सतना:- संत निरंकारी मंडल ब्रांच सतना से 77 वें निरंकारी संत समागम में सतना ब्रांच संयोजक महात्मा डॉक्टर जे. पी. सेवानी जी के साथ सतना जिले से सैकड़ों संत महात्मा भाई, बहनों एवम सेवादल श्रद्धालुओं भक्त पूरे परिवार सहित समागम में सम्मिलित हुए।
संसार में हम जितनी भी चीजे देखते अथवा अनुभव करते हैं वह सारी परिवर्तनशील है इनमें से किसी भी पदार्थ को शाश्वत सच्चाई नहीं कहा जा सकता। जिस प्रकार दिन ढलता है तब रात होती है और रात के ढलने के उपरांत फिर से दिन की शुरुआत हो जाती है। ठीक उसी प्रकार किसी भी वस्तु अथवा पदार्थ के अस्तित्व को शाश्वत मान लेना हमारा भ्रम है क्योंकि वास्तविक सत्यता को केवल इस निरंकार परमात्मा में है जिसे विभिन्न नाम से पुकारा जाता है। इस निरंतर एकरस रहने वाली सच्चाई को अपनाने से निसंदेह हम सभी प्रकार के भ्रमों से मुक्ति पा सकते हैं। समालखा में आयोजित तीन दिवसीय संत समागम के पावन अवसर पर रात्रि को सतगुरु माता जी ने लाखों की संख्या में सम्मिलित हुए श्रद्धालुओं को इन अमृतमई प्रवचनों से अनुग्रहित किया।
*कायरौप्रैक्टिक शिविर और स्वास्थ्य सेवाएं*
77वें निरंकारी संत समागम में आधुनिक करो प्रतीक तकलीफ के जरिए निशुल्क स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जा रहा है प्रतिदिन 3000 से 4000 लोग इस तकलीफ कलम उठा रहे हैं अमेरिका यूनाइटेड किंगडम कनाडा स्पेन फ्रांस और भारत के 25 डॉक्टरों की एक टीम निरन्तर सेवाएं कर रही है। समागम स्थल पर पहली बार 100 बिस्तर वाला अस्पताल बनाया गया है, जिसमें आईसीयू और चार वेंटिलेटर की सुविधाएं हैं। 40 एंबुलेंस उपलब्ध हैं, जिसमें से 30 स्वास्थ्य विभाग द्वारा और 10 मिशन द्वारा प्रदान की गई है। सभी मैदाने में पांच डिस्पेंसरियां भी कार्यरत है।यहां प्रतिदिन 20 हजार मरीजों का निशुल्क उपचार किया जा रहा है।
इसके पूर्व निरंकारी राज पिता रमित जी ने अपने विचारों में कहा कि 77 वें समागम में भाग लेना संतों और श्रद्धालुओं के लिए अनोखा अवसर है। यह समागम जीवन को गहराई और विस्तार प्रदान करता है ।सद्गुरु की कृपा और शिक्षाओं ने मानव अस्तित्व को असीम और गौरवशाली बना दिया है। सच्चा स्वार्थ अपने अस्तित्व को पहचानने में है। सद्गुरु सीखाते हैं कि जीवन का अर्थ समझने के लिए हमें अपने स्वार्थ से परे जाकर मानवता की सेवा करनी है।
*सादा शादीयां एवं आध्यात्म का अनुपम दृश्य*
सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आरंभ पारंपरिक जयमाला एवं निरंकारी शादी के विशेष चिन्ह सांझा हार द्वारा हुआ। उसके उपरांत भक्तिमय संगीत के साथ मुख्य आकर्षण के रूप में निरंकारी लावों का हिंदी भाषा में प्रथम बार गायन हुआ जिसकी प्रत्येक पंक्ति में नव विवाहित युगलो के सुखमयी गृहस्थ जीवन हेतु अनेक कल्याणकारी शिक्षाये प्रदान की। नव विवाहित युगलो पर सतगुरु माता जी, निरंकार राज पिता जी एवं वहां उपस्थित सभी जनों द्वारा पुष्प वर्षा की गई और उनके कल्याणकारी जीवन हेतु भरपूर आशीर्वाद प्रदान किया गया। 96 नव युगल सतगुरु माता जी एवं आदरणीय निरंकारी राजपिता जी के पावन हुजूरी में परिणयसूत्र में बंधे अपने मंगलमय जीवन की कामना हेतु पवन आशीर्वाद प्राप्त किया।
अंत में सतगुरु माता जी ने सभी नव विवाहित जोड़ों के जीवन हेतु शुभकामना करते हुए उन्हें आनंद में जीवन का आशीर्वाद दिया।
