विजय की ✒कलम
बिलासपुर ;- एक तरफ पूरे देश भर में श्री झूलेलाल चालिहा महोत्सव की मची है धूम लोग भक्ति भाव पूजा पाठ में विलीन है
दूसरी तरफ भगवान झूलेलाल के नाम से बना सामाजिक भवन श्री झूलेलाल मंगलम बिलासपुर में वहां पर हो रहा भारी गोलमाल? ओर कई ऐसे कार्य जो नहीं होने चाहिए वो गैर कानूनी तरीके से चल रहे हैं क्यो?
जो हमारे आराध्य देव झूलेलाल जी के नाम से बना है भवन उसी भवन में लूट खसोट, धोखा फरेब विश्वास घात, बेईमानी 420 के लग रहे हैं आरोप क्यों?
क्या हमारे वरिष्ठ बुजुर्गों, समाजसेवियों ने इसलिए इस भवन की कल्पना की थी और इस भवन को बनाया था की लोग यहां पर महाभारत करें और समाज के ही निचले निन्म वर्ग को कार्य करने से वंचित रखा जाए? उन्हें इससे से दूर रखा जाए? कुछ सालों से देखा जा रहा है की श्री झूलेलाल मंगलम बिलासपुर में आए दिन सोशल मीडिया में प्रमुख अखबारों में, न्यूजों में ऐसी खबरें पढ़ने को मिल रही है जिससे हमारे बिलासपुर सिंधी समाज का🙆सिर शर्म से झुक जाता है
वहां बैठ बड़े-बड़े लोगों पर लग रहे हैं गंभीर आरोप क्यों?

इन आरोपो ➡पर कितनी सच्चाई है यह तो अब समझ में आ रहा है जब ईमानदार पत्रकारों पर अत्याचार किया गया झूठा आरोप लगाया गया और जब सच अब सामने आ रहा है तो बड़ा ही डरावना है ?
जो सफेद पोस्ट में बैठे हैं उनके चेहरे के पीछे देखेंगे तो एक 😱डरावना चेहरा छुपा हुआ है ?
जो कोई कभी सोच भी नहीं सकता था कि वह ऐसा करेंगे वैसे निकलेंगे और अभी तक ऐसा कर रहे हैं ?
पर यह 100% हकीकत है जब मैं इस कहानी के तह में जाना शुरू किया और पता करना शुरू किया तो शुरुआत में मुझे भी विश्वास नहीं था कि यहां पर ऐसा कुछ होता होगा पर धीरे-धीरे जैसे-जैसे में आगे बढ़ता गया तो सच बहुत डरावना था और भयानक था जिनके साथ मैंने इतने साल काम किया हैं मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि यह ऐसे लोग निकलेंगे और अपने चेहरे के ऊपर साफ सुथरा चेहरा लगा के रखा था? समाज को बेवकूफ बनाने के लिए धोखा देने के लिए?
हम हर बार कहते हैं कि आप अगर सच्चे हो ईमानदार हो तो समाज कि बैठक क्यों नहीं बुलाते हो समाज के सामने सच क्यों नहीं रखते हो?
कहानी शुरू होती है सन 2013 में जब इस
श्री झूलेलाल भवन का निर्माण हुआ और इसकी नई कमेटी बनी थी

श्री झूलेलाल सेवा समिति बिलासपुर (जो अवैध तरीके से बनी? जिन्होंने इस भवन में 2 लाख से ज्यादा का सहयोग दिया उन धन्ना सेठों द्वारा बनाई गई नाजायज / ❌गलत कमेटी है?) उस समय इस कमेटी में 73 सदस्य थे और चार विशेष आमंत्रित सदस्य थे टोटल 77 सदस्य थे वक्त बितने के साथ-साथ किसी ने भी ईस ओर ध्यान नहीं दिया अब सन 2025 में जब हम सच का पता लगाते लगाते पहुंचे तो हमें कई ऐसे डॉक्यूमेंट मिले जिसे देखकर सच सामने आ गया की 2013 में 73 सदस्य और चार विशेष आमंत्रित सदस्य टोटल 77 और 2025 में जो अभी हाल ही में 30 मार्च को चेट्रीचंड्र महोत्सव के अवसर पर इस भवन की श्री झुलेलाल सेवा समिति का एक विज्ञापन नवभारत अखबार बिलासपुर में छपा था जिसमें 69 सदस्यों के फोटो लगे हुए थे जिसमें दो वरिष्ठ लोगों का स्वर्गवास हो चुका था उनकी जगह उनके पुत्रों को शामिल किया गया था उनको मिलकर 69 सदस्य हो रहे थे और जो विशेष आमंत्रित सदस्य थे उनका फोटो नहीं लगाया गया था ठीक है
टोटल इन्होंने 69 फोटो लगाए थे विज्ञापन में जब हमने बारीकी से चेक किया तो कई नाम हमें ऐसे मिले जो 2013 की लिस्ट में थे पर आते-आते 2025 की लिस्ट में गायब हो गए? उनकी जगह नए नाम आ गए जबकि उनके संविधान में साफ लिखा है की जो व्यक्ति जब तक जीवित रहेगा वह सदस्य रहेगा और किसी भी व्यक्ति कि सदस्यता तब समाप्त मानी जाएगी जब उसकी मृत्यु हो जाए या वह पागल हो जाए या उस पर गलत कार्यों का दोष साबित हो जाए तो उसकी सदस्यता समाप्त मानी जाएगी यहां पर दो व्यक्ति की मृत्यु हुई है पर कहीं भी यह नहीं लिखा है कि किसी भी सदस्य की मृत्यु होने पर उसके परिवार के सदस्यों को भवन की समीति का सदस्य बनाया जाएगा ? पर इस समिति में दो ऐसे लोगों को सदस्य बनाया गया है जिनकी पिता की मृत्यु हो चुकी है जो कि उनके संविधान के अनुसार अवैधानिक है?


