मारपीट छुड़ाने वाले बंटी सिंह पर झूठी एफआईआर, VIDEO ने उगला सच लेकिन पुलिस ने आंखें बन्द कर सत्ता के आगे झुकाई गर्दन ।
रायगढ़ | पुलिस की कार्रवाई अब अपराध के खिलाफ नहीं, बल्कि राजनीतिक रसूख के इशारे पर तय होती दिख रही है। जूटमिल गेट के पास हुई मारपीट की घटना में ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि जिस युवक ने झगड़ा छुड़ाने का प्रयास किया, उसी पर पुलिस ने सत्ता के दबाव में मारपीट और लूटपाट का झूठा मामला दर्ज कर दिया। नाम है – बंटी सिंह, जो एक पत्रकार के बड़े भाई हैं।
वीडियो ने उगला सच, लेकिन पुलिस ने बंद रखीं आंखें….
इस घटना का स्पष्ट वीडियो वायरल है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि बंटी सिंह न सिर्फ मारपीट से दूरी बनाए हुए हैं, बल्कि “छोड़ो-छोड़ो” कहकर माहौल को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं। एक हाथ में मोबाइल है, दूसरा बीच-बचाव में लगा है। ना हाथ उठाया, ना कोई हिंसा की लेकिन पुलिस ने एफआईआर में बना दिया ‘हमलावर’।
शांति बनाए रखने की सज़ा—यह कैसा इंसाफ?….
सरकारें जनता से बार-बार अपील करती हैं कि कोई भी हिंसक घटना दिखे तो लोग हस्तक्षेप करें, रोकें। लेकिन रायगढ़ पुलिस ने यह संदेश दे दिया है कि “बीच-बचाव करना अपने आप को सलाखों के पीछे पहुंचाना है।” अगर यही रवैया रहा तो अगली बार कोई भी न मदद करेगा, न बोलेगा क्योंकि अपराधियों की जगह निर्दोष जेल जाएंगे।
परिवार की पुकार: झूठ के खिलाफ खड़ा हो समाज…
बंटी सिंह के परिजनों का कहना है कि “ये मामला सिर्फ हमारे भाई का नहीं, बल्कि हर उस नागरिक का है जो न्याय व्यवस्था में भरोसा रखता है। वे मांग कर रहे हैं कि…. इस झूठी एफआईआर को तत्काल निरस्त किया जाए। घटना के बाद का थाना प्रभारी के मोबाइल का सीडीआर निकला जाए जिससे स्पष्ट हो सके कि आखिर किसके दबाव में आकर बेगुनाह बंटी सिंह पर फर्जी अपराध दर्ज किया तथा जांच के बाद बेगुनाह पर गंभीर अपराध दर्ज करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो। बंटी सिंह को क्लीन चिट मिलनी चाहिए।
समाज को अब तय करना है….
हम अन्याय पर चुप रहेंगे या सच के साथ खड़े होंगे। बंटी सिंह का मामला रायगढ़ की उस जमीनी हकीकत को उजागर करता है जहां सत्ता की छाया में सच को दबा दिया जाता है, और पुलिस न्याय नहीं, दबाव में फैसले करती है। अब वक्त है सवाल पूछने का—वरना अगला नंबर आपका हो सकता है।