जबलपुर - सशक्त हस्ताक्षर की 44 वीं मासिक काव्य गोष्ठी भंवरताल गार्डन में,प्रकृति की प्राकृतिक सुषमा में सानंद सम्पन्न हुई ၊ सबसे पहले संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने सभी अतिथियों,कवियों-कवयित्रियों का अपनी वाणी से अभिनंदन किया ၊ सरस्वती वंदना प्रसिद्ध कवयित्री तरुणा खरे ने की ၊ कार्यक्रम के मुख्यअतिथि महामहोपाध्याय आचार्य डॉ. हरिशंकर दुबे,कार्यक्रम की अध्यक्षता दीनदयाल तिवारी बेताल,विशिष्ट अतिथि संध्या जैन श्रुति,अरुण शुक्ल,प्रभा बच्चन श्रीवास्तव, सारस्वत अतिथि राजेश पाठक प्रवीण,मंगल भाव आशुतोष तिवारी,राजकुमारी राज रैकवार की गरिमामय उपस्थिति रही ၊ अशोक सुहाने,डॉ. विनोद श्रीवास्तव, विजेन्द्र श्रीवास्तव,बच्चन श्रीवास्तव,चंद्रकांत जैन,स्वागत-अभिनंदन में सहभागी रहे ၊ गोष्ठी की शुरुआत कवयित्री शिवानी भगत ने की उनकी रचना बिछोह में के दर्द में डूबी हुई थी ၊ वंदना विनम्र ने समा बांध दिया ၊ अर्चना द्विवेदी गुदालू ने शानदार मनहरण छंद पढ़ा ၊ राजकुमारी राज ने हिंदी की श्रेष्ठता सिद्ध की ၊ प्रभा बच्चन ने उत्तम गज़ल पढ़ के सबका मन मोह लिया ၊ प्रीति नामदेव भूमिजा ने लोकशैली में पर्यावरण पर गेयता के साथ लोक गीत प्रस्तुत किया ၊ तरुणा खरे की प्रस्तुति बहुत अच्छी रही ၊अमरसिंह वर्मा,जी. एल. जैन,लखन लाल रजक मंच को अनवरत ऊँचाईयाँ देते रहे ၊ कालीदास ताम्रकार काली ने महानगरीय समस्याओं पर आधारित रचना पढ़ चेतावनी दी ၊ नवोदित कवयित्री संध्या द्विवेदी की प्रस्तुति ने सभी को प्रभावित किया ၊ भेड़ाघाट से पधारे कुंजी लाल चक्रवर्ती निर्झर ने लडुआ कैसे बने व संक्राति पर मेला जो हमारी धर्म,संस्कृति व खगोलीय घटना से जुड़ा है का सजीव चित्रण किया ၊ मदन श्रीवास्तव,संदीप खरे युवराज की प्रस्तुतियाँ भी उत्तम रही ၊ श्रीमती कमलादेवी ने भक्ति व दर्शन से भरा भजन प्रस्तुत कर खूब तालियाँ बटोरी ၊ मंचस्थ अतिथियों ने भी अपनी रचनाओं से गोष्ठी को परम ऊँचाईयों पर पहुँचाया ၊ संचालन गणेश श्रीवास्तव प्यासा व आभार प्रदर्शन गुलजारी जैन ने किया ၊