
बिलासपुर में 36 मॉल सिनेमा में फिल्म का प्रदर्शन, हॉरर, सस्पेंस, कॉमेडी और भगवान झूलेलाल की आस्था का दिखा अनूठा संगम
बिलासपुर। सिंधी बोली, भाषा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से सिंधी फिल्मों को प्रोत्साहित करने में जुटे फिल्म वितरक राजकुमार मनसुखानी के प्रयासों से सिंधी समाज की हॉरर फिल्म ‘खबर ना आहे’ का प्रदर्शन बिलासपुर में शुरू हुआ। शहर के 36 मॉल सिनेमा में 24 और 25 अक्टूबर को फिल्म के शो रखे गए हैं। 24 अक्टूबर की रात 9:30 बजे आयोजित फिल्म का पहला शो हाउसफुल रहा। फिल्म देखकर बाहर निकले दर्शकों ने इसकी कहानी, हॉरर दृश्यों और संदेश की सराहना की।
फिल्म के ओपनिंग शो की शुरुआत भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना, दीप प्रज्वलन और आरती के साथ की गई। इस अवसर पर समाज के प्रमुखजनों एवं पंचायत पदाधिकारियों का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष विनोद मेघानी, वरिष्ठ समाजसेवी कैलाश मलघानी, वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार कलवानी, डॉ. हेमंत कलवानी, अशोक जग्यासी, सिंधी युवक समिति के अध्यक्ष मनीष लाहोरानी सहित मोहन जैसवानी, रमेश टेकचंदानी, प्रकाश चाचा, अनिल पंजवानी, दिलीप मोटवानी, संतोष छत्री, कैलाश शयामनानी, जगदीश जग्यासी, अशोक हिंदूजा, गोविंद दुसेजा सहित समाज के अनेक वरिष्ठजन, महिलाएं एवं युवा उपस्थित रहे।
हॉरर, सस्पेंस और कॉमेडी से भरपूर है कहानी
फिल्म की कहानी में हॉरर, रोमांच, सस्पेंस, कॉमेडी और भावनात्मक प्रसंगों का मिश्रण देखने को मिलता है। फिल्म की शुरुआत में हिंदी फिल्मों की अभिनेत्री सिमरन को प्रमुखता से दिखाया गया है। कहानी आगे बढ़ते हुए मुंबई और कॉलेज के माहौल तक पहुंचती है, जहां दोस्तों की पिकनिक के दौरान घटनाएं एक नया मोड़ लेती हैं।
पिकनिक से लौटते समय बस खराब हो जाने पर कुछ युवक-युवतियां पास के जंगल में घूमने निकल जाते हैं। वहां श्मशान घाट में जलती चिता देखकर मजाक में भूत को अपने घर आने की चुनौती दी जाती है। इसके बाद कहानी में डरावनी घटनाओं का सिलसिला शुरू हो जाता है। एक आत्मा युवती के शरीर में प्रवेश कर जाती है। परिवार पहले इसे बीमारी समझता है, लेकिन बाद में स्थिति की गंभीरता सामने आती है।
कहानी में तंत्र-मंत्र और उपचार के प्रयासों के बीच भगवान झूलेलाल के प्रति आस्था को प्रमुखता दी गई है। फिल्म का अंत आत्मा की मुक्ति और परिवार में खुशहाली लौटने के साथ होता है। कहानी के माध्यम से अच्छे कर्म करने, गलत कार्यों से बचने और अपने आराध्य के प्रति विश्वास बनाए रखने का संदेश दिया गया है। साथ ही यह भी दर्शाया गया है कि गलत कर्मों का परिणाम किसी न किसी रूप में सामने आ सकता है।
दर्शकों ने की सराहना, नई सिंधी फिल्मों की जताई उम्मीद
फिल्म समाप्त होने के बाद ‘हमर संगवारी’ के संपादक विजय दुसेजा ने दर्शकों से बातचीत की और फिल्म के अनुभव जाने। दर्शकों ने कहा कि उन्होंने पहली बार सिंधी भाषा में हॉरर फिल्म देखी है और उन्हें इसका अनुभव अच्छा लगा। बच्चों और युवाओं ने भी फिल्म का आनंद लिया। दर्शकों ने ऐसी और सिंधी फिल्में बनाने की आवश्यकता जताई, ताकि समाज की बोली, भाषा और संस्कृति को मनोरंजन के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सके।
फिल्म वितरक राजकुमार मनसुखानी कई वर्षों से फिल्म जगत से जुड़े हुए हैं। हिंदी फिल्मों के वितरण से जुड़े रहने के बाद उन्होंने अपनी मातृभाषा और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सिंधी फिल्मों के प्रदर्शन की दिशा में काम शुरू किया। उनका प्रयास है कि सिंधी फिल्मों को बिलासपुर सहित छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों तक पहुंचाया जाए, ताकि नई पीढ़ी अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहे।
‘खबर ना आहे’ के पहले शो को मिली दर्शकों की प्रतिक्रिया से सिंधी फिल्म जगत से जुड़े लोगों में उत्साह देखा गया। फिल्म ने मनोरंजन के साथ आस्था, पारिवारिक मूल्यों और अच्छे कर्मों का संदेश देने का प्रयास किया है।
