अपनी कलम से,

थी जो हरियाली से भरी, हमारी पावन धरती कभी,
अपने नापाक इरादों से कर दिया,खून से इसे लाल!
हर तरफ़ खुशहाली मस्ती,सुकून भरी थी जिंदगानी,
है आज बेचैन हर घर-परिवार, इस धरती का लाल!
है जिसनें अंजाम दिया, आज उसे सबक देना होगा,
अब मीठी बातों को छोड़, कुछ न कुछ करना होगा!
बहुत हुआ शांति वार्ता, बहुत हुआ है भाईचारा भी,
हुए उन शहीदों का बदला, अब हमें भी लेना होगा!
हो इरादे लहरें समंदर सी, हर दिल में अब तो यारों,
है इरादे मजबूत हमारे भी,ये एहसास दिलाना होगा!
हो धमकते बादल,गर्जन से थर्रा उठे ये आसमां भी,
ऐसे जुर्रत करने वाले को, है ऐसा सबक देना होगा!
एक सबक ऐसा मिले उन्हें,कांप उठे दुश्मन “प्रताप”,
स्वाभिमान की ये ज्वाला, हर दिल में जलाना होगा!
अब तो बात बस कश्मीर की ही न करें हरदम यारों,
सरहद पार कर आक्रमण,पी.ओ.के.भी लाना होगा!
छिप कर ये दर्द भरा खेल, उन लोगों ने शुरू किया,
ले बदला मुंहतोड़ जवाब, आज हमें भी देना होगा!
फ़िर न कर सके दुस्साहस,और न नज़र मिला सके,
हर चिंगारी बने ज्वाला, ऐसा इतिहास रचना होगा!
है वीरता की गाथा,हो जाए अमर लिखना ही होगा,
अपने शौर्यता की परिचय, अब हमें भी देना होगा!
बहुत हुआ है गले लगाया,भाईचारा भी निभा लिया,
निज जाति देश की रक्षा, यही संकल्प हमारा होगा!
है बेचैन दिल सभी का, है हर दिल की यही पुकार,
हो उदघोष यारों फिर से,बस हो जाए आर या पार!
बस हो जाए आर या पार…….
बस हो जाए आर या पार……..
……..
🖋️ डॉ.सूर्य प्रताप राव रेपल्ली