बिलासपुर।आशा स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक, इनरव्हील क्लब ऑफ़ बिलासपुर एवम जेसीआई ग्रुप के तत्वाधान में स्पेशल बच्चों का फैंसी ड्रेस कम्पटीशन आशा स्पीच क्लिनिक नारायण प्लाजा परिसर में किया गया । कार्यक्रम की शुरुआत जेसीआई प्रेसिडेंट प्रतीक इनरव्हील क्लब की अध्यक्ष डॉ संगीता बनफ़र ,चरणजीत गंभीर द्वारा द्वीप प्रज्ज्वलित से किया गया ।
कार्यक्रम मैं डॉ राम अग्रवाल जो की ऑडियोलॉजिस्ट एंड वर्टिगो स्पेशलिस्ट (चक्कर) उन्होंने पूरी सहभागिता दी यह क्लिनिक पिछले २५ साल से विकलांग बच्चों कि सर्वांगीण विकास के लिए कार्यरत है क्लिनिक में स्पीच थेरेपी, कान की मशीन , फिजियोथेरेपी ,बिहेवियर थेरेपी की सेवाए उपलब्ध है।
फैंसी ड्रेस कम्पटीशन में लगभग 70 से ज़्यादा ऐसे दिव्यांग बच्चे जो ऑटिस्टिक ,डाऊन सिंड्रोम,श्रवण बाधित दिव्यांगता से प्रभावित बच्चों ने सहभागिता निभाई । बच्चों ने मनमोहक ढंग से देश के महापुरुषों,स्वतंत्रता संग्राम सेनानीयो का वेशभूषा पहनकर बहुत ही सुंदर प्रस्तुतिकरण किया। कुछ बच्चे सेना के सिपाही बने तो कुछ भारत माता तो कोई लक्ष्मी बाई गार्गी राजस्थानी महिला बनी वही आरना ढाई साल की बच्ची भगवान बुद्ध बनकर उपस्थित लोगों को सत्य और अहिंसा का संदेश दिया ।
कार्यक्रम के मुख्य अभ्यागत में चरणजीत गंभीर राजेंद्र अग्रवाल राजू सुल्तानिया रेखा मदन मोहन गुल्ला स्मृति जैन रहे
बतौर अतिथि चरणजीत सिंह गंभीर ने इस अनूठी कार्यक्रम की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी अनूठी पहल से विशेष बच्चों का आत्मबल बढ़ता है और उनके पालकों में एक नए ऊर्जा का संचार होता है। जो उन्हें सबलता प्रदान करता है। उपस्थित अतिथियों द्वारा शुभकामनाओं के साथ उज्ज्वल भविष्य की कामना किया गया।
कार्यक्रम में हरिहर आक्सीजोन के , संयोजक भुवन संतोषी वर्मा,शिव संध्या सारथी, ममता गुप्ता,प्रीति हितेश चौहान, तारा साहू , श्रीमती रुचिका अग्रवाल , लक्ष्मी अनंत डॉ अमित दुआ ,डॉ अंकिता दुआ , श्रीमती मंजू धंधारिया, डॉ सुनीता चावला,श्रीमती राखी शर्मा ,ऋचा ,अश्विनी ,संगीता साहू ,परवीन आलम ,रश्मि जैसवाल ,सावित्री अग्रवाल,पूनम मित्तल , बीना जायसवाल , अंजलि , सिद्धार्थ गुप्ता , आयुष अग्रवाल सहीत बड़ी संख्या में आशा स्पीच व हियरिंग संस्था के लोग उपस्थित रहे। सभी बच्चों को पुरस्कार से सम्मानित किया गया । कार्यक्रम का संचालन गूँजन अग्रवाल , डॉ राम अग्रवाल डॉ दीपिका गोस्वामी ने किया ।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इन विशेष बच्चों की प्रतिभा को निकाल कर उन्हें सामान्य लोगो की तरफ़ ले जाना है।
