
बिलासपुर। बिजली विभाग की कथित लापरवाही के चलते एक युवा ऑपरेटर की करंट की चपेट में आने से मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक के परिजनों एवं ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक बिलासपुर से लिखित शिकायत कर अपराध दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।, साथ में कलेक्टर को भी ज्ञापन सोपने के लिए कलेक्टर ऑफिस के बाहर बड़ी संख्या में गांव वाले इकट्ठा पहुंचे, शिकायत के अनुसार, ग्राम कुरेली सब स्टेशन में पदस्थ ऑपरेटर अमन साहू की 31 अक्टूबर 2026 को ड्यूटी के दौरान करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। बताया गया है कि मृतक अपने पीछे पत्नी भारती साहू और दो बच्चों को छोड़ गया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि घटना के बाद संबंधित विभागीय अधिकारी, कर्मचारी एवं ठेकेदार दूसरे दिन दोपहर करीब एक बजे घटनास्थल पर पहुंचे। परिजनों और ग्रामीणों ने देरी का कारण पूछा तो अधिकारियों का व्यवहार कथित रूप से असंवेदनशील रहा। शिकायत में अधीक्षण अभियंता मिलिंद पाण्डेय पर ग्रामीणों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने और विवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया गया है।परिजनों से अभद्रता और विवाद बढ़ाने का आरोपशिकायत के मुताबिक, जब परिजनों ने सुरक्षा उपकरणों के बिना ऑपरेटर से काम कराए जाने पर सवाल उठाए तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार पर नाराजगी दिखाने तथा अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया। इससे घटनास्थल पर ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। आरोप है कि मृतक के शव को घटनास्थल से ले जाने को लेकर भी विवाद हुआ।इस दौरान मृतक के छोटे भाई नवीन साहू की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गए। उन्हें तत्काल न्यू वंदना हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने कार्डियक अरेस्ट आने की पुष्टि कर उपचार किया, ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता मिलिंद पाण्डेय, एई लव माथुर, कनिष्ठ यंत्री दीपित जायसवाल, तकनीकी सहायक चेतनानंद दुबे एवं ठेकेदार प्रशांत चतुर्वेदी के खिलाफ अपराध दर्ज करने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि विभागीय स्तर पर भी ऑपरेटर की मौत के पीछे लापरवाही की बात लिखित रूप में स्वीकार की गई है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए होते और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो शायद अमन साहू की जान बचाई जा सकती थी।अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस अधीक्षक इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं और जांच में बिजली विभाग की जिम्मेदारी किस हद तक तय होती है। साथ ही पीड़ित परिवार को न्याय और आर्थिक सहायता कब तक मिल पाती है।
