बिलासपुर:- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय रघुविहार में माउंट आबू राजस्थान से आदरणीय राज योगी श्रीकांत भाई जी के शुभ आगमन पर दो दिवसीय शिविर का कार्यक्रम आयोजित किया गया उक्त शिविर के कार्यक्रम में आदरणीय श्रीकांत भाई जी ने स्वयं के जीवन को खुशहाल बनाने तथा भगवान को राजी करने की विधि बताते हुए कहां की यदि हम सचमुच में स्वयं के जीवन को खुशहाल बनाना चाहते हैं तब भगवान के महा वाक्यों को हमें बहुत ध्यानपूर्वक सुनकर उसे अपने जीवन में लाना होगा तब हमारा जीवन सचमुच में बहुत ही खुशनुमा बन जाएगा हम सदा हर्षित रहेंगे हमारे जीवन में कभी भी कोई भी विघ्न नहीं आएगा हम हर कर्म करते परमात्मा के साथ का उनके सहयोग का अनुभव कर सकते हैं हम प्रतिदिन भोजन करते हैं परंतु भोजन करने से पूर्व यदि हम वह भोजन सर्वप्रथम भगवान को स्वीकार कराते हैं अथवा भोग लगाते हैं तो वह भोजन बहुत ही शुद्ध और पवित्र बन जाता है और विश्व की हर एक आत्माओं तक उस क्षण के लिए वह भोजन पहुंच जाता है भगवान को केवल हमारी भावनाएं चाहिए है यदि हम सच्चे दिल से कुछ भी भगवान के लिए करते हैं तो उसके बदले में हमको कई गुना भगवान से प्राप्त होता है इसके साथ-साथ आदरणीय राजयोगी श्रीकांत भाई जी ने बताया कि हमारे तीन महाशत्रु है आलस्य अलबेलापन और गफलत यह तीनों चीज हमें आगे बढ़ने नहीं देती और हमसे गलत कार्य कराते हैं आलस्य अलबेलापन के कारण हम कई बार सारा दिन सो कर भी व्यतीत कर देते हैं दिन भर कुछ कार्य ही नहीं करते जिससे हमारा ही नुकसान होता है तथा यदि कोई श्रेष्ठ महावाक्य चल रहा हो और उस समय हमारे मन में व्यर्थ चिंतन चल रहा हो तब वह महावाक्य हमारे मनो मस्तिष्क में नहीं जाएगी और इससे हम अपने आप को ही नुकसान पहुंचाते हैं हम जितना ज्यादा अपने मन में व्यर्थ चिंतन करते हैं उतना ज्यादा हमारा मन भारी होता जाता है और यही कारण है की मन हमारा उदास हो जाता है निराश हो जाता है और यही मानसिक बीमारी का मुख्य कारण है और इस मानसिक तनाव से बचने के लिए एक मात्र उपाय है राजयोग। राजयोग द्वारा हमारी बुद्धि का कनेक्शन परमात्मा से जुड़ता है और हमारा मन बिल्कुल शांत हो जाता है।
