
पूछा—अफसर छुट्टी पर, तो ये किसके आदेश पर पहुंचे?प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का सबसे अनोखा मॉडल देखने को मिला, जहां संडे की सुबह नगर निगम की कार्यशैली देखकर खुद कचौड़ी और सब्जी भी खौल उठींसड़क किनारे ठेला लगाकर रोजी-रोटी कमाने वाले छोटे व्यापारी रविवार के दिन दो पैसे कमाने की आस में कड़ाही चढ़ाए बैठे थे। ग्राहक आते, उससे पहले ही नगर निगम की ‘परम कर्तव्यनिष्ठ’ टीम टाइमिंग देखकर धमक पड़ी। रोज-रोज की फरमाइशों और मानसिक प्रताड़ना से आजिज एक दुकानदार के सब्र का बांध ऐसा टूटा कि उसने आव देखा न ताव—गर्म कचौड़ी, सब्जी और सारा सामान सड़क पर बिखेर दिया। चीखते हुए बोला, “लो, सब ले जाओ, आज सब खत्म कर देंगे!” ठेला भी खींचकर किनारे कर दिया कि न रहेगा बांस, न बजेगी ‘निगम’ की बांसुरी।बाकी दुकानदारों का भी पारा चढ़ गया कि हफ्ते में एक दिन जब कमाई का मौका होता है, तब ये कर्मचारी ‘सेवा शुल्क’ मांगने पहुंच जाते हैं। परेशान हाल व्यापारी शिकायत दर्ज कराने जब नगर निगम के दफ्तर पहुंचे, तो वहां बड़ा सा ताला झूल रहा था, क्योंकि ‘रविवार’ था और बड़े साहबान छुट्टी मना रहे थे।अब व्यापारियों का माथा ठनका और उन्होंने सीधा सवाल दागा—”जब रविवार को पूरा महकमा छुट्टी पर है, कोई अधिकारी मौजूद नहीं, तो ये कर्मचारी सड़क पर किसके कहने से वसूली का ओवर-टाइम कर रहे थे?” साहब घर में आराम फरमा रहे हैं और जमीन पर ‘संडे स्पेशल’ का खेल खुलेआम चल रहा है।
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