–बालक-बालिकाओं ने प्रस्तुत किए विचार, अभिषेक लोहार प्रथम, प्रभुलाल गाडरी द्वितीय व बेबी कंवर तृतीय
भीलवाड़ा। भगवान श्री श्रीचंद्र जी के 532वें प्राकट्य उत्सव के उपलक्ष्य में हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में हरि शेवा संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय के 10 बालक-बालिकाओं ने भाग लेकर भगवान श्री श्रीचंद्र जी के जीवन, शिक्षाओं एवं सनातन परंपरा से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता में अभिषेक लोहार ने प्रथम, प्रभुलाल गाडरी ने द्वितीय तथा बेबी कंवर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को क्रमशः 501, 351 एवं 251 रुपये की नगद पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
प्रतियोगिता के सफल संचालन एवं मूल्यांकन के लिए संत गोविन्द राम, रमेश अगनानी एवं पुरुषोत्तम परियानी को निर्णायक नियुक्त किया गया। इस अवसर पर सचिव ईश्वर आसनानी ने संबोधित करते हुए भगवान श्री श्रीचंद्र जी के जीवन एवं उनके उपदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन मोहन लाल शर्मा ने किया, जबकि डॉ. रूपा पारीक ने वंदे मातरम् का गान प्रस्तुत किया।
जीवन का उद्देश्य भगवत प्राप्ति : स्वामी हंसराम
महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने अपने आशीर्वचन में कहा कि जीवन का उद्देश्य भगवत प्राप्ति है। उन्होंने कहा कि भगवान कण-कण में विद्यमान हैं। देश सेवा, धर्म सेवा और समाज सेवा सनातन धर्म के महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्होंने उदासीन परंपरा का उल्लेख करते हुए भगवान श्री श्रीचंद्र जी के संपूर्ण जीवन एवं उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला। स्वामी हंसराम महाराज ने भगवान श्री श्रीचंद्र जी और भामाशाह से जुड़ी उस परंपरागत मान्यता का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार हल्दीघाटी युद्ध के दौरान श्री श्रीचंद्र जी ने भामाशाह को स्वप्न में देश रक्षा के लिए अपनी अर्जित संपत्ति महाराणा प्रताप को समर्पित करने का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग देश, धर्म और समाज के प्रति समर्पण की भावना को दर्शाता है। कार्यक्रम में संत मायाराम, संत केशवराम, मिहिर सहित विद्यालय के शिक्षकगण, छात्र, अध्यापक एवं अध्यापिकाएं उपस्थित रहे।
