विजय की ✒कलम
बिलासपुर :- 10 अगस्त को पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत की आम बैठक का आयोजन किया गया
श्री झूलेलाल मंगलम तिफरा बिलासपुर में कार्यक्रम की शुरूआत भगवान झूलेलाल जी के फोटो पर पुष्प अर्पण कर दीप प्रज्वलित करके की गई इस अवसर पर सेंट्रल पंचायत बिलासपुर के कार्यकारी महामंत्री ने आज की बैठक का एजेंडा बताया 2 साल में किए गए कार्यों की जानकारी दी
और पंचायत के अध्यक्ष ने अपने 2 साल के
कार्यकाल में जो सहयोग मिला सभी लोगों का उसके लिए धन्यवाद किया , कोषाध्यक्ष ने 2 साल के आए व्यय का ब्यौरा दिया
अब बात आई अपने-अपने विचार व्यक्त करने की जैसा कि इससे पहले ही मैंने बता दिया था की आज की बैठक में क्या-क्या होने वाला है एक आशंका थी मुझे जो वह सही साबित हुई ?

जो विरोधी टीम है जिन्हें बहुत ज्यादा तकलीफ है हमर संगवारी बिलासपुर से और विजय की कलम से?
वे सब ठान के बैठे थे कि आज हम विजय दुसेजा का विरोध करेंगे और वैसा ही हुआ पर जब मैंने अपने विचार रखें अपनी बात रखी समाज हित के लिए तो सेंट्रल पंचायत के पूर्व अध्यक्ष धनराज आहूजा जी को मैंने कहा कि कुछ दिन पूर्व मैंने आपको और पूज्य सिंधी वार्ड पंचायतों एवं चुनाव अधिकारियों को पत्र दिया था कि भाई इस चुनाव में 10% लोगों को मतदान करने की जगह 100% लोगों को मतदान करने का हक दिया जाए इसलिए मैंने🙋 निवेदन किया था उस पर आप लोगों ने अभी तक क्या विचार किया मुझे जानकारी नहीं दी गई तो मुझे जानकारी दीजिए तो उन्होंने कहा कि संविधान में जो लिखा है हम संविधान के हिसाब से ही चल रहे हैं जो बड़ों ने संविधान बनाया है हम उसका ही पलान करेंगे , तो मेरा पर्सनल प्रश्न था संविधान किसने बनाया है हमारे बड़ो ने बनाया है,
तो क्या उसके बाद संविधान में कभी संशोधन नहीं हुआ है क्या?
जैसा कि हमें सूत्रों से जानकारी मिली है संविधान में, संशोधन हुआ है और वह संशोधन इन लोगों ने अपने हित के लिए किया है ? ना कि समाज के हित के लिए?
और रही बात संविधान में चलने की बात करते हैं तो हमारा प्रश्न फिर वही आता है कि
श्री झूलेलाल सेवा समिति बिलासपुर के संविधान में साफ-साफ अक्षरों में लिखा है कि जिन सिंधी समाज लोगों ने ₹11000/= रुपए सहयोग राशि दी है यां उससे अधिक दी है वह सभी
श्री झुलेलाल सेवा समिति बिलासपुर के सदस्य बनेगे?
फिर उन्हें सदस्य आज तक क्यों नहीं बनाया गया 12 साल गुजर जाने के बाद भी उन लोगो को सदस्य नहीं बनाया गया है क्यों?
जब संविधान की बात आती है तो झुलेलाल सेवा समिति के संविधान में एक बात और लिखी है जिनकी श्री झूलेलाल सेवा समिति बिलासपुर के सदस्य की मृत्यु हो जाएगी उनकी सदस्यता खत्म हो जाएगी फिर जो दो ट्रस्टी थे जिनकी मृत्यु हो चुकी है उनके बेटों को ट्रस्टी के रूप में क्यों शामिल किया गया है ?
(मतलब साफ है जहां आपका हित है वहां आप संविधान की मानेंगे ? )
(और जहां आपकी हार है वहां आप संविधान को नहीं मानेंगे संविधान पर नहीं चलेंगे? )

यह हमर संगवारी बिलासपुर की पहल थी की इस आम बैठक में समाज का आम नागरिक पहुंचे और आज इस बैठक में सिक्योरिटी गार्ड नहीं लगाए गए क्योंकि सबसे ज्यादा सोशल मीडिया में पोस्टर वायरल हमर संगवारी का हुआ था?