और संविधान के अनुसार श्री झूलेलाल मंगलम बिलासपुर मे कम से कम 11000/= से या उससे अधिक सहयोग करने वाले सभी श्री झूलेलाल मंगलम सेवा समिति बिलासपुर के सदस्य रहेंगे लेकिन संविधान के अनुसार इनमें से किसी को भी सदस्य नहीं बनाया गया ?
सिर्फ 2 लाख से ज्यादा वालों को ही सदस्य बनाकर इस झूलेलाल मंगलम भवन बिलासपुर को हड़प लिया गया है?
इस पर बिलासपुर सिंधी समाज के भवन को कब्जा कर लिया गया है ?
धन्ना सेठों द्वारा क्यों?
और कुछ नाम ऐसे हैं जो लोग जीवित हैं अभी भी पर उनकी जगह अब कुछ नए नाम आ गए हैं क्यों? यह सोचने वाले विचार है और गंभीर सवाल भी है इसका जवाब इनको देना होगा समाज को? 2013 की लिस्ट में एक नाम ऐसा है जो विशेष आमंत्रित सदस्य था और वह 2025 में आज भी वह लिस्ट में शामिल है पर अब वह विशेष आमंत्रित सदस्य की लिस्ट में नहीं है बल्कि संपूर्ण सदस्य माना गया है? तो किस हैसियत से उसे संपूर्ण सदस्यता दी गई या उसे सदस्य बनाया गया यह भी एक प्रश्न चिन्ह है और उसका भी जवाब इनको समाज को देना होगा?
अभी हाल ही में कुछ दिन पूर्व उनकी नई कार्यकारिणी की घोषणा हुई है जिसमें 11 विशेष आमंत्रित सदस्य बनाए गए हैं जैसा की सूत्रों से जानकारी मिल रही है आप विशेष आमंत्रित सदस्य बना सकते हैं पर उस सदस्य को कोई पद नहीं दे सकते हैं ? इनके संविधान में कहीं भी ऐसा नहीं लिखा है कि विशेष आमंत्रित सदस्यों को पद दिया जाएगा ? पर यहां पर कई विशेष आमंत्रित सदस्यों को पद बांटे गए हैं? जो कि उनके संविधान के खिलाफ है अवेधानीक है?
जबकि उनके कई प्रमुख सदस्य समिति में है उनको पद नहीं दिया गया और विशेष आमंत्रित सदस्यों को पद बांटे गए किस अधिकार के तहत?
जैसा कि मैंने🙋 पहले भी विजय कि कलम में बताया था कि अभी जो सेंट्रल पंचायत से जुड़ी हुई समितियां हैं जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका है उन समितियों के अध्यक्ष व नई कार्यकारिणी का गठन जो किया जा रहा है उसमें ऐसे ऐसे लोगों को भरा जा रहा है और पद रेवाड़ी की तरह बाटे जा रहे हैं जो की आने वाले चुनाव में उनका सहयोग करें उनका साथ दें? हाल ही में सिंधु चेतना के नए अध्यक्ष की भी घोषणा की गई थी समाधान योजना के कार्यकारी अध्यक्ष की भी घोषणा की गई थी जिसका विस्तार से मैनें पिछले अंक में बताया था और यह सब घोषणा सेंट्रल पंचायत का चुनाव को देखते हुए की जा रही है ताकि किसी भी तरह यह चुनाव वै जीत जाऐ?
जैसा कि मैंने पहले भी कहा था काम दंड भेद सब अपना कर यह चुनाव जीतना चाहते हैं?
उसी कड़ी में इस झूलेलाल सेवा समिति में भी एक-एक व्यक्ति को तीन-तीन चार-चार पद बांटे गए हैं क्यों?
और इसके कोषाध्यक्ष और महामंत्री उन लोगों को बनाया गया है जो पहले ही युवा विंग में पदाधिकारी हैं और अपनी पंचायत में भी पदाधिकारी हैं सेंट्रल पंचायत में भी पदाधिकारी हैं सिंधु चेतना में भी पदाधिकारी हैं भारतीय सिंधु सभा में भी पदाधिकारी हैं और एक तो भारतीय सिंधु सभा का वर्तमान में अध्यक्ष भी है ?
एक व्यक्ति पहले से ही जब इतनी संस्थानों में जुड़ा हुआ है और पद में है फिर उस व्यक्ति को इतना बड़ा पद क्यों दिया गया?


