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भारत छोड़ो’ नोटिस के खिलाफ याचिका पर सुनवाई, भविष्य में किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होने का दिया आश्वासन; OCI कार्ड और विदेशी नागरिकों के अधिकारों पर भी उठे सवालअनिल शुक्ला की रिपोर्टमुंबई। बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान से जुड़ा ‘लीव इंडिया नोटिस’ यानी भारत छोड़ने के आदेश का मामला अब एक बड़े कानूनी और संवैधानिक विमर्श का विषय बन गया है। मुंबई में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के बाद विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) की ओर से अभिनेता को भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस को चुनौती देते हुए इमरान खान ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद अभिनेता की ओर से बिना शर्त माफी मांगने और भविष्य में किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होने का आश्वासन दिया गया।मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने अभिनेता की नागरिकता और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड की स्थिति का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जब वह भारतीय नागरिक नहीं हैं और SIR प्रक्रिया से सीधे प्रभावित भी नहीं होते, तब उन्हें इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की आवश्यकता क्यों पड़ी? अदालत ने स्पष्ट किया कि OCI कार्डधारक होने के नाते उन्हें भारतीय नागरिकों के समान सभी राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं।10 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद जारी हुआ था नोटिसमामले की शुरुआत 10 अक्टूबर 2026 को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन से हुई। यह प्रदर्शन SIR प्रक्रिया को लेकर किया गया था। अभिनेता इमरान खान भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी। बाद में विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय ने 14 अक्टूबर को उन्हें ‘लीव इंडिया नोटिस’ जारी कर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया।अभिनेता ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनकी ओर से दलील दी गई कि वह अमेरिका में जन्मे जरूर हैं और अमेरिकी पासपोर्ट रखते हैं, लेकिन उनका पूरा जीवन भारत में बीता है। बचपन से भारत में रहने, शिक्षा, विवाह और बॉलीवुड में काम करने का हवाला देते हुए नोटिस को अनुचित बताया गया।अदालत में माफी और भविष्य में प्रदर्शन से दूरी का भरोसासुनवाई के दौरान अभिनेता के वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने कहा कि इमरान खान का प्रदर्शन आयोजित करने वाले किसी संगठन से कोई संबंध नहीं है। उनकी ओर से यह भी कहा गया कि अभिनेता भविष्य में किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे और इस संबंध में अदालत को लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार हैं।अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बिना शर्त माफी और भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों से दूर रहने का लिखित आश्वासन देने की बात कही। इसी संदर्भ में अभिनेता की ओर से यह भरोसा दिया गया कि आगे वह किसी भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे। इसी घटनाक्रम के बीच उनका कथित बयान चर्चा में आया कि जिंदगी में कभी किसी प्रोटेस्ट में नहीं जाएंगे।नोटिस पर अंतरिम रोक, लेकिन कानूनी विवाद अभी बाकीबॉम्बे हाईकोर्ट ने इससे पहले इमरान खान को अंतरिम राहत देते हुए भारत छोड़ने के नोटिस पर रोक लगाई थी। 2 नवंबर की सुनवाई के बाद भी इस रोक को आगे बढ़ाने की जानकारी सामने आई है। मामले में अगली सुनवाई 7 दिसंबर को निर्धारित बताई गई है।हालांकि, इस अंतरिम राहत को नोटिस पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अदालत में अभिनेता की नागरिकता, OCI कार्डधारक के रूप में उनके अधिकारों और विरोध प्रदर्शन में उनकी भागीदारी से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे विचार होना बाकी है।यह मामला केवल एक फिल्म अभिनेता के भारत छोड़ने के नोटिस तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी नागरिकों और OCI कार्डधारकों के भारत में राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने की सीमाओं, उनके अधिकारों और कानूनी जिम्मेदारियों को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।
