*꧁‼️सत्य सनातन धर्म की जय‼️꧂*

उचित और अत्यंत पुण्यदायी* माना गया है। दाह संस्कार में तुलसी की लकड़ी जलाने के कारण और इसके मुख्य नियम इस प्रकार हैं:*तुलसी की लकड़ी जलाने के कारण (महत्व)** *पापों का नाश और मोक्ष प्राप्ति:* पद्म पुराण (उत्तर खंड) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के दाह संस्कार के समय चिता में तुलसी की लकड़ी या उसका एक छोटा सा टुकड़ा भी रख दिया जाए, तो वह व्यक्ति अपने समस्त जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त हो जाता है। उसे मोक्ष तथा विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।* *यम के दूतों से मुक्ति:* धार्मिक मान्यता है कि जिस दाह संस्कार में तुलसी की लकड़ी का उपयोग होता है, वहाँ यमराज के दूत दूर रहते हैं और भगवान विष्णु के पार्षद उस दिवंगत आत्मा को अपने साथ वैकुण्ठ ले जाते हैं।* *वातावरण की शुद्धि:* तुलसी को अत्यंत पवित्र, पूजनीय और औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। इसकी लकड़ी के जलने से उत्पन्न होने वाली सुगंध और पवित्रता से आसपास का वातावरण शुद्ध होता है।*नियम एवं सावधानियां** *केवल सूखी लकड़ी का प्रयोग:* दाह संस्कार या पूजा-पाठ के लिए हमेशा *सूखी हुई तुलसी की लकड़ी या उसकी सूखी टहनियों* का ही उपयोग किया जाना चाहिए। जीवित पौधे को कभी नहीं काटना चाहिए, क्योंकि शास्त्रों में हरे पौधे को काटना वर्जित माना गया है।* *वार या दिन का कोई बंधन नहीं:* सामान्य दिनों में तुलसी के पत्ते तोड़ने के कुछ नियम होते हैं (जैसे रविवार, एकादशी आदि को पत्ते न तोड़ना), किंतु दाह संस्कार जैसी अनिवार्य और आपातकालीन परिस्थितियों में यह नियम लागू नहीं होता। इसके अलावा, पहले से संग्रहित की गई सूखी लकड़ी के प्रयोग पर किसी भी वार (रविवार या अन्य दिन) का कोई बंधन नहीं होता।*अतः* किसी भी दिन होने वाले अंतिम संस्कार में पूरी श्रद्धा के साथ सूखी तुलसी की लकड़ी का उपयोग किया जा सकता है।🙏कृपया नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके हमारे आधिकारिक चैनल को Follow करें। Follow the *꧁‼️अ.भा.सिंधु संत समाज ट्रस्ट‼️꧂* channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbCnDQR4NViqM4lkFP1E🙏आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस चैनल पर साझा की गई जानकारी और सामग्री को अपने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अवश्य साझा (Share) करें। आपका यह छोटा सा प्रयास सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में एक बड़ा योगदान देगा।
