विजय की कलम
(संपादकीय)
हाल ही में संसद में और संसद के बाहर जो हंगामा मचा उसके जो कारण था एक बिल,
( एक देश एक चुनाव)
का विपक्ष विरोध कर रहा है और सत्ता पक्ष समर्थन कर रहा है दोनों अपने-अपने पक्ष में कई सारी बातें रख रहे हैं पर हकीकत क्या है?
कहते हैं इस बिल को लाने के लिए वह इसकी चर्चा 20 साल से चल रही थी पर अभी तक इस पर कोई सफल नहीं हो पाया और वैसे भी इस बिल को संयुक्त पार्लियामेंट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव कानून मंत्री ने दिया है वैसे भी इस बिल पर अभी बहुत चर्चा होगी संसद में भी और संसद के बाहर भी जैसा कि अमित शाह ने कहा कि पार्लियामेंट कमेटी में विचार विमर्श होगा चर्चा होगी उसके बाद कैबिनेट में जब यह बिल आएगा तब भी चर्चा होगी और जब संसद में पेश किया जाएगा तब भी चर्चा होगी वह जल्दबाजी नहीं है पर विपक्ष इतना हंगामा क्यों मचा रहा है किस बात का उसे डर है और आज अगर यह बिल पास भी होता है तो कहते हैं 2034 में जाकर यह कानून लागू होगा मतलब 29 के चुनाव में भी एक देश एक चुनाव नहीं होगा 2034 में यानी की 10 साल बाद जो बिल 10 साल बाद कानून बनने वाला है उस पर अभी से ही इतना हंगामा क्यों?
क्या विपक्ष को डर है कि अगर एक देश एक चुनाव लागू हो गया तो विधानसभा ओर लैक सभा चुनाव अगर एक साथ होंगे तो इसका फायदा भाजपा को होगा उन्हें घाटा होगा क्योंकि वह देख चुके हैं जब लोकसभा चुनाव आता है तो लोग 👫👬👭देश हित ओर मोदी को देखकर वोट करते हैं इसलिए उन्हें अभी से घबराहट हो रही है अगर ऐसा हुआ तो कई विधानसभाओं में उनको बहुमत नहीं मिलेगा और कई प्रदेशों में उनकी सरकार नहीं बनेगी यह डर उन्हें सता रहा है और खाए जा रहा है इसीलिए 10 साल बाद जो कानून लागू होगा उस पर अभी से ही विरोध करना शुरू कर दिया है सही मायनों में देखा जाए तो इसमें देश का ही फायदा है अगर एक साथ लोकसभा और विधानसभा के चुनाव होंगे तो इसमें जो सरकारी खर्च होता है वह पैसा जनता की गाड़ी कमाई का होता है जो टैक्स के रूप में भरते हैं वह कम खर्चे में ही दोनों चुनाव निष्पक्ष हो जाएंगे दूसरा जो सरकारी मशीनरी लगी रहती है अधिकारी लगे रहते हैं वह सब एक साथ दोनों चुनाव में निपट जाएंगे बार-बार उनको आचार संहिता लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी जनता को परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ेगी और देश का काम भी नहीं रुकेगा जनता का भी नहीं रुकेगा और जनता भी सोच समझकर 5 साल के लिए केंद्र में और राज्य में दोनों जगह सरकार बनाने के लिए सोच समझकर अपने वोट का इस्तेमाल करेगी और आजादी के बाद 1952 से लेकर तीन चुनाव एक साथ हुए थे उसके बाद फिर अलग-अलग होने लगे जब पहले ऐसा हो सकता था तो अभी क्यों नहीं हो सकता है?
अब कांग्रेस इसका विरोध क्यों कर रही हो? क्योंकि उस समय कांग्रेस का ही एक छत्र राज कर रही थी देश में इसलिए वह खुश 😄😃😁 थी ओर आज उसकी हालत खराब है अगर आप ईमानदार हो और जनता के हित के लिए कार्य कर रहे हो तो आपको डरना नहीं चाहिए अपने कार्यों पर भरोसा रखना चाहिए इससे जनता को भी फायदा होगा व देश को भी फायदा होगा फिर नेता बार-बार सत्ता परिवर्तन व झूठे वादे जलेबी वाले वादे नहीं कर पाएंगे वह अपने काम के दम पर सत्ता पर वापस आएंगे एक देश एक चुनाव जनहित में है अब देखना यह है कि आगे क्या होता है और कब यह कानून संसद में पेश होकर पास होता है और लागू होता है
भवदीय
विजय दुसेजा
