बिलासपुर //जयराम नगर स्टेट लेबर कमिश्नर एवं सेंट्रल लेबर कमिश्नर के बीच इंद्रमणि कोल साइडिंग हाई टेंशन तार की चपेट में आया श्रमिक की जांच का मामला कार्यवाही क्षेत्र की जानकारी के अभाव में एक हफ्ते से अटका हुआ था कुछ पत्रकारों के हस्तक्षेप करने के बाद सहायक लेबर कमिश्नर हरकत में आए और पीड़ित श्रमिक का हॉस्पिटल जाकर बयान दर्ज किया गया गौरतलब है कि इन्द्रमाणि कोल साइडिंग जयराम नगर रेलवे स्टेशन के समीप हुई घटना मैं एक नाबालिक श्रमिक हाई टेंशन तार की चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गया है जिससे उसकी हालत नाजुक बनी हुई है संचालक द्वारा उसको एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है किंतु स्टेट लेबर कमिश्नर एवं सेंट्रल लेबर कमिश्नर के बीच कार्यवाही को लेकर असमंजस्य की स्थिति बनी हुई थी जिसके कारण से श्रम विभाग का कोई भी करगुजारियो ने सूद नही ली. हमारे संवाददाता ने सिरे से जुड़े लोगो से चर्चा कर विभाग को दिशा दी तब जाकर पीड़ित श्रमिक का ब्यान दर्ज हुवा हैँ और अब लेबर कोर्ट में मामले पर सुनवाई होंगी जिससे घायल श्रमिक को बेहतर इलाज के साथ मुवावजा मिलने कि संभावना तय होते नजर आ रही हैँ किंतु इस रेल्वे कोल सायडिंग में हुई दुर्घटना से श्रम विभाग का पोल खुल गया हैँ कार्यालय जिला सहायक श्रमायुक्त एवं कार्यालय केंद्रीय सहायक श्रमायुक्त एवं श्रम प्रवर्तन अधिकारीयों के बिच कोई तालमेल नही हैँ यहाँ तक कि लेबर इंस्पेक्टर को तक नहीँ मालूम कि उनका क्षेत्रधिकार क्या हैँ एवं कहाँ तक हैँ रेल्वे सायडिंग सेंट्रल या निजी के लिए जो लेबर ठेकेदार श्रमिकों से श्रम करवाते हैँ वे लोग ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा कर अपनी मनमानी ढंग से काम कर रहे हैँ श्रमिकों का शोषण कर रहे हैँ जिस पर विभाग कि नजर ही नही हैँ तो कार्यवाही कैसे करेगी. हम दावे के साथ कह सकते हैँ कि ऐसी किसी घटना पर कार्यवाही एवं श्रमिकों के हित को लेकर दोनों विभाग ने कुछ भी किया होगा.कार्यालय श्रमायुक्त सेंट्रल जो कि दयालबंध में स्थित हैँ जिसमे कार्यालय स्टाफ गप मारते बैठे मिले. उनसे रेल्वे कोल सायडिंग पर श्रमिक हाई टेंशन तार के चपेट में आने वाली दुर्घटना का जिक्र करने के बाद भी किसी प्रकार कि साधारण जानकारी उपलब्ध नहीँ करा पाए यहाँ तक अधिकारियो का संपर्क नंबर मांगने पर कल आजाओ बोलकर अपने निजी बातचीत में व्यस्त हो गए. इससे यह साफ तौर पर नजर आता हैँ कि केंद्रीय श्रम विभाग अपने जिम्मेदारी को लेकर कितना संजीदा हैँ. अधिकारियो के मायूस रवैये का बेजाफायदा श्रमिक ठेकेदार उठा रहे और श्रमिकों का अहित शोषण चरम पर हैं