स्थान: ब्रह्माकुमारीज़, शिव अनुराग भवन, राजकिशोर नगर, बिलासपुर
बाल संस्कार शिविर
बिलासपुर :- बाल संस्कार शिविर के छठे दिन बच्चों को आत्मिक, नैतिक एवं संगीतात्मक शिक्षा के माध्यम से प्रेरणादायक अनुभव प्रदान किए गए। बीके गायत्री दीदी ने बच्चों को एक सशक्त संदेश देते हुए कहा:
“जीत भले ही तय हो तेरी, पर प्रयास तुझे ही करना होगा।
कृष्ण केवल बनेंगे सारथी , तेरा युद्ध तुझे ही करना होगा।”
इस संदेश से बच्चों के मन-मस्तिष्क में आत्म-निर्भरता, कर्म की जिम्मेदारी और भगवान के प्रति आस्था का बीज रोपित किया गया ।
विद्यार्थी जीवन की परिभाषा – ज्ञान की ओर पहला कदम
बच्चों ने कविता के माध्यम से जाना कि “विद्यार्थी” वह होता है जो विद्या (ज्ञान) पाने की गहरी इच्छा रखता है।
“मीठा हो या कड़वा, जीवन में जो परोसा जाए – सब चखना होगा,
अनुभव से ही सीखकर आगे बढ़ना होगा।”
यह संदेश बच्चों में सहनशीलता, सीखने की प्रेरणा और जीवन की परिस्थितियों को स्वीकार करने की भावना को प्रबल करता है।

🎵 “गुड म्यूजिक व बैड म्यूजिक” –
संगीत पर आधारित एक विशेष सत्र में बीके कविता बहन ने बताया कि:
“हमारे चारों ओर संगीत है – हमारी धड़कन, हमारी चाल भी एक लय है।”
उन्होंने समझाया कि –
गुड म्यूजिक: जिसकी वाइब्रेशन, फीलिंग, लिरिक्स और इंटेंशन हमें सुकून, प्यार, साहस और सकारात्मक ऊर्जा देती हैं।
बैड म्यूजिक: जिससे गुस्सा, रोना, बदले का भाव, डर और थकावट उत्पन्न होती है।
एक सुंदर उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा:
“डीजे में रात भर नींद नहीं आती, लेकिन जगराता में नींद आ जाती है,
क्योंकि नींद फूलों की शय्या में आती है, कांटों की शय्या में नहीं।”
इसलिए बच्चों को गीतों का विवेकपूर्ण चयन करना चाहिए – जो मन को स्थिरता और आत्मा को ऊर्जा दे।
सत्र के अंत में सभी बच्चों को लीची वितरित की गई जिससे बच्चों के चेहरे खिल उठे।