विजय की ✒ कलम
( क्या कुर्सी की लालच ने आपस में डाली दरार? )
जैसे पूरे विश्व में अभी घमासान मचा हुआ है कई देश आपस में लड़ रहे हैं तो कई नेता लड़ रहे हैं इसी तरह हमारे देश में भी सत्ता पक्ष ओर विपक्ष दोनों में घमासान मचा हुआ है ?
अब यह तो हुई राजनीतिक की बातें पर अब आते हैं सामाजिक विषय पर समाज में भी कुछ अच्छा नहीं चल रहा है राजनीति का असर इतना बढ़ चुका है कि अब सबको पद और कुर्सी की भूख और लालच लग चुकी है?
एक कहावत बहुत पुरानी है कि एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है ठीक उसी तरह एक क्रुर तानाशाह व्यक्ति ने पूरे समाज का बेड़ा गर्क कर दिया है?
जैसे कुछ वर्ष पूर्व एक बीमारी फैली थी करोना अगर कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को छू देता था तो उसे भी करोना हो जाता था?
इसी तरह आज सिंधी समाज में भी यह क्रुर तानाशाह जिस सिंधी समितियों एवं सिंधी पंचायतों पर अपनी आंख गढ़ाता है उसका बेड़ा गर्क हो जाता है?
उसकी गंदी नजर गंदी सोच व उसके गलत कार्यो के कारण आज सिंधी समाज में बहुत उथल-पुथल मची हुई है?

जिस उद्देश्य को लेकर सिंधी सेंट्रल युवा विंग बिलासपुर का गठन किया गया था क्या वह उद्देश्य पूरे हुए?
सेंट्रल सिंधी युवा विंग हो या कई अन्य समितियां हो सबको एक ही ढ़रे पर लाइन पर खड़े कर दिया गया है?
आने वाले पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर के चुनाव में किसी भी तरह अपने उम्मीदवार को जिताना है?
और वह लोग भी गुलाम की तरह हां में हां मुंडी हिला रहे हैं ?
और उनके सुर में सुर मिला रहे हैं?
बगैर कुछ सोचे समझे भेड़ बकरियों की तरह उसके पीछे मैय… मैय… करते हुए चले जा रहे हैं?
गांधी जी के तीन बंदर थे
(बुरा मत – देखो बुरा – मत सुनो – बुरा मत बोलो)
यह सभी के लिए था पर अब इस उपदेश का भी इन्होंने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है ?
जैसे क्रुर तानाशाह अगर बुरा करता है उसे मत देखो ,तानाशाह अगर बुरा बोलता है तो उसे मत सुनो, क्रुर तानाशाह अगर बुरा सुनता है और तुम चुप रहो,
मतलब कि वह कुछ भी गलत करें किसी को भी गलत बोले तुमको कुछ नहीं बोलना है? अपको अपनी आंख मुंह और कान बंद रखना है?
अगर कोई क्रुर तानाशाह के लिए बुरा बोलता है बुरा करता है तो आंख अपनी नहीं सामने वाले की बंद कर दो ?
गुलाम बन गए हैं सिर्फ कुर्सी की लालच के लिए ?
ओर चंद कागजों के टुकड़ों के लिए?
आज से 2 साल पहले मैंने एक विजय की कलम में लेख लिखा था कि

(सिंधी युवा विंग चड़ी राजनीतिक की भेट)
तब बहुत हल्ला मचा था इस लेख पर हाहाकार हुआ था कि तूने यह क्या लिखा है तब मैंने कहा था कि जो सत्य है 100 प्रतिशत मैंने🙋 वही लिखा है और आज जो लोगों ने देखा अभी कुछ दिन पूर्व युवाओं की मीटिंग हुई वहां पर तो उनको मेरी बात याद आ गई की
विजय आई एम राइट तुम बिल्कुल सही थे और तूने बिल्कुल सही लिखा था?
तुम्हारी दूर दृष्टि और तुम्हारी सोच तुम्हारी विजय की कलम को हम सलाम करते हैं
शुरुआत में कोई भी मेरा कहना नहीं मानता लेकिन जब हकीकत में वह घटनाएं घटती हैं तब उन्हें विश्वास होता है कि विजय की कलम सच बोलती है और सच लिखती है समाज के हित के लिए कार्य करती है
सबसे महत्वपूर्ण जो बात है वह यह है कि सिंधी सेंट्रल युवा विंग का गठन क्यों किया गया था?
जबकि बिलासपुर शहर में सिंधी युवक समिति 52 साल पुरानी युवाओं की समिति ऑलरेडी थी 😏फिर एक नई समिति बनाने का उद्देश्य क्या था?
तो चलिए आपको आज सच बताते हैं क्रुर तानाशाह और उसके साथियों, चांडाल चौकड़ी ने अपनी अपनी औलादों, रिस्तेदारों के भविष्य के राजनीतिक में ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए वह उनकी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए? और साथ में सिंधी युवक समिति को
नीचा दिखाने के लिए?
पूज्य सिंधी सेंट्रल युवा विंग बिलासपुर का गठन किया गया था?
शुरुआत में तो थोड़ा अच्छा कार्य किया उन्होंने उसके बाद इसमें भी विरोधाभास शुरू हो गया?
और इसे वह कार्य करने नहीं दिया गया जिसमें समाज हित था युवाओं का हित था?
यहीं से शुरू होता है टकराव ओर अहम कि लढाई ?
क्योंकि जो उस समय के अध्यक्ष थे वह सामाज, युवाओं का हित को लेकर आगे चलते थे?
पर कुछ धन्ना सेठों की औलादों को अपना राग अपनी डबली बजा रहे थे? जिसके कारण टकराव शुरू हो चुका था?