जिसमें हमने प्रश्न पूछा था? ओर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया से डर गए विजय की कलम से?
इसलिए इन्होंने सिक्योरिटी गार्ड नहीं लगाए?
इसलिए तो आज पहली बार वहा आम व्यक्ति इस बैठक में शामिल हुए हैं जो कभी इस बैठक में नहीं आए थे इनको जगाया गया, विजय की कलम ने और हमर संगवारी बिलासपुर ने तभी वह यहां पहुंचे थे
जबकि आपके मेटर में साफ-साफ लिखा था कि आम बैठक में वार्ड के अध्यक्ष व उसकी कार्यकारी सदस्य लोग आएंगे?
आम जनता भी आएगी कहीं भी ऐसा नहीं लिखा था?
हमने आज भी वही बात उठाई जो बार-बार हम उठाते आ रहे हैं समाज हित सबसे पहले होना चाहिए अपना स्वार्थ अपना हित घर में रखो या दुकान में रखो ?
इस कुर्सी में बैठने के बाद मत रखो ? जैसा कि हमने पहले बताया था 40 साल की सत्ता ये लोग ऐसे नहीं छोड़ेंगे इसलिए काम दाम दण्ड भेद सब अपनाएंगे?
और आज उन्होंने इसका एक नजारा दिखा भी दिया?
जब चुनाव अधिकारी ने चुनाव की घोषणा की तो 17 अगस्त 2025 तारीख को चुनाव किया जाएगा 11 एंव 12 अगस्त को नामांकन दिए जाएंगे 13 अगस्त को जमा होगा 14 अगस्त को वापसी होगी और एक से अधिक प्रत्याशी होने पर 17 अगस्त 2025 तारीख को चुनाव होगा इसका मतलब कोई चुनाव अगर लड़ना चाहता है तो उसे मात्र दो दिन मिलेंगे 15 और 16 अगस्त चुनाव प्रचार के लिए जबकि हमने इसका पुरजोर विरोध भी किया किसी भी चुनाव में प्रत्याशी को कम से कम 15 दिन यां 20 दिन का समय मिलना चाहिए प्रचार करने के लिए लेकिन यहां पर सिर्फ दो दिन दिए जा रहे हैं और वह भी पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत चुनाव बिलासपुर का जिसमें पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं 17 वार्ड पंचायतें हैं अगर नगर निगम के वार्डों की संख्या के हिसाब से नापा जाए तो 70 वार्ड आते हैं ऐसी स्थिति में आप स्वयं फैसला कीजिए कोई भी प्रत्याशी 2 दिन में कैसे प्रचार कर पाएगा ? जबकि हमारा समाज व्यापारी वर्ग है और जो दूसरा व्यक्ति है वह विपक्ष वाला है उसे तो समय वैसे भी नहीं मिलेगा ना, और समय नहीं मिलेगा तो कैसे चुनाव जीत पाएगा?
विपक्ष का प्रत्याशी तो ऐसे ही हार गया?
दूसरा हमारा प्रश्न था जब आपका कार्यकाल पूरा हो गया चुनाव की घोषणा हो गई तो आपकी कार्यकारणी भंग हो गई तो फिर भंग कार्यकारिणी के लगभग 4 6 के आसपास सदस्य वोटिंग डायरेक्ट कैसे कर सकते हैं?
मतलब आपकी गिनती लगभग 46 वोटो से होगी और विपक्ष वाले की गिनती एक से होगी?
आपने जीत का फार्मूला पहले हि बना के रख लिया है?
अपने चुनाव जीतने के लिए
संविधान में अपने हिसाब से संशोधन पहले करके रख लिया है?
माने भंग हो चुकी पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर के पूर्व सदस्यो को भी वोट देने का अधिकार रहेगा ये कैसा नियम है?
तो इसमें फिर यह चुनाव कराने का ढोंग क्यों?
आम जनता व समाज को मूर्ख बनाने के लिए?
