उच्च शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आखिर कब तक बाहर जाते रहेंगे कटनी के युवा?
कटनी । दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में छह मंजिला इमारत से जुड़े हादसे में कटनी के छात्र अक्षत यादव की मलबे में दबने से हुई मौत ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। अक्षत दिल्ली में रहकर दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम ऑनर्स की पढ़ाई कर रहा था। उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना लेकर घर से निकला यह छात्र अब कभी वापस नहीं लौटेगा।
अक्षत की दुखद मौत ने केवल एक परिवार को गहरा आघात नहीं पहुंचाया, बल्कि कटनी में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर वर्ष कटनी जिले से बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए जबलपुर, भोपाल, इंदौर, नागपुर, दिल्ली और देश के अन्य बड़े शहरों का रुख करते हैं। सवाल यह है कि आखिर उन्हें अपने शहर से दूर जाने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ता है?
कटनी में यदि विद्यार्थियों को उनकी रुचि और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप उच्च शिक्षा के पर्याप्त अवसर, विश्वविद्यालय स्तर की सुविधाएं और विविध पाठ्यक्रम उपलब्ध हों, तो क्या इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को दूसरे शहरों में जाना पड़ेगा? अक्षत जैसे अनेक युवा अपने बेहतर भविष्य की तलाश में घर से दूर जाते हैं और उनके परिवार हर समय उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।
शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं भी चिंता का विषय
कटनी में केवल उच्च शिक्षा ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। गंभीर बीमारी या आकस्मिक चिकित्सा जरूरत पड़ने पर जिले के लोगों को जबलपुर, नागपुर और अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि शहर के विकास का वास्तविक पैमाना आखिर क्या होना चाहिए?
क्या केवल सड़कों, जमीनों और निजी निर्माण परियोजनाओं को विकास मान लेना पर्याप्त है? शहर के नागरिकों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।
अक्षत की मौत ने फिर जगाई उम्मीद
अक्षत यादव की मौत को केवल एक हादसा मानकर भूल जाना शायद उस परिवार के दर्द के साथ न्याय नहीं होगा। इस घटना ने कटनी के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—क्या हमारे बच्चों को बेहतर शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए हमेशा अपना शहर छोड़ना पड़ेगा?
शहर के जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार लोगों से अब यह अपेक्षा है कि वे कटनी में उच्च शिक्षा के विस्तार, विश्वविद्यालय स्तर की संस्थाओं, नए और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए ठोस पहल करें।
अक्षत अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी मौत से उठे सवाल आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े हैं। जरूरत इस बात की है कि इन सवालों को सिर्फ चर्चा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि कटनी को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं।
