
बिलासपुर – दंतेवाड़ी (गुजरात) – गुजरात के दंतेवाड़ी में तीन दिवसीय राजयोग कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय रामाग्रीन सिटी बिलासपुर (छत्तीसगढ़) की मुख्य प्रशासिका आदरणीय राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी राखी दीदी जी ने देश की रक्षा करने वाले सैनिकों का उमंग उत्साह बढ़ाने के लिए तथा परमात्मा से जोड़कर उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए गुजरात के दंतेवाड़ी में पहुंचकर वहां के सैनिकों को उमंग उत्साह के साथ देश की रक्षा करने के लिए अपना भाव प्रकट करते हुए कहा कि आप सैनिकों के कारण ही आज हमारा देश सुरक्षित है और देश के अंदर सभी लोग चैन से जीवन जी रहे हैं
आगे राजयोगिनी राखी दीदी जी ने यह भी बताया कि सैनिकों के लिए ही यह नारा है “जय जवान जय किसान” हमारे देश के सैनिक और किसान ही देश के समस्त नागरिकों का पेट भरते हैं कैसी भी परिस्थिति हो कई बार उन्हें सूखी रोटी भी खाकर अपना पेट भरना पड़ता है तथा कई बार भोजन भी नसीब नहीं होता लेकिन दूसरों का पेट भरने वाले हमारे सैनिक और किसान है। यदि आप सैनिक ना होते तो आज किसी को भी चैन की नींद चैन से भोजन नहीं मिल पाता आप सैनिकों ने अपना जीवन देश की रक्षा में समर्पित कर पूरे देश के समस्त नागरिकों का जीवन सवार दिया आज देश में सभी लोग ऐसो आराम का जीवन व्यतीत कर रहे हैं इसका एकमात्र कारण हमारे देश के सैनिक हैं, संसार रूपी घर के दीवार है सैनिक, ऐसे सैनिकों को शत-शत नमन किया।
तत्पश्चात राजयोगिनी राखी दीदी जी ने सभी सैनिकों का मनोबल एवं आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए देश के सुरक्षा के साथ-साथ स्वयं के विकारों को समाप्त करने के लिए परमात्मा से ध्यान लगाना बताया उन्होंने कहा कि जो देश की रक्षा करते हैं उनकी रक्षा स्वयं परमात्मा करते हैं परमात्मा हम सभी आत्माओं का एकमात्र परमपिता है जो हर वक्त हमारे साथ रहते हैं, हर मुसीबत से, हर परिस्थितियों से परमात्मा हमारी रक्षा करते हैं यदि हम एकांत में बैठकर परमात्मा का चिंतन करते हैं उन्हें यथार्थ रीति याद करते हैं तब उनसे हमको शक्तियां मिलती है जो शक्तियां हमारे मनोबल को आत्मविश्वास को बढ़ाती है और हर वक्त हमें बुराइयों से और अनेक प्रकार के विघ्नों से रक्षा करती है । अंत में राजयोगिनी राखी दीदी जी ने उपस्थित समस्त सैनिकों को राजयोग के माध्यम से स्वयं को परमात्मा से जोड़ने की विधि बताई सभी को मेडिटेशन कराया
कार्यक्रम की सफलता- उक्त कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों आए हुए लगभग 200-250 सैनिक उपस्थित रहे और उन्होंने राजयोग का आनंद लिया एवं अपने जीवन में धारण करने का वचन दिया इस प्रकार उक्त कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