लोकतंत्र की हत्या की जा रही है खुल्लम-खुल्ला ? यह सब देखकर बहुत शर्म आ रही है
संविधान की दुहाई देते हैं और श्री झुलेलाल मंगल भवन के संविधान का सब खुल्लम-खुल्ला धज्जियाँ उड़ा रहे हैं?
और
(अन डायरेक्टली लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया को धमकी देते हैं? )
(हमर संगवारी ना झुका है ना झुकेगा आगे बड़ा है आगे बढ़ते रहेगा विजय की कलम समाज हित के लिए देश हित के लिए धर्म के लिए चलती रहेगी)
पापियों के खिलाफ असत्य के खिलाफ अधर्म के खिलाफ आजीवन लिखता रहूंगा,
पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर का चुनाव 2025 धोखा फरेब और विश्वास घाट बनकर रह गया है?
लोकतंत्र की हत्या समाज के विश्वास का खून कर दिया गया है?
पिछला चुनाव पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर 2023 में भी खुल्लम-खुल्ला बेमानी करके, 420 करके अवैध वोट डलवाकर मिली भगत करके चुनाव जीते थे?
आज मैंने फिर वही बात उठाई और मैंने कहा जहाँ बोलेंगे वहां साबित कर सकता हूं पूरे प्रमाण के साथ कि 2023 का चुनाव बेईमानी करके जीता गया है?
इसलिए चुनाव अधिकारियों को इस बार बदला जाए इन्हे हटाया जाए बार-बार वही चुनाव अधिकारी न बनाया जाए जो दबाव में आकर सत्ता पक्ष के में फैसला लेते हैं?
पर हमारी इन बातों को भी अन 👂सुना कर दिया गया ?
मैं हमेशा बार-बार एक ही बात बोली है अगर पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर 2025 में ईमानदारी से चुनाव होंगे तो सत्ता परिवर्तन जरूर होगा?
पर सत्ता में बैठे लोग इमानदारी से चुनाव नहीं करवाना चाहते हैं? क्योंकि उनको पता है अगर ईमानदारी से चुनाव करेंगे तो हमारी सत्ता खत्म हो जाएगी ? सिंधी समाज में उन्हें कोई पूछने वाला नहीं रहेगा ?
40 साल का शासन हमारा खत्म हो जाएगा हमारा धंधा बिजनेस सब थप्प हो जाएंगे ?
हमारी हुकूमत खत्म हो जाएगी? ओर हमारी तानाशाही जो चल रही है ?
वह भी बंद हो जाएगी?
इसलिए यह सब किया जा रहा है? कुर्सी के लिए किसी भी तरह कुर्सी मिले ?
जिस तरह मछली पानी के बिना नहीं रह सकती है? और तड़पती रहती है उसी तरह ये चंद लोग धन्ना सेठ बगैर कुर्सी के बिना रह नहीं सकते हैं तड़पते रहते हैं?
लोगों को मूर्ख बनाना और मीठी मीठी बातें करना ढोंग करना उनकी आदतें हैं?
एक पूर्व मुखी कहता है हम सामाज की बात करते हैं सामाज में ऐसा करो वैसा करो हमे भाई रहने दो?
बाप बनने पर मजबूर मत करो?
इसका तात्पर्य यह है कि भाई बनकर आप लोगों ने तो वैसे ही बैंड बाजा कर रखी है?
अब बाप बनाकर क्या और अय्याशी करना चाहते हो ?
इनकी भाषा किसी गुंडे से कम नहीं थी?
इनका लेहजा सड़क छाप जैसा था ? और कार्य 420 जैसे हैं? टपोरी जैसे है?
अब बिलासपुर सिंधी समाज के लोगों को जागना होगा और इस तानाशाही का विरोध करना होगा? लोकतंत्र को बचाना है सबको मतदान करने का अधिकार दिलाना है?
तो अब आगे आना होगा नहीं तो जैसे अभी आप गुलामी कर रहे हो?
कल आपकी आने वाली संतान भी गुलामी करती रहेगी?
फैसला आपके हाथ हम सदा हैं धर्म के साथ सच के साथ समाज के साथ
संपादकीय