विजय की कलम
सृष्टि की जब रचना हुई थी तो सभी देवी देवताओं ने कुछ ना कुछ दिया था अपना योगदान दिया था और सृष्टि को चलाने के लिए हर देवी देवता ने किसी ना किसी रूप में आकर अपना योगदान दे रहे हैं पर इस सृष्टि में सबसे ज्यादा जो चल रहा है वह है पैसा पहले जमाने में सोने की मुद्रा चलती थी सोने की मोहरे चलती थी जैसे-जैसे युग बदलता गया समय बदलता गया वह सोने की मोहरे मुद्राओं से पीतल चांदी सिल्वर से अब कासे में आ गई हैं उसके बाद सिक्के बनने लगे सिक्के चलने लगे समय बदलता गया,ओर अब कागज के नोट में आ गए अब कागज के नोट चलते हैं जीस गांधी जी ने देश को आजाद कराया था उसी का फोटो लगा हुआ नोट सबसे ज्यादा चलता है और भ्रष्टाचार की निशानी भी वही है सबसे बड़ा नोट टेबल के नीचे से और टेबल के ऊपर से भी गांधी जी के फोटो के सामने गांधी जी का लगा वह नोट लेते हैं इसीलिए कहते हैं ना 100 में से 80 बेईमान फिर भी मेरा देश महान ,
आज समय तेज होता जा रहा है झोपड़ियां के बदले पहले महल बनते थे अब झोपड़ियां टूटकर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग व परिसर बना रहे हैं लोग और देश तरक्की कर रहा है पर गरीबी अभी भी कम नहीं हुई है बल्कि बड़ी है आबादी के हिसाब से गरीबी बड़ी है कई ऐसे धनवान लोग बैठे हैं जो निस्वार्थ होकर अपने धन का सदुपयोग करते हैं धर्म के कार्य में समाज के हित के कार्य में गरीबों के लिए खर्च करते हैं दिल खोलकर खर्च करते हैं पर कुछ लोग ऐसे हैं जो पैसा तो खूब है पर खर्च करने के मामले में बहुत कंजूस है अपने ऊपर करोड़ों रुपए खर्च करेंगे अगर किसी को जरूरतमंद को देना हो तो ₹10 देने के लिए 10 बार सोचेंगे और कुछ ऐसे लोग भी हैं नाम समाज का लेते हैं घर अपना भरते हैं कार्यक्रम करते हैं समाज का नाम लेकर और नाम अपना करते हैं पूरा कार्यक्रम में लाखों रुपए खर्च करते हैं सबको मन मुताबिक पैसा देते हैं पर जब बात आती है एक ईमानदार मेहनत कश फोटोग्राफर की या किसी खाने बनाने वाले की तो उसको पैसा देना है तो 10 बार सोचेंगे 10 नूक्स निकालेंगे 10 बार घुमाएंगे तब जाकर पैसा देंगे कार्यक्रम खत्म होने के बाद सब आदमी भूल जाता है पर दो चीज याद रखता है खाना अच्छा था यार और दूसरा फोटो जो देखा है वह हमेशा याद आती है और इन लोगों को ही पैसा कम मिलता है खासकर फोटोग्राफर को और जो मेहनत मजदूर साफ सफाई वाले उनको कई लोग ऐसे भी देखा हमने पैसे के नाम पर बुखार आ जाता है हजार बहाने करते हैं हजार नाटक करते हैं जरूरतमंद को और समाज हित के लिए पैसा उनका नहीं निकलता और अगर निकल भी गया ना तो किस तरह , वसूली कर लूं वह जरूर सोच लेता है और वसूली कर भी लेता है एक कहावत पुरानी है
(नाम बड़े काम खोटे )
इस तरह एक बड़ा सेठ मिला नाम भी बड़ा सेठ भी बड़ा पेट भी बड़ा लेकिन 💜❤दिल बड़ा नहीं था दिल बहुत छोटा था हजार बार समझाने के बाद भी सेठ नहीं समझा आखिरी में राम-राम करके चला गया और करोड़ों की प्रॉपर्टी पीछे छोड़ गया शराबी,गजैढी ,बेटों ने लुटिया डूबा दी और महलों में रहने वाला झोपड़ी में पहुंच गया और क्या लेकर गया एक चवन्नी भी लेकर नहीं गया इसीलिए कहते हैं पैसे कमाओ तो ईमानदारी से खर्च करो तो ईमानदारी से और धर्म के कार्य में खर्च करते समय कभी सोचा ना करें किसी की जरूरतमंद की मदद करते हैं तो कभी सोचा ना करें क्योंकि जो आप उनको दोगे तो 10 गुना लौटकर आपके पास आएगा और वह पुण्य भी आपके खाते में जुड़ जाएगा और कई लोग दिखाकर पैसा देते हैं कई लोग बात कर पैसा देते हैं और कुछ लोग ऐसे हैं जो छुपा कर पैसा देते हैं पैसा देने का भी एक कला है समाज सेवा करने की भी एक कला है कार्य करने की भी एक कला है कुछ लोग दिखावे की माला जपते हैं राम-राम कुछ लोग मन में शांति से बैठकर सच्चे मन से भगवान की नाम जपते हैं राम-राम फल तो दोनों को मिलेगा क्योंकि दोनों ने राम का नाम लिया है पर जिसने सच्चे मन से लिया है उसे भगवान के दर्शन होंगे और जिसने लोगों को दिखाने के लिए राम का नाम लिया है उसको भी फल मिलेगा लेकिन उतना नहीं मिलेगा जितना सच्चे मन के वालों को मिलेगा इतना दिल से नाम जपने वाले को मिलेगा याद रखे दुनिया को धोखा दे सकते हो अपनों को धोखा दे सकते हो पर क्या अपनी अंतरात्मा से धोखा कर सकते हो ऊपर बैठा है भगवान उसको धोखा दे सकते हो घर के बाहर दुकान के बाहर सीसी कैमरा लगाकर बैठे हो बोलते हो आप सिसी केमरे की नजर में है पर आप खुद भगवान की नजर में हो जो ऊपर बैठा सब देख रहा है यह बात क्यों भूल जाते हो
इसलिए अच्छे कर्म करो धर्म की राह पर चलो और समाज की सेवा करो सेवा के बदले मेवा खाने का मत सोचो और जो कुर्सी को एक बार पकड़ कर बैठे हो उसको छोड़ते नहीं हो यह गलत है सब को सेवा करने का मौका मिलना चाहिए कोई अगर सच्चे मन से सेवा करना चाहता है खुद आगे आ रहा है तो उसे सेवा का मौका दीजिए यह आपकी पर्सनल प्रॉपर्टी नहीं है समाज की सेवा के लिए बनाया गया एक सिस्टम है इसका दुरुपयोग मत करो जैसा बीज बोओगे वैसा फल पाओगे आज नहीं तो कल सच सबके सामने आएगा इसलिए ऐसा कार्य न करो कि कल आपको सबके सामने शर्मिंदा होना पड़े सर झुकाना पड़े काम ऐसा करो आपका भी समाज का भी और शहर का भी देश का भी नाम ऊचा हो इसमें ही सबका भला है
(संपादकीय)