क्या आपकी कमेटी में ऐसा कोई लायक व्यक्ति नहीं है जिसे आप ऐसा पद दे सके?
बिल्कुल है इनकी कमेटी में एक से एक ईमानदार और अच्छे व्यक्ति हैं पर ये लोग उनको पद नहीं देना चाहते क्योंकि जानते हैं अगर इनको हम महत्वपूर्ण पदों पर बैठा देंगे तो हमारी पूरी पोल खुल जाएगी?
इनको यही डर हमेशा सताता है इसलिए 8 साल तक एक ही व्यक्ति कोषाध्यक्ष बना रहा?
अध्यक्ष बदलते रहे पर कोषाध्यक्ष नहीं बदला गया क्यों?
इस बार कोषाध्यक्ष बदला गया क्योंकि उन्हें पता है कि अब सच की कलम चल पड़ी है ?
और हमारी ढोल की पोल खुली पड़ी है? इसलिए इस बार कोषाध्यक्ष को बदल दिया गया पर उसकी जगह में अपने ही मोहरे फिट किए गए ताकि लेनदेन चलता रहे?
और किसी को पता भी ना चले ?
एक व्यक्ति इतना गिर सकता है मैंने कभी जीवन में सोचा भी नहीं था? और ना कभी ऐसा देखा था ?जो नजारा मुझे यहां पर अपने शहर बिलासपुर में देखने को मिल रहा है की कुर्सी के लिए और कितना गिरेंगे ये लोग ?

ईससे अच्छी तो तवायफ है कम से कम वह छुपा के कोई काम तो नहीं करती ?
अपने ग्राहक के साथ दोगलापन तो नहीं करती बेईमानी तो नहीं करती ईमानदारी से उसे सुख देती है जिसका वह पैसा लेती है?
पर यहां पर तो दोगलापन बेईमानी 420 की हदे ही पार कर दी गई है ?
नाम समाज का लेकर घर अपना भरे बिल्डिंग अपनी बनाएं मकान दुकान अपना बनाएं गाड़ी अपनी खरीदे बांग्ला अपना बनाएं और धोखा ओर विश्वास घात समाज के साथ करें?
और फिर भी चेहरे में शर्म नाम की चीज नहीं? ऐसे बेशर्मो से क्या समाज का भला होगा?
आने वाली पीढ़ी को क्या देकर जा रहे हैं कभी सोचा है अपनी संतानों को क्या सीखा कर जा रहे हो की बेटा हमारे जैसे ही गलत काम करना समाज के नाम पर धंधा करना लुट खसोट करना और बंगला गाड़ी बनाना? अय्याशी करना एश करना?
रत्ती भर की भी अगर कुछ शर्म बाकी है? तो ओर अपने पूर्वजों का कुछ मान सम्मान इज्जत अगर मन में है तो यह गोरख धंधा तुरंत अभी से बंद करें?
याद रखना समाज और इतिहास कभी भी आपको माफ नहीं करेगा? सात पिढीयो तक यह कलंक आपके खानदान के सिर के ऊपर लगा रहेगा?
हम एक बार फिर आप सबको याद दिलाते हैं कि इस बार अगर ईमानदारी से चुनाव होगा तो सत्ता परिवर्तन जरूर होगा चाहे कितना भी जोर लगा लो सच को सबके सामने आने से रोक नहीं सकते हो? बदल नहीं सकते हो?

जनता अब ठान चुकी है आप लोगों को पहचान चुकी है? सबका असली चेहरा देख चुकी है ?
और 😏मन
बना चुकी है सत्ता परिवर्तन का
और आखिरी अंतिम बात जिस आराध्य देव भगवान झूलेलाल जी के नाम से हमारा यह भवन बना है कम से कम उस भगवान झूलेलाल जी का नाम तो खराब मत करो ?
यां इस भवन का नाम ही बदल दो अगर तुम्हें यही सब गलत कार्य करने हैं तो?
(बातें बहुत हैं राज बहुत है धीरे-धीरे पन्ना किताब का पलटेगा सच सबके सामने आते रहेगा?)
सत्यमेव जयते
संपादकीय