सतना :- मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा सतना के नवनिर्मित इंटर स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) का भव्य लोकार्पण किए जाने के एक महीने बाद भी स्थिति ‘जस की तस’ बनी हुई है। प्रशासन अब तक पुराने बस स्टैंड से बसों को नए टर्मिनल पर शिफ्ट करने में नाकाम रहा है, जिससे शहरवासियों को जाम की समस्या से मुक्ति नहीं मिