
ऋतुपर्णा’ कृति का विमोचन, साहित्यकारों एवं लोक कलाकारों का सम्मान, लोकगीतों की मनोहारी प्रस्तुति
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के प्रथम ईसुरी पुरस्कार से सम्मानित यशस्वी लोक साहित्यकार पंडित अमृतलाल दुबे की जयंती के अवसर पर पं. अमृतलाल दुबे जयंती समारोह समिति द्वारा संस्कार भवन, पुराना सरकंडा, बिलासपुर में गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यिक कृति का विमोचन, साहित्यकारों एवं लोक कलाकारों का सम्मान तथा लोकगीतों की संगीतमय प्रस्तुतियाँ आकर्षण का केंद्र रहीं।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति चन्द्रभूषण वाजपेयी थे। अध्यक्षता डॉ. विनय कुमार पाठक (पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ, गोपालगंज, बिहार) ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अभिलाषा बेहार (सचिव, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग) तथा डॉ. श्यामलाल निराला (प्राचार्य, जे.पी. वर्मा स्नातकोत्तर कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय) उपस्थित रहे।स्वागत उद्बोधन में डॉ. विवेक तिवारी ने पंडित अमृतलाल दुबे के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका साहित्य छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर है।कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. राघवेन्द्र कुमार दुबे ने बताया कि डॉ. विनय कुमार पाठक के संरक्षकत्व में विगत 36 वर्षों से समिति द्वारा यह आयोजन निरंतर किया जा रहा है। इस अवसर पर साहित्य एवं कला साधकों, लोक साहित्य के शोधार्थियों का सम्मान, साहित्यिक कृतियों का विमोचन तथा काव्यांजलि का आयोजन किया जाता है।समारोह में वरिष्ठ कवि अंजनी कुमार तिवारी ‘सुधाकर’ की चर्चित कृति “ऋतुपर्णा” का लोकार्पण किया गया तथा उनका सम्मान भी किया गया।काव्यांजलि में सनत तिवारी, राम निहोरा राजपूत, राजेश कुमार सोनार, डॉ. अंकुर शुक्ला, डॉ. शत्रुघ्न जेसवानी एवं और बालमुकुंद श्रीवास ,सुरेश सिंह बैस ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं का पाठ किया। इस अवसर पर शिक्षाविद् डॉ. श्याम लाल निराला, वरिष्ठ कवि सनत तिवारी, कथाकार श्रीमती अनामिका शर्मा ‘शशि’ (रायपुर), लोकगायक मनोहर दास मानिकपुरी, गीतकार श्री राम निहोरा राजपूत, 80 वर्षीय चिकारा (चिंकारा) वादक श्री झड़ीराम साहू (करगी कला), वरिष्ठ गायक कांति कुमार दुबे, श्री सतानंद दुबे सहित अनेक लोक कलाकारों को सम्मानित किया गया।सांस्कृतिक प्रस्तुति में मनोहर दास मानिकपुरी, राम निहोरा राजपूत एवं उनके साथियों ने पंडित अमृतलाल दुबे तथा संत कबीर के लोकगीतों की भावपूर्ण संगीतमय प्रस्तुति दी। वहीं श्री कांति कुमार दुबे एवं सतानंद दुबे ने भी अपनी मधुर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति चन्द्रभूषण वाजपेयी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पंडित अमृतलाल दुबे का छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी है। उनकी कृति “तुलसी के बिरवा जगाय” लोक साहित्य की अमूल्य निधि है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की प्रेरणा देती रहेगी।अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि पंडित अमृतलाल दुबे केवल लोक साहित्य के मर्मज्ञ ही नहीं, बल्कि हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी साहित्य के श्रेष्ठ सर्जक थे। उनकी कृति “तुलसी के बिरवा जगाय” को तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रतिष्ठित ईसुरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।विशिष्ट अतिथियों डॉ. अभिलाषा बेहार, डॉ. श्याम लाल निराला ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य के पुरोधाओं का स्मरण समाज की सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाता है तथा ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को साहित्य और लोकसंस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं। इसके पश्चात बालमुकुंद श्रीवास के संचालन में आयोजित भव्य काव्य गोष्ठी में सनत तिवारी, सुरेश सिंह बैस ,डॉ शत्रुघ्न जैसवानी, शीतल प्रसाद पाटनवार, केवल कृष्ण पाठक, डॉ सुधाकर बिबे, बालगोविंद अग्रवाल, बालमुकुंद श्रीवास, आशीष श्रीवास, एम. के. दुबे, गणेश प्रसाद कश्यप, हेमंत कुमार गौर, अजय शर्मा, अरविन्द कुमार कश्यप, डॉ मन्तराम यादव, डॉ० सत्यनारायण तिवारी, श्री विष्णु कुमार तिवारी, बलराम पाण्डेय, रामेश्वर सिंह शांडिल्य, श्रीमती मीना दुबे, डॉ अर्चना तिवारी, हरिराम कश्यप, राघवेंद्र धर दीवान, आर. एस. गौतम, विमल सिंह राजपूत, डॉ. रमेश चन्द्र श्रीवास्तव, राजेश कुमार सोनार, दिनेश पाण्डेय, श्रीमती पूर्णिमा तिवारी, यागनी तिवारी, सरस्वती सोनी, श्रीमती आशा चंद्राकर, डॉ. अंजना शर्मा, केसी दुबे, श्रीमती जया तिवारी, श्रीमती जलेश्वरी वस्त्रकार, सरस्वती शर्मा, विजय गुप्ता, उमाकान्त खरे, डॉ. पं. श्रीधर गौरहा, राजेश वस्त्रकार, वेद प्रकाश अग्रवाल, मोहन सोनी कोटा, दिनेश तिवारी आदि उपस्थित कवि कवियत्रियों ने काव्य पाठ किया । कार्यक्रम का संचालन डॉ. राघवेन्द्र कुमार दुबे ने किया तथा श्री महेन्द्र दुबे ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कलाकारों एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया।
