
** बिलासपुर शहर की जीवन दायिनी मां अरपा के आंचल में पढ़ा बढ़ा युवा जो कि असमय पिता का साया उठ जाने के कारण दिमागी तौर पर अस्त व्यस्त सा हो गया था घर में हर हमेशा अस्वस्थ रहने वाली बहन और बुजुर्ग माता भी भरण पोषण के लिए संघर्ष करती रहती थी और विगत कुछ समय से सेवा एक नई पहल की संयोजिका रेखा आहुजा के प्रयासों से संस्था और समाज द्वारा इस परिवार को यथा संभव सहयोग दिया जा रहा है ~ इसी मानसिक रुप से अस्वस्थ बालक की कई दिन से निरन्तर काउंसिलिंग कर रेखा आहुजा जी ने कोरबा स्थित अपना घर आश्रम में आश्रय को राजी किया संस्था के संयोजक सतराम जेठमलानी ने बताया कि शहर की समाज सेविका रेखा आहुजा जी जो कि कोरबा जिले स्थित अपना घर आश्रम प्रकल्प की अध्यक्षा भी है इनके द्वारा पूर्व में भी कई निराश्रित या बेघर प्रभुजन जिनमे महिला पुरुष दोनों समन्वित है उनकी काउंसिलिंग कर उनकी सहमति से प्रदेश में स्थित भिन्न भिन्न आश्रम में आश्रय दिलवाने का अनवरत प्रयास किया जाता रहा है इन आश्रम में इन निराश्रित प्रभुजनो की दिनचर्या सुव्यवस्थित हो जाती है और शहर के संवेदन शील निवासियों के सहयोग हर तीज त्यौहार सामूहिक रुप से मनाकर इन्हे जीवन संबल प्रदाय किया जाता है अलग अलग अवधि में इनकी स्वास्थ्य चिकित्सा सुनिश्चित कर आवश्यक दवाइयों के साथ साथ दैनिक जरूरतों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है ।