
बिलासपुर (राजकिशोर नगर)। ब्रह्माकुमारीज़ के शिव अनुराग भवन में चल रहे सकारात्मक चिंतन की क्लास में *ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा कि “मन जीते जगत जीत” केवल आध्यात्मिक सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन में सफलता, शांति और आत्मिक शक्ति प्राप्त करने की सर्वोत्तम कुंजी है। जब मन हमारे नियंत्रण में होता है, तब परिस्थितियां भी हमें विचलित नहीं कर पातीं।* उन्होंने कहा कि आत्मा मन की मालिक है, इसलिए मन को व्यर्थ संकल्पों में भटकने देने के बजाय श्रेष्ठ संकल्पों की दिशा में चलाने का निरंतर अभ्यास आवश्यक है। नियमित राजयोग, ज्ञान मुरली अध्ययन और परमात्म स्मृति से मन एकाग्र होता है तथा जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव सहज होने लगता है।मंजू दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल और सोशल मीडिया मन को बार-बार भटकाते हैं। इसलिए तकनीक का उपयोग ज्ञान और आत्मउन्नति के लिए करें, न कि व्यर्थ विचारों में उलझने के लिए। उन्होंने कहा कि जिसका मुरली से प्रेम है, उसका मुरलीधर से भी सच्चा प्रेम है, इसलिए प्रतिदिन मुरली का अध्ययन और उस पर चिंतन जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।उन्होंने वरदान का संदेश देते हुए कहा कि सच्चाई और सफाई की धारणा से ही दिलों की समीपता बढ़ती है तथा बिगड़े हुए को सुधारना सबसे बड़ी सेवा है। आपसी मतभेदों को समाप्त कर प्रेम, सहयोग और शुभभावना के साथ संगठन को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
