स्थानीय सिंधु नगर स्थित पूज्य शदाणी दरबार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ समापन हुआ। यह धार्मिक आयोजन प्रथम पातशाही सतगुरु संत शदाराम साहिब जी एवं संत गोबिंदराम साहिब जी की असीम अनुकंपा तथा वर्तमान पीठाधीश्वर संत शिरोमणि डॉ. युधिष्ठिर लाल जी के पावन आशीर्वाद से संपन्न हुआ।
कथा के समापन दिवस पर मुख्य सानिध्य पूज्य साईं उदयलाल जी शदाणी का रहा, जबकि व्यासपीठ से कथाव्यास श्री धीराराम बत्रा ने अपने मुखारविंद से अंतिम दिवस के प्रसंगों का भावपूर्ण रसपान कराया।
प्रातःकाल 9:00 बजे ‘आसा दी वार’ के अमृतमयी कीर्तन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके पश्चात पूर्वाह्न 11:00 बजे श्रीमद्भागवत कथा प्रारंभ हुई और दोपहर 2:00 बजे विधिवत आरती व विश्राम के साथ कथा संपन्न हुई।
शदाणी सेवक जहां भी रहे, आबाद और मस्त रहे: साईं उदयलाल जी
इस पावन अवसर पर संगत को आशीर्वचन देते हुए साईं उदयलाल जी शदाणी ने कहा, “शदाणी सेवक दुनिया के चाहे जिस कोने में भी रहें, सदा मस्त रहें और आबाद रहें। कथा के सफल विश्राम की समस्त संगत को कोटि-कोटि बधाइयां।”
साईं जी ने शदाणी दरबार की कथा परंपरा पर प्रकाश डालते हुए आगे कहा कि दुनिया में कथावाचक बहुत हैं, लेकिन पूज्य संतों के आशीर्वाद से तीर्थ दरबार की परंपरा के तहत लगभग 15 कथाकारों का एक विशेष समूह तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि ये कथाकार जगह-जगह, समय और परिस्थिति के अनुरूप जनसाधारण के बीच जाकर सहज व सरल भाषा में कथा प्रस्तुत कर सकें, जिससे कथा सुनाने वाले और सुनने वाले दोनों ही ईश्वरीय आनंद और प्रेम का अनुभव कर सकें।
समापन अवसर पर समाज के गणमान्य बंधु, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस दौरान श्रद्धालु भक्तों ने पूज्य संतों के समक्ष नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा विश्राम के उपरांत आरती कर उपस्थित संगत में भंडारे का वितरण किया गया।
