*यातायात पुलिस बिलासपुर*
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*🔹प्रथम दिवस ही 3000 से अधिक ऑटो चालकों ने कराई ऑटो रिक्शा का क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल पंजीयन*
*🔹ऑटो रिक्शा के बिलासपुर पुलिस द्वारा डिजिटल पंजीयन का नागरिकों ने किया सराहना।*
*🔹डिजिटल तकनीक से ऑटो रिक्शा एवं यात्रियों के मध्य आवागमन के दौरान ड्राइवर के बारे में पूर्ण जानकारी होने से बढ़ेगी आपसी विश्वास एवं सुरक्षा भावना*
*🔹इस योजना के तहत जिले के सभी चौक चौराहे पर अभियान चलाकर किए जाएंगे समस्त ऑटो का डिजिटल रूप से पंजीकरण*
*🔹सार्वजनिक परिवहन प्रणाली व नागरिकों के सुविधाओं हेतु और भी सुरक्षित और पारदर्शी रूप से होगी संचालित*
*🔹क्यूआर कोड के सभी जगह पर उपलब्ध होने से कहीं से भी कर सकेंगे ऑटो चालक अपना अपना आन लाइन रजिस्ट्रेशन*
*🔹तीन दिवस में सभी ऑटो चालकों को अनिवार्य रूप से क्यूआर कोड स्कैन कर रजिस्ट्रेशन कराने हेतु बिलासपुर पुलिस द्वारा दी गई समय सीमा*
पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज एवं पुलिस उप महानिरीक्षक व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह के दिशा निर्देश पर बिलासपुर एवं यातायात पुलिस द्वारा बिलासपुर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी एवं तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत ई-रिक्शा के डिजिटल पंजीकरण एवं क्यूआर कोड आधारित पहचान व्यवस्था
“रिक्शा डिजिटल पंजीकरण एवं नागरिक सुरक्षा नेटवर्क कार्यक्रम” का भव्य शुभारंभ चेतना भवन पुलिस ग्राउंड, बिलासपुर में किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत जिले भर से आए हुए ऑटो चालकों एवं शहर के प्रबुद्ध नागरिकों के विशाल उपस्थिति से खचाखच भरे हुए चेतना भवन के सभागार में अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं क्यूआर कोड के अनावरण एवं मुख्य अतिथि आई जी बिलासपुर रेंज श्री रामगोपाल गर्ग एवं नगर निगम आयुक्त श्री प्रकाश सर्वे, सहित मुख्य अभ्यागतों के स्वागत से हुई।
भारत का प्रथम राज्य छत्तीसगढ़ में “रिक्शा डिजिटल पंजीकरण एवं नागरिक सुरक्षा नेटवर्क” का यह भव्य शुभारंभ जिले में यात्रियों के सुरक्षित सफर की एक नई पहचान स्थापित करेगी डिजिटल ई रिक्शा अभियान के संचालन के लिए जिले के समस्त सड़क सुरक्षा से संबद्ध विभागों, विभिन्न इकाइयों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आम नागरिकों के बेहतर समन्वय के माध्यम से किए जाने हेतु सभी से विशेष अन्तर्विभागीय समन्वय स्थापित की गई है।
मुख्य अभ्यागत आईजी बिलासपुर रेंज श्री गर्ग ने अपने संबोधन में ऑटो चालकों को सुरक्षा इकाइयों एवं पुलिस के अभिन्न सहयोगी के रूप में बताते हुए उन्हें समाज में घटित होने वाले विभिन्न प्रकार के नकारात्मक घटनाओं के जानकारी, पूर्वाभास एवं घटनाओं की तत्क्षण जानकारी होने से समाज में होने वाले नकारात्मक घटनाओं को रोके जाने में अहम भूमिका निभाने वाले समूह के रूप में संबोधित किए।
उन्होंने कहा कि ऑटो चालकों की पहचान जिले के समस्त क्षेत्र में होने से उन्हें जिले के शहर और जिले के चप्पे चप्पे के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारियां एवं सभी क्षेत्र के रहवासी जन समूह की गतिविधियों के बारे में भी गहन जानकारी होती है अतः पुलिस के विशेष सहयोगी के रूप में उनके भूमिका समाज में किसी भी प्रकार के अपराध को रोकने में भी अहम होती है।
उन्होंने कहा कि शहरों के विस्तार के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की भूमिका में निरंतर वृद्धि हो रही है जिसमें ऑटो एक महत्वपूर्ण सरल और सुगम माध्यम है जिसमें महिलाओं बच्चों बुजुर्गों एवं सभी प्रकार के लोगों के द्वारा सहज रूप से आवागमन की जाती है इससे ऑटो चालकों की पहचान सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है ताकि यात्री किसी भी ऑटो में बिना किसी शंका और भ्रम के ऑटो चालक के संबंध में पूर्ण जानकारी प्राप्त करके अपने गंतव्य तक जाने के लिए सुरक्षित तरीके से आवागमन कर सके।
उन्होंने कहा कि यूनिक आईडी एवं क्यूआर कोड के जारी होने के पश्चात ऑटो चालकों एवं यात्रियों में ऑटो चालकों की विस्तृत जानकारी क्यू आर कोड के माध्यम से प्राप्त होने पर विशेष विश्वास पारक एवं सुरक्षात्मक भावना का विकास और बलवती होगी। जिससे महिलाओं बच्चों, बुजुर्गों एवं अन्य जिले एवं राज्य से आने वाले यात्रियों को सुरक्षात्मक भावनाओं का विशेष एहसास हो सकेगा।
