया है तब से ही विवाद में जड़ पकड़ ली है शुरुआत में बड़ों ने तो सर्व सहमिति से अध्यक्ष बनाएं पर कुछ समय बाद कुर्सी की चाह ने समाज में ही दो फाड़ कर दिया यहां तक की गोली कांड भी हुआ जैसा कि कुछ लोग बताते हैं?
समय आगे निकलता गया वक्त भी बितता गया वार्ड पंचायतें भी बढ़ती गई नई-नई युवा पीढ़ी आई गई ऐसे में कुछ बड़े-बड़े बिल्डर धन्ना सेठों ने अपनी नजर इस ओर कर दी और अपना सिंडिकेट बनाकर चुनाव लड़ने लगे कुर्सी को अपने कब्जे में करने लगे इस कुर्सी के चक्कर में ही समाज की दुर्गति हुई है कहां से कहां पहुंच गए कैट कचेहरी थाना तक पहुंच गए? पर लाज शर्म नहीं आई जिस उद्देश्य के लिए सरकार से जमीन मांगी गई सुंदर भवन बनाया गया वह उद्देश्य सिर्फ कागजों में दबा रहा गया और उस भवन की भी अलग से समिति बना दी गई अलग से कुर्सी रखी गई ताकि अपने लोगों को बिठाया जा सके सत्ता का सुख दिलाया जा सके इस कुर्सी की लड़ाई में ही समाज में बंटवारा कर दिया महाभारत आरंभ कर दिया आज हस्तिनापुर की तरह डिस्टराज नेत्रहीन है गांधारी ने आंखों में पट्टी बांधी है और पितामह भीष्म कुलगुरु द्रोणाचार्य सब अधर्म के साथ खड़े हैं यह सब देखने के बाद भी समझने के बाद भी चुप खड़े हैं युवा गांधी जी के बंदर बन चुके हैं ? और लोकतंत्र के प्रहरी को दबाया जा रहा है परेशान किया जा रहा है कि वह सच न बोले सच ना लिखें सच की आवाज ना बने बिलासपुर से बड़ा रायपुर शहर है राजधानी है 72 सिंधी समाज की वार्ड पंचायतें हैं पर वहां पर सेंट्रल पंचायत नहीं है इसलिए शांति है पर बिलासपुर में 17 वार्ड पंचायत हैं और सेंट्रल पंचायत है इसीलिए अशांति है कहते हैं जो अशांति का बीज है जो जड़ है उसे ही खत्म कर देना चाहिए कुछ वर्ष पूर्व सेंट्रल पंचायत के एक पूर्व अध्यक्ष ने आम बैठक खत्म होने के बाद यह बात मेरे से कही थी कि क्यों ना सेंट्रल पंचायत को खत्म कर दिया जाए उनकी बातें आज मुझे बिल्कुल याद आ रही है और सटीक और सही लग रही है जब पानी सर से ऊपर चला जाए तो अपने आप की जान बचाने के लिए कुछ तो हाथ पैर मारना पड़ेगा समाज की एकता के लिए समाज कि शांति के लिए समाज के विकास के लिए बहुत जरूरी है कि हम बड़े बुजुर्गो की राह पर वापस पीछे जाएं और वार्ड पंचायत के माध्यम से ही समाज चलाए जैसे पहले चल रहा था पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत और झुलेलाल सेवा समिति को भंग कर दिया जाए खत्म कर दिया जाए हमेशा के लिए न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी और झूलेलाल मंगल धाम को पूज्य सिंधी वार्ड पंचायत जो 17 हैं उसके जो अध्यक्ष है सामान्यी जन है वह सब मिलकर सुचारू रूप से उसका संचालन करें जैसे अपने-अपने वार्ड में धर्मशालाओं का संचालन कर रहे हैं ईमानदारी से कर रहे हैं और सफलतापूर्वक कर रहे हैं कभी किसी धर्मशाला पर अबतक कोई आरोप गबन का नहीं लगा कभी किसी वार्ड पंचायत पर हेराफेरी का आरोप नहीं लगा ईमानदारी पारदर्शिता के साथ कार्य कर रहे हैं सिर्फ झुलेलाल मंगल धाम पर ही आरोप क्यों लगा,
अब जरूरी है अब वक्त की नजाकत भी यही है और समय की पुकार भी यही है की झुलेलाल मंगल धाम को 17 वार्ड पंचायतों के मुखियाओं को सौंप दिया जाए वह सब मिलकर सुचारू रूप से समिति बनाकर इसका संचालन करेंगे ईमानदारी से जैसे अपने-अपने वार्ड पंचायत का करते आ रहे हैं इसमें ही समाज का भला है पर क्या यह संभव हो पाएगा क्योंकि सत्ता के लालची कुर्सी मोह में बैठे लोग क्या इतनी आसानी से सेंट्रल पंचायत को और झूलेलाल मंगल धाम को भंग करने देंगे?
क्या बिल्डर लाबी और धन्ना सेठ अपनी दुकान बंद करेंगे?
क्या समाज हीत में यह काम करेंगे?
क्या संत महात्मा उन्हें समझाएंगे?
पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत उन्हें सलाह देगी सही राह दिखाएंगे?
जनता की आवाज को और सच को स्वीकार करेंगे समाज हित में यह फैसला लेंगे?
देखना होगा कि आगे क्या होता है अगर यह फैसला करते हैं तो इतिहास में यह फैसला श्रवण अक्षरों में लिखा जाएगा और समाज के उद्धार के लिए उन्हें याद किया जाएगा पर ऐसा नहीं करते हैं और कुर्सी की लालच के कारण चुप्पी साधे रहते हैं तो याद रखें जैसे महाभारत में कौरवों का अंत हुआ था यहां पर भी चोरों का बेईमानों का समाज विरोधियों का अंत होना तय है और इतिहास और आने वाली पीढ़ी कभी माफ नहीं करेगी
हम भगवान से यह प्रार्थना करते हैं इनको सद्बुद्धि दे और समाज हित में फैसला करें
जय झूलेलाल जय हिंगलाज माता
संपादकीय
