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*बिलासपुर। गुरु पूर्णिमा के परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ी राजभाषा परिषद् द्वारा स्थानीय संस्कार भवन, में भव्य संगीत संध्या का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुविख्यात भाषाविद्, समीक्षक, पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक थे।कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सनत तिवारी ने की तथा विशेष अतिथि परिषद के संरक्षक डॉ. राघवेंद्र दुबे थे, जिनका प्रेरक वक्तव्य भी इस अवसर पर प्राप्त हुआ। अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि श्रेष्ठ गुरु के मार्गदर्शन, आशीर्वाद एवं संस्कारों से ही व्यक्ति के जीवन का वास्तविक कल्याण होता है। भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी उच्च स्थान प्रदान किया गया है। गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और उनकी आज्ञा का पालन ही जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। कार्यक्रम में कबीर एवं सूफी गायक मनोहर दास मानिकपुरी तथा उनके साथियों ने कबीर भजन एवं सूफी गीतों की मनोहारी संगीतमय प्रस्तुतियाँ देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पश्चात सुप्रसिद्ध चिकारा वादक झड़ी राम साहू (ग्राम करगीकला, जिला बिलासपुर) ने अपने मधुर चिकारा वादन एवं लोकगायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही कवि एवं गायक राम निहोरा राजपूत, कांति कुमार दुबे, सतानंद दुबे ने अपनी प्रस्तुति दी तथा कार्यक्रम में वादन की मनोहारी प्रस्तुतियाँ कलाकार रामकुमार श्रीवास, ललित कश्यप, पुहुप सिंह राजपूत, परमेश्वर सिंगरौल, रामकुमार साहू एवं मोहित राम साकेत द्वारा दी गईं। मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने सभी कलाकारों को सम्मानित कर उनके सांस्कृतिक योगदान की सराहना की। स्वागत भाषण में परिषद् के अध्यक्ष डॉ. विवेक तिवारी ने परिषद् द्वारा भाषा, साहित्य एवं लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन हेतु किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की जानकारी देते हुए सभी कलाकारों एवं उपस्थित जनों का स्वागत किया तथा शुभकामनाएँ दीं।इस अवसर पर विशेष रूप से महेंद्र दुबे, शीतल प्रसाद पाटनवर, मोहन सोनी लिप्सा पटेल, सुरेखा महतो एवं नीलिमा यादव भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राघवेन्द्र कुमार दुबे ने किया, जबकि डॉ. शत्रुघ्न जेसवानी ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर साहित्यकार, कलाकार, संगीतप्रेमी, परिषद् के पदाधिकारी, सदस्यगण तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
