*बिलासपुर।* प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शिव गुलजार भवन, तोरवा में संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका आदरणीय राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी का 19वाँ पुण्य स्मृति दिवस श्रद्धा, प्रेम एवं आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। दादी प्रकाशमणि जी का पुण्य स्मृति दिवस प्रतिवर्ष विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
उक्त कार्यक्रम राजयोगिनी बी.के. राखी दीदी जी के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस अवसर पर पूर्णिमा दीदी जी ने दादी प्रकाशमणि जी के महान एवं प्रेरणादायी जीवन को स्मरण करते हुए कहा कि दादी जी ने अपने जीवन के माध्यम से मानवता को सदा निमित्त भाव, निर्माण, निर्मल वाणी, प्रेम, सेवा और विश्व बंधुत्व की शिक्षा दी। दादी जी सदैव स्वयं को निमित्त मात्र समझती थीं और हर कार्य को कराने वाले परमात्मा को मानती थीं।
उन्होंने कहा कि दादी जी सदा निमित्त, निर्माण और निर्मल वाणी के सिद्धांतों को अपने जीवन में धारण किए रहीं। उनके जीवन में सच्चाई, सरलता, पवित्रता और प्रेम का अद्भुत समन्वय था। वे सभी के प्रति समान दृष्टि रखती थीं और अपने मधुर एवं निर्मल वचनों से हर व्यक्ति के हृदय को स्पर्श कर लेती थीं।
पूर्णिमा दीदी जी ने कहा कि दादी प्रकाशमणि जी के पास जो भी व्यक्ति आता था, वह उनके मातृत्वमय प्रेम और आत्मीय स्नेह से भर जाता था। हर किसी को उनमें एक स्नेहमयी माँ की छवि दिखाई देती थी। दादी जी ने अपने प्रेमपूर्ण व्यवहार और विश्व कल्याण की भावना के माध्यम से सभी को एकता और भाईचारे के सूत्र में बांधने का महान कार्य किया। यही कारण है कि उनका पुण्य स्मृति दिवस विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाया जाता है।
कार्यक्रम में बी.के.गोपाल भैया ने दादी जी द्वारा सभी को दी गई दिव्य पालना, उनके स्नेहपूर्ण व्यवहार एवं महान जीवन मूल्यों का वर्णन किया।
रवि भैया एवं आशीर्वाद भैया ने भी दादी प्रकाशमणि जी के सेवाभावी, स्नेहमयी एवं विश्व कल्याणकारी व्यक्तित्व का वर्णन करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में विश्व में शांति, प्रेम, आपसी भाईचारा, मानवता एवं विश्व की सुख-शांति और सुरक्षा के लिए सभी उपस्थित भाई-बहनों ने संकल्प लिया और दादी प्रकाशमणि जी को सच्चे हृदय से भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर राजयोगिनी बी.के. सरोज दीदी जी ने उपस्थित सभी भाई-बहनों को दादी जी की पावन स्मृतियों का स्मरण कराते हुए राजयोग मेडिटेशन कराया।
सभी ने दादी जी के श्रेष्ठ गुणों को अपने जीवन में धारण करने तथा विश्व में प्रेम, शांति एवं भाईचारे का संदेश फैलाने का संकल्प लिया।
तत्पश्चात सभी उपस्थित भाई-बहनों ने प्रेम एवं श्रद्धा के साथ दादी प्रकाशमणि जी को पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के समापन पर परमात्म स्मृति में भोग स्वीकार किया गया एवं सभी को प्रसाद वितरित किया गया।
दादी प्रकाशमणि जी की पावन स्मृतियों को समर्पित यह आयोजन सभी के लिए सदा निमित्त भाव से कार्य करने, निर्माण की भावना रखने, निर्मल वाणी बोलने तथा प्रेम और सेवा से विश्व को एकता के सूत्र में बांधने की प्रेरणा बन गया।
