विजय की कलम
विगत दिनों मैंने पहले ही उल्लेख किया था की पत्रकारिता का कठीन दौर चल रहा है
देश और समाज आज भी पैसो वालो के जकड़ में है कहने को तो हम आजाद हैं और पत्रकारीता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है पर कुछ लोग ऐसे हैं आज भी अंग्रेजों की तरह संविधान से ऊपर व्यवहार करते हैं और देश समाज को अपना गुलाम समझते हैं निन्म और मध्यम वर्ग को अपने इशारे पर नाचने के लिए, मजबूर करते हैं जब तक ये वर्ग समाज के मठाधीश की गुलामी न करे तब तक इस वर्ग को तवज्जो नहीं दिया जाता ,
एक व्यक्ति है सिंधी समाज में जो एक चेहरे पर कई चेहरा लगा के घूमता है धीरे-धीरे असली चेहरा लोगों के सामने आ रहा है वह पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत का पूर्व अध्यक्ष भी है वह अन्य कई, संस्थानों में ऊंचे पदों पर आसीन है
दिखावे का व्यवहार कुशल ,पैसो की चमक दमक एक न एक दिन असलियत सामने आ ही जाती है विगत दिनों 8 मई से 14 मई तक श्री झूलेलाल मंगल धाम तिफरा में श्रीमद् भागवत कथा पुराण का आयोजन किया गया था यह आयोजन नारायण सेवा संस्थान द्वारा किया गया जिसका श्रेय पूर्व अध्यक्ष लेने में लगे हुए थे
आए दिन पत्रीका, अखबारों में खबर न्यूज़ आती थी की कथा चल रही है और सोशल मीडिया में भी पोस्टर , वायरल हो रही थी जिसमे अपील किया गया था कि कथा में जरुर आए
भवन के पदाधिकारी आयोजकों द्वारा बार बार
निमंत्रण कर रहे थे कि मैं परिवार सहित जरूर आवश्यकरूप से उपस्थित होकर न्यूज़ भी कवर करू जो न्यूज़ भेज रहे थे वह बाकायदा अपने अखबार में एवं पोर्टल में लगा भी रहा था एक पत्रकार का जो कर्तव्य है उसका पालन धर्म ईमानदारी से कर रहा था समापन के दिन मैं अपने साथी पत्रकार के साथ न्यूज़ कवर करने पहुंचा टाइम सायं 7 बजे के आसपास समय था कार्यक्रम के फोटो लेने पश्चात
मेरे साथी पत्रकार अंत में बनारस से आए जजमान का हमने इंटरव्यू भी लिया तत्पश्चात , प्रकाश गवलानी द्वारा समाज के गणमान्य लोगो के बिच मेरा कंधा पकड़कर बाहर निकल जाओ बोलकर धक्का लगाता है और पूरा समाज मूकदर्शक बने देख रहे थे किन्तु किसी ने भी इस पर खेद व्यक्त नहीं की इसे कहते है पैसो वाले की गुलामी
समाज, की पंचायत, का गठन कमजोरो को बल देने के लिए बनाई जाती है अन्याय के खिलाफ डटकर मुकाबला करना चाहिए भागवत कथा में भी अन्याय के खिलाफ युद्धघोष के कई अध्याय का वर्णन है किंतु गुलामी के कारण,
श्रीमद भागवत के वचनो का भी असर नहीं पड़ रहा है जो कि बड़ी दुखद बात है
सिंधी समाज बिलासपुर को दान में मिली दो एकड़ भूमि नया भवन बनाने के लिए उस समय भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी और साथ में 10 लाख निर्माण के लिए फण्ड शासन द्वारा प्राप्त हुवा बाकी की रकम समाज के लोगो से चंदा किया गया 11 हजार से लेकर चार-पांच लाख रुपये तक का चंदा ,दिया , गया दानदाताओं के द्वारा,
समाज के दान के पैसों से बना यह भवन,झूलेलाल मंगल धाम जिसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति का बराबर भागीदारी है निन्म वर्ग से लेकर उच्च वर्ग के साथ सबका एक समान हक और अधिकार है पर यहां पर मठाधीश लोग भवन में कब्ज़ा जमाए बैठे है जो समाज के निम्न मध्यम वर्ग दबाए जा रहे है और समाज के पदाधिकारी वरिष्ठ जन मूक दर्शक बने समाज का तमाशा देख रहे है भवन को बिजनेस साँस्थान के रूप में उपयोग किया जा रहा है समाज के लोगो को ग्राहक समझ कर व्यवहार किया जा रहा है जीसका विरोध होना चाहिए
और जो घटना हाल ही मे घटी है आगे से पत्रकारों के साथ या समाज के किसी भी 🚶व्यक्ति के साथ ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए इसके लिए समाज के प्रत्येक 👤व्यक्ति को अभी से ही जन ,जागृति लाकर इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए
भवदीय
विजय दुसेजा
