कविता
*ललिता टॉक, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर, महिला चिकित्सालय जयपुर*

उम्र है हमारी अभी खेलने कूदने की
नहीं ये उम्र प्रतिस्पर्धा से जूझने की
हमें खुली हवा सा बहने दो
पंछी की तरह अभी उड़ने दो उम्र है हमारी अभी खेलने कूदने की
नहीं ये उम्र प्रतिस्पर्धा से जूझने की
जब मजबूत हम हो जाएंगे
तब खुद ही छलांग लगाएंगे
मत बांधो प्रतिस्पर्धा की जंजीरों में
छोड़ दो स्वच्छंद जीने दो हमें
बचपन मत छीनो हमसे
मत थोपो यह प्रतिस्पर्धा का बोझ
हमसे सहन नहीं होता अब ये बोझ
हमारे दिल की भी सुन लो
मत बोझ हम पर इतना डालो
हमें अपने रुचि का नहीं करने देंगे
तो हम कैसे अपना बेस्ट देंगे होगा हमारी मर्जी का तो देंगे बेस्ट
मानते हैं हर जगह प्रतिस्पर्धा हो रही चाहे नौकरी हो प्रतियोगिता परीक्षा आवेदकों की संख्या अधिक हो
उम्र हमारी अभी खेलने कूदने की
नहीं है उम्र प्रतिस्पर्धा से जूझने की
जब समय आएगा हम भी बता देंगे प्रतिस्पर्धा को आसानी पार करेंगे जब होगी उम्र हमारी बताएंगे प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ जाएंगे!
उम्र हमारी अभी खेलने कूदने की
नहीं उम्र प्रतिस्पर्धा से जूझने की!
हमें खुली हवा सा बहने
पंछी की तरह अभी उड़ने दो!
ललिता टॉक, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर महिला चिकित्सालय