जैसे-जैसे समय बितता गया, दूसरा कोई अध्यक्ष आया तो बस एक बात कामन थी कि किसी निम्न वर्ग के युवा को अध्यक्ष नहीं बनाया जाता था पैसे वालों को ही अध्यक्ष बनाया जाता था?
क्योंकि पावर पूरा हमारे पास रहे और जो निर्म वर्ग के लोग हैं युवा हैं वह सिर्फ हमारे जुते के नीचे दबे रहे? ओर हमारी ,जी हजुरी करते रहें और चापलूसी करते रहे ?
कई अच्छे युवा कर्मठ युवा ईमानदार युवा भी थे समिति में जो इस पद के लायक थे उन्हें कभी भी अध्यक्ष नहीं बनाया गया?
चेट्रीचंड्र महोत्सव ओर सिंधी डांडिया में जो कमाई होती थी उस पैसे🤑💸💵💴💶💰💳 का युवाओं के लिए समाज के हित के लिए सदुपयोग ना होकर?
क्रुर तानाशाह अपनी राजनीतिक रोटियां सैकने के लिए उस धन का उपयोग करने लगा?
धीरे-धीरे जो चिंगारी थी वह आग पकड़ चुकी थी और जैसे समय आगे बढ़ता गया वह 🔥आग भी बढ़ती गई और आज वह बढ़ के विकराल रूप ले चुकी है?
जिसका एक नजारा कुछ दिन पहले देखने को मिला , सिंधी सेंट्रल युवा विंग की बेठक में?
कोशिश की गई उस बात को दबाने की?
क्योंकि सामने पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर का चुनाव है? तो वह नहीं चाहता था, क्रुर तानाशाह की सिंधी सेंट्रल युवा विंग बिलासपुर की लड़ाई में पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर का चुनाव हम हार जाएं?
इसलिए उनको अभी चुप करा दिया गया है?
जबकि हर बार सर्व सह समिति से अध्यक्ष बन जाया करता था? पर इस बार ऐसा नहीं हुआ क्यों?
क्योंकि इस बार सिंधी कॉलोनी वाले चाहते हैं कि हमारा ही उम्मीदवार फिर से अध्यक्ष बने,? और इधर तोरवा के युवा चाहते हैं कि हमारा उम्मीदवार अध्यक्ष बने? तो अब लड़ाई तोरवा विद सिंधी कॉलोनी की हो चुकी है?
सूत्रों से मिली जानकारी पूर्व अध्यक्ष ने जाते-जाते दो बात ऐसी कह गई जिससे चिंगारी और भड़क उठी?
पहले तो उसने कहा कि आप सभी का शुक्रिया कि आप सभी के सहयोग से मैंने अपना कार्यकाल पूरा किया पर जो कुछ लोगों ने जख्म दिए हैं कांटे रास्ते में बोये थे.? और जो पीड़ा दी है उन्हें मैं कभी भूलूंगा नहीं याद रखूंगा?
😤मतलब साफ है उनकी इन बातों से और यहीं से चिंगारी भड़क उठी और जिस नाम की चर्चा थी अध्यक्ष बनने की अब उस कुर्सी के लिए चार नाम आगे आ गए? तीन तोरवा क्षेत्र के एक सिंधी कॉलोनी क्षेत्र का जिसमें आजाद नगर के युवाओं ने तोरवा क्षेत्र के एक उम्मीदवार का समर्थन किया था.?
बिरादरी पंचायत भी तोरवा क्षेत्र के एक उम्मीदवार का समर्थन कर रही थी ?
शनिचरी पढ़ाव के युवाओं ने सिंधी कॉलोनी के उम्मीदवार का 💪समर्थन किया?
जूना बिलासपुर के युवा सिर्फ तमाशा देखते रहे? और शांत रहे वै वक्त के इंतजार पर है कि ऊट किस करवट बैठता है तभी हम अपना डिसीजन बताएंगे?
बाकी अन्य वाडो की समितियां भी अंदर ही अंदर एक दूसरे का साठ घाट करने में लगी पड़ी है?
और जो उम्मीदवार हैं अध्यक्ष पद के वह भी उन समितियां से चर्चा करने में लगे पड़े हैं उन्हें अपनी और आकर्षित करने के लिए लोभ लुभावने वादे भी कर रहे हैं?
पर जैसे ही इसकी चर्चा तानाशाह को पढ़ी तो उसने सबको डांट लगाई और क्लास लगवा दी कि अभी सब शांत रहो चुप रहो तुम्हारे कारण बना बनाया खेल कहीं बिगड़ ना जाए और 40 साल की सत्ता हाथ से निकल न जाए?
इसलिए अभी शांत रहो पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर के चुनाव हो जाने दो उसके बाद तुम्हारा भी फैसला होगा तब तक चुप रहो?
क्या इससे युवाओं का भला होगा? अब यह सोचना है बिलासपुर के हर एक सिंधी समाज के व्यक्ति को, कि आपके संतानों को कहां ले जा रहे हैं उनका भविष्य अंधकार में जा रहा है कि उजाले की ओर जा रहा है?
क्या आपकी संताने सिर्फ गुलाम बंन कर रहेगी हैं या कभी राजा भी बनेगी?
सोचना समझना आपको है अगर आप चाहते हैं कि आपकी संतान भी राजा बने अध्यक्ष बने तो इस बार बदलाव जरूर करें बदलाव ही आपका और आपकी आने वाली पीढ़ी का भविष्य तय करेगी ?
(फैसला आपके हाथ हम सदा हैं सच के साथ धर्म के साथ न्याय के साथ और समाज के साथ)
संपादकीय