और चांद भी सिर पर सूरज सा चमकता नजर आता है। खुद पर कभी इतराना नहीं है, जितना झुक कर पेश आएंगे उतने ही श्रेष्ठ कहलाएंगे!
फल के पौधों को देखें तो एहसास होगा कि फलों से लगने पर पेड़ इतराते नहीं है ,,बल्कि झुकते हुए नजर आते हैं,
इसी तरह इंसान को भी मानवता का फर्ज सही माइने में माता-पिता बड़े बुजुर्गों को सम्मान करते हुए,
झूठ फरेब भ्रष्टाचार से दूर रहकर सही मायने में जिंदगी जीने की कला का महत्व को समझना है, और इसी कला से जिंदगी को जीना है जीवन पर्यंत!
धैर्य सब्र शांति से और त्याग ,तपस्या, प्रेम ,सेवा भावना, और सच्चाई ईमानदारी से दृढ़ संकल्प लेकर करने से हर कष्ट दूर होने में सहायता मिलती है ,
सीख ली जिसने इस तरहजीने की कला!!
उसने हमेशा पहले चाहा दूसरों का भला !!
हमारे संवेदनशीलता पात्रता,रिसेप्टिविटी इतनी विकसित हो कि ,जीवन में सुंदर है सत्य है शिव है हमारे हृदय तक पहुंच सके।
अपने आप पर पूर्ण विश्वास हो और अपने विवेक का सम्मान करें अनावश्यक किसी के सामने नहीं झुकी हमेशा स्वस्थ रहें खुश रहें और खुद से प्रेम करना जिंदगी जीने की कला में नया सीखते रहना अन्यथा असफल हो जाएंगे!!
बीते कल व आने वाले कल की चिंता छोड़ आज में जीने की कला को खास तरीके से समझना है जो हम चाहते हैं वह सभी कुछ हमें मिल जाए दिन रात यही सोचते रहना गलत है ? इसको जितना जल्दी समझ सके और मेहनत व किस्मत से मिले जो भी उसने खुश रहने की कला सीख ली तो समझ ले जिंदगी जीने की कला सीख ली!! क्योंकि मनुष्य जन्म पाना ही सबसे महत्वपूर्ण है,संतुलित जीवन बेहतरीन तरीके से दिया जाए जिस तरह गुलाब कांटों के बीच बिना कांटों की चुभन के खिला-खिला रहता है और कांटे उनको छू भी नहीं पाते हैं कांटों के बीच गुलाब बनकर उभरना
गुलाब बनकर उभरना ही जीवन जीने की असली कला है।
स्वरचित -कविता मोटवानी बिलासपुर छत्तीसगढ़