विजय की कलम

नगरीय निकाय चुनाव में जिस तरह कांग्रेस का सुपड़ा साफ हुआ है जैसे गर्मी के मौसम में अरपा नदी सूख जाती है वैसे ही इस बार नगरी निकाय चुनाव में कांग्रेस की हालत हो गई है छुपाय नहीं छुपता ,और दर्द दिखाते दिखाते थक गए ऐसे भी दिन आएंगे कभी किसी ने सोचा नहीं था पर इतिहास है घूम फिर कर वापस आ गया कल भाजपा की बारी थी आज कांग्रेस की बारी है पर इतनी भी खराब स्थिति होगी यह कभी किसी ने सोचा भी ना था पूरे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की लुटिया डूब गई इस पर गंभीर मंथन करने की बजाए एक दूसरे को निपटाने में लगे हैं पुराना झगड़ा अब सामने आने लगा हैं किसको बचाया जाए किसको निकला जाए समझ में आ नहीं आ रहा है और बड़े नेताओं के सामने में ही एक दूसरे पर ,वार पर वार कर रहे हैं

( कोई कहता है मैं अटल हूं, तो सामने वाला कहता है मैं भी विजय हूं )
पर एक बात तो जरूर है जो हमेशा कहीं जाती है सच्चे कार्यकर्ताओं के जरिए की कांग्रेस को कांग्रेसी ही हराते हैं और किसी में दम नहीं इसलिए हम अपने लोगों के हाथों ही मरते हैं, चुनाव हारने के बाद भी अकल आती नहीं और जनता के सामने में ही लड़ते रहते हैं इसका फायदा भाजपा उठाती है और अपने आप को मजबूत बना लेती है ,

यह नोटिस तो बहाना है असल में अपना गम छुपाना है सामने वाले को ठिकाने लगाना है 4 साल तक आराम,से बैठना है फिर वापस पार्टी में बुला लेना है अभी तक तो यही चलता था आगे भी यही हाल होगा जब कल के गधे घोड़े बनने लगेंगे तो ऐसा ही नजारा होगा कभी तुम्हारा होगा तो कभी हमारा होगा भाजपा को डबल खुशी मिल गई चुनाव जीतने की और हमारी लड़ाई की मीडिया को भी न्यूज़ मिल गई खबर चलाने को, सबको कुछ ना कुछ मिल गया पर हम खाली के खाली रह गए लाख बार समझाया फिर भी नहीं माने और हम वहीं के वहीं रह गए (संपादकीय)
