बिलासपुर ;- विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ. ललित माखीजा ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के काम को केवल संगठन के कार्यकर्ताओं तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हर हिंदू समाज का व्यक्ति एक तरह से विश्व हिंदू परिषद के ध्येय से जुड़ा हुआ है।”
उनके अनुसार संगठन का मूल उद्देश्य समाज को समरस, संस्कारी और सेवाभावी बनाना है। जिस तरह बच्चों को संस्कार और सेवा की भावना सिखाई जाती है, उसी तरह पूरे समाज में इन मूल्यों को मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल संगठन के कार्यकर्ता ही जिम्मेदार नहीं हैं। संगठन तो एक माध्यम है, लेकिन समाज को संस्कारित, संगठित और सेवाभावी बनाने का दायित्व व्यापक है।
“हिंदुत्व खतरे में है या नहीं?”
2014 के बाद हिंदुत्व के खतरे में होने की चर्चा को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ. माखीजा ने सवाल किया—“2014 के बाद हिंदुत्व खतरे में कैसे आ गया?”
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म और हिंदुत्व की मूल अवधारणाओं को समझना जरूरी है। उनके अनुसार यदि हिंदू समाज अपने मूल मूल्यों और सिद्धांतों को समझकर उन्हें जीवन में अपनाता है, तो हिंदुत्व को कोई खतरा नहीं है।
उन्होंने जनसंख्या संतुलन को एक महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि इसके प्रभाव तत्काल दिखाई नहीं देते। कई बार इसके परिणाम कई दशकों या सदियों के परिप्रेक्ष्य में सामने आते हैं।
उन्होंने कहा कि इतिहास को समझना और उससे सीखना जरूरी है। उनके अनुसार जनसंख्या में होने वाले बदलावों का प्रभाव समाज की परिस्थितियों पर पड़ सकता है, इसलिए इस विषय को केवल वर्तमान समय की घटनाओं के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
“दूसरे के दर्द को समझने के लिए उसके साथ खड़ा होना जरूरी”
कश्मीर का उदाहरण देते हुए डॉ. माखीजा ने कहा कि किसी घटना को समझने के लिए उसके प्रभावित व्यक्ति के दर्द को समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपना घर, परिवार और संपत्ति छोड़कर पलायन करने के लिए मजबूर हुआ है और हम उसके साथ संवेदना से नहीं जुड़ते, उसके दर्द को समझने का प्रयास नहीं करते, तो हमारे सामने कई सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे।
उन्होंने कहा कि बिलासपुर और छत्तीसगढ़ में रहने वाले लोगों को अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण मिला है, इसलिए देश के कुछ अन्य हिस्सों की परिस्थितियों को समझना कठिन हो सकता है।
“जागरूक रहना है, किसी से लड़ना नहीं”
धार्मिक स्थलों और बदलती सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए डॉ. माखीजा ने कहा कि समाज को किसी से संघर्ष करने की भावना के बजाय जागरूक और सजग रहने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “हमको किसी से लड़ना नहीं है, लेकिन स्वयं जागृत रहना है।”
उनके अनुसार सामाजिक जागरण का काम केवल किसी एक संगठन का नहीं है। जो लोग इस दिशा में काम कर रहे हैं, समाज को उनके प्रयासों को समझना और सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी धर्मों को अपने-अपने धार्मिक कर्तव्यों और पूजा-पद्धतियों का अधिकार देता है। इसलिए समाज में धार्मिक और सामाजिक विषयों को समझते समय संवैधानिक मूल्यों और आपसी समरसता को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
अंत में उन्होंने दोहराया कि विश्व हिंदू परिषद के कार्य का मूल उद्देश्य समाज को जागृत, संस्कारित, समरस और सेवाभावी बनाना है और इस कार्य में समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका है।