इस दौरान नगर निगम आयुक्त श्री प्रकाश सर्वे ने ऑटो चालकों को जारी क्यू आर कोड की तरह ही जिले के समस्त शहर एवं कस्बों में स्थित ढेला, गुमचा एवं दुकानदारों के लिए भी वेंडर पॉलिसी के तहत क्यू आर कोड जारी करने के बारे में ऑटो चालकों को विस्तार पूर्वक समझाइश दिए ताकि सड़कों पर यातायात दबाव एवं आवागमन बाधित होने की स्थिति निर्मित ना हो।
कार्यक्रम के रूपरेखा एवं उद्देश्य के बारे में व्यापक स्तर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामगोपाल करियारे के द्वारा स्वागत उद्बोधन के दौरान विस्तार से बताई गई। इस अभिनव पहल का उद्देश्य ई-रिक्शा चालकों एवं वाहनों की जानकारी को डिजिटल रूप से सुरक्षित एवं व्यवस्थित करना तथा आम नागरिकों को यात्रा के दौरान एक विश्वसनीय एवं सत्यापित पहचान व्यवस्था उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था के अंतर्गत पंजीकृत प्रत्येक ई-रिक्शा को एक विशिष्ट डिजिटल आईडी एवं क्यूआर कोड प्रदान किया जाएगा। ई-रिक्शा में लगाए गए क्यूआर कोड को यात्री अपने मोबाइल फोन से स्कैन कर संबंधित ई-रिक्शा एवं चालक की उपलब्ध जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे यात्रियों को वाहन में बैठने से पूर्व आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी तथा किसी आवश्यकता अथवा आपात स्थिति में संबंधित जानकारी को साझा करना भी आसान होगा।
डिजिटल पंजीकरण के दौरान ई-रिक्शा चालक की पहचान संबंधी जानकारी, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन संबंधी विवरण, फोटो एवं अन्य आवश्यक जानकारियों को डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित किया जाएगा। इससे ई-रिक्शा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासन एवं पुलिस के लिए आवश्यकतानुसार सत्यापन एवं निगरानी को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं आम यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करना है। क्यूआर आधारित डिजिटल पहचान व्यवस्था के माध्यम से यात्री संबंधित ई-रिक्शा की जानकारी आसानी से देख एवं आवश्यकता पड़ने पर अपने परिजनों अथवा संबंधित व्यक्ति के साथ साझा कर सकेंगे।
यह व्यवस्था विशेष रूप से ऐसे समय में उपयोगी साबित हो सकती है, जब किसी यात्री को वाहन, चालक अथवा यात्रा से संबंधित जानकारी तत्काल उपलब्ध कराना आवश्यक हो।
डिजिटल रिकॉर्ड से मजबूत होगी।ई-रिक्शा का डिजिटल पंजीकरण एक व्यवस्थित डेटाबेस तैयार करने में सहायक होगा। इससे भविष्य में ई-रिक्शा चालकों एवं वाहनों के सत्यापन, पहचान तथा आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही को अधिक सरल एवं प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह पहल डिजिटल तकनीक, सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिक सुविधा के बीच एक प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करेगी।
इस सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित एवं आधुनिक तकनीक का सही उपयोग कर नागरिकों को बेहतर सुरक्षा एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं ई-रिक्शा डिजिटल पंजीकरण एवं क्यूआर आधारित पहचान व्यवस्था आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में विकसित हो सकती है, जिसे आवश्यकता एवं अनुभव के आधार पर अन्य शहरों एवं क्षेत्रों में भी विस्तारित किया जा सकेगा।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ई-रिक्शा एवं चालकों का डिजिटल पंजीकरण,
प्रत्येक ई-रिक्शा को विशिष्ट डिजिटल आईडी एवं क्यूआर कोड प्रदान करना, यात्रियों को वाहन एवं चालक की जानकारी उपलब्ध कराना, महिला एवं आम नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत करना, आपात स्थिति में जानकारी साझा करने की सुविधा, ई-रिक्शा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाना, पुलिस एवं प्रशासन के लिए डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराना, यह पहल सुरक्षित सफर, डिजिटल पहचान और नागरिक सुरक्षा की दिशा में छत्तीसगढ़ की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है। यह सॉफ्टवेर जनहित एवं महिला एवं नागरिक सुरक्षा को समर्पित उल्लेखनीय सामाजिक पहल है जिसे बिलासपुर पुलिस द्वारा नियमित रूप से संचालित किया जाएगा।
उक्त गरिमामयी कार्यक्रम में एएसपी शहर पंकज पटेल, एएसपी ग्रामीण मधुलिका सिंह, सीएसपी परमेश्वर तिलकवार, तिलेश्वर यादव, सुदीप सरकार, एसडीओपी नूपुर उपाध्याय, डीएसपी शिव चरण परिहार, आर आई भूपेंद्र गुप्ता, समस्त थानों के थाना प्रभारीगण, शहर के गणमान्य नागरिकगण एवं 5000 से अधिक संख्या में जिले के समस्त क्षेत्र से ऑटो चालक पुलिस परेड ग्राउंड एवं चेतना भवन सभागार में विशाल संख्या में उपस्थित थे।
