विजय की ✒कलम

देश :- विगत एक माह से दिल्ली के जनतर मअंतर में, शांतिपूर्वक धरना चल रहा था भूख हड़ताल भी चल रही थी शिक्षा मंत्री के इस्तीफा की मांग हो रही थी नीट पेपर में जो गड़बड़ी हुई थी उसके लिए शिक्षा का सुधार हो और दोषियों को सजा मिले यह डिमांड थी एक माह तक सत्ता पक्ष और सरकार के मंत्री नहीं पहुंचे चर्चा करने के लिए क्यों? जबकि आंदोलन लोकतंत्र के मंदिर से मात्र 2 किलोमीटर के दूरी पर था देश के किसी कोने में गांव में नहीं था जब महाराष्ट्र में अन्ना का आंदोलन चलता था तो उसके घर तक पहुंच जाते थे फिर यह देश की राजधानी में लोकतंत्र का मंदिर के पास में एक माह से आंदोलन चल रहा है तै ईनसे चर्चा करने के लिए बात करने के लिए मंत्री या सांसद क्यों नहीं गए? इसका उत्तर यही समझ में आता है कि अब सरकार के अंदर अहंकार भरा गया है और तानाशाही ने रूप ले लिया है? बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो जीत को और पैसे को धन दौलत को शोहरत को संभाल पाते हैं और अपनी ईमानदारी को बरकरार रख पाते हैं इतिहास खोल कर देख लीजिए जब-जब पावर आया है तो साथ में अहंकार ने भी जन्म लिया है और यह मानव की बात नहीं है देवी देवताओं में भी ऐसा होता है कोई भी ग्रंथ खोलकर देख लीजिए राजा इंद्र को भी आकर हो गया था ब्रह्मा जी को भी अहंकार हो गया था तो यहां तो इस कलयुग में तो मानव को अहंकार होना कोई बड़ी बात नहीं है पर उस अहंकार पर अंकुश लगाना अपनी गलती को सिवकार करना और न्याय नीति धर्म के राह पर चलना यह बड़ी बात है कुर्सी के लिए जुमलेबाजी करना बड़े-बड़े वादे करना झूठ बोलना यह कोई नई बात नहीं है पर जनता आप पर विश्वास कर रही है तीन बार आप प्रधानमंत्री कुर्सी पर पहुंचे हैं यह जनता के भरोसा ही है 20 से ज्यादा राज्यों में भाजपा व गठबंधन की सरकार है यह जनता का भरोसा ही है जो काम दूसरी पार्टियों या सरकार कर रही थी वही काम सत्ता में आने के बाद आप कर रहे है तो उसमें और आप में क्या फर्क रह जाएगा कल तक आप उन पर आरोप लगाते थे और आज सत्ता में आने के बाद वही हाल आपका है देश की जनता हिंदू तत्व पर और देश के लिए बार-बार वोट आपको अब नहीं देगी अपने बच्चों पर अपने बेटे बेटियां पर लाठी खाने के लिए वोट नहीं देगी राम के नाम पर अब वोट नहीं देगी जिस विपक्षी पार्टी मनमोहन सिंह को आप कहते थे कि मोन तोड़ो आज सबसे ज्यादा मोन तो आप धारण करके बैठे हैं विदेश में और चुनाव के समय में लंबा-लंबा भाषण देते हैं बातें करते हैं पर जब बात सच की आती है तो बोलती बंद हो जाती है क्यों? जो नियम कायदा अपने दूसरों के लिए बनाया था उस पर खुद अमल क्यों नहीं करते हो कुर्सी का मोह इतना क्यों है? जब कहते हैं न बीबी है न बच्चा है किसी से मोह नहीं है ना घर बार कि टेशन है बस सिर्फ देश की चिंता है तो फिर कुर्सी से इतना मोह क्यों लगा कर रखा है जवाब दीजिए मोदी जी? छोड़ क्यों नहीं देते इस कुर्सी को 15 साल तक मुख्यमंत्री रहे 12 साल हो गया प्रधानमंत्री हो 75 साल उम्र हो गई है और कितना सत्ता सुख लोगे? दूसरों पर आरोप लगाना आसान है पर जब बात अपने पर आती है तब पता चलता है अगर आप कहते हैं मैं सेवा कर रहा हूं तो सेवा करने के लिए पार्टी में और भी लोग हैं आपसे ज्यादा बड़े योगी बैठे हैं जो बोलते नहीं है सच में करके दिखाते भी हैं जो धर्म योगी हैं न्याय योगी हैं क्यों नहीं उन्हें कुर्सी दे देते हो और सेवा करना है तो जरूरी नहीं है कुर्सी पर बैठकर सेवा की जाती है बगैर कुर्सी में बैठकर भी सेवा की जाती है, दिल्ली की घटना ने पूरे देश को झकजोड़ कर दिया है जिसने भी यह वीडियो फोटो देखे हैं सबने एक बात कही है क्या इसलिए हमने प्रधानमंत्री बनाया था क्या लोकतंत्र यही है पहले तो आंखों में विश्वास नहीं हुआ कि यह घटना दिल्ली की है या किसी दूसरे देश की है ऐसा हाल हम दूसरे देश में देखा करते थे खबरों में पढ़ा करते थे लेकिन जब वास्तविक में अपने ऊपर बीती तो तब पता चला अहंकार तानाशाही सिर्फ विदेशों में नहीं हमारे देश में भी है क्या दिल्ली के गुनहगारों को सजा मिलेगी निहत्ते बेटे और बेटियों पर हुए अत्याचार की जनसुनवाई होगी अपना हक मांगने वाले सच बयां करने वालों पर जो अत्याचार हुआ क्या दोषीयो को सजा मिलेगी, ऐक बार अपने अंदर भी झांक कर देखो अपने अंतरात्मा से पूछो जो आप कर रहे हो क्या वह सही है दिल्ली को दिल्ली रहने दो बांग्लादेश पाकिस्तान मत बनाओ? देश की जनता का विश्वास पाना है तो दिल्ली के गुनहगारों को सजा देनी होगी और जो भ्रष्ट हैं चाहे अधिकारी हो चाहे नेता हो या मंत्री हो या मुख्यमंत्री हो उनको तुरंत बर्खास्त करना होगा और कार्रवाई करनी होगी तभी देश की जनता का विश्वास वापस आप पा सकते हैं नहीं तो इस कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है आपको,
संपादकीय
