– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर । न्यायधानी स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करते हुए तीन नए न्यायाधीशों ने आधिकारिक रूप से शपथ ग्रहण कर अपना पदभार संभाल लिया है। केंद्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रपति की मंजूरी के उपरांत 8 सितंबर को इन तीनों न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की गई थी।
शपथ ग्रहण समारोह का विवरण
शपथकर्ता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश। शपथ लेने वाले नए न्यायाधीश: संतोष शर्मा, श्रीमती सुषमा सावंत और सुधीर कुमार। कार्यक्रम की शुरुआत: सुबह 10 बजे चीफ़ जस्टिस के कोर्ट में रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से जारी नियुक्ति वारंट का वाचन किया। शपथ विधि: इसके पश्चात मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र ने संतोष शर्मा, इसके बाद श्रीमती सुषमा सावंत एवं सुधीर कुमार को उनके पद की शपथ दिलाई। इस गरिमामयी समारोह में महाधिवक्ता विवेक शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष, हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रजनीश सिंह सहित नवनियुक्त जजों के परिवार के सदस्य और बड़ी संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित रहे। इस दौरान बार एवं बेंच के मध्य बेहतर तालमेल के साथ कार्य करने का आश्वासन दिया गया।
नवनियुक्त न्यायाधीशों का संक्षिप्त परिचय एवं कार्यक्षेत्र: न्यायमूर्ति संतोष शर्मा
इन्होंने 19 मार्च 2009 को न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था। बिलासपुर में एडीजे के रूप में न्यायिक सेवा की शुरुआत करने के बाद, वे जगदलपुर में प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अंबिकापुर में एससी-एसटी अधिनियम के विशेष न्यायाधीश और दंतेवाड़ा व बलौदाबाजार में जिला एवं सत्र न्यायाधीश रहे। वे हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार (विजिलेंस) के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। नियुक्ति से पूर्व वे कोरबा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर पदस्थ थे।
न्यायमूर्ति श्रीमती सुषमा सावंत
इन्होंने 15 अप्रैल 1994 को न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था और इन तीनों में सबसे लंबा न्यायिक अनुभव रखती हैं।दुर्ग, बलौदाबाजार और रायपुर में सिविल जज के रूप में काम करने के बाद, उन्होंने अंबिकापुर में सिविल जज एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रायपुर में एडीजे तथा राजनांदगांव में एडीजे के रूप में सेवाएं दीं। वे बिलासपुर में फैमिली कोर्ट की जज और महासमुंद व बिलासपुर में जिला जज भी रहीं। राजनांदगांव जिला जज रहने के साथ ही वे अक्टूबर 2025 से राज्य शासन के विधि एवं विधाई कार्य विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत थीं और कुछ समय पूर्व ही उन्हें राज्य न्यायिक अकादमी का प्रभार दिया गया था।
न्यायमूर्ति सुधीर कुमार
इनके संबंध में विस्तृत पृष्ठभूमि को मुख्य रूप से इनकी कार्यप्रणाली और कार्यभार ग्रहण करने के संदर्भ में रेखांकित किया गया है।
कार्यभार संभालते ही संभाली न्यायिक जिम्मेदारी
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद तीनों ही नवनियुक्त न्यायमूर्तियों ने बिना समय गंवाए अपना कार्यभार संभाल लिया और भोजन अवकाश तक डिवीजन बेंच (डीबी) में बैठे।
डिवीजन बेंच भोजन अवकाश तक बैठी
जस्टिस संतोष शर्मा, जस्टिस पीपी साहु के साथ श्रीमती सुषमा सावंत एवं जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास के साथ बेंच में शामिल रहे। जस्टिस सुधीर कुमार भी भोजन अवकाश तक डीबी में ही कार्य करते रहे।
सिंगल बेंच (दोपहर 2:15 के बाद)
कोर्ट हॉल नंबर 17
जस्टिस संतोष शर्मा ने मोटर दुर्घटना दावा के मिस्लेनियस अपील के मामलों की सुनवाई की।
कोर्ट हॉल नंबर 16
जस्टिस सुषमा सावंत ने वर्ष 2018 तक के द्वितीय एवं प्रथम अपील के मामलों की सुनवाई की।
कोर्ट हॉल नंबर 18
जस्टिस सुधीर कुमार ने वर्ष 2014 तक के आपराधिक अपील एवं 2020 के आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई की। इन तीन नए न्यायाधीशों के पदभार ग्रहण करने के पश्चात अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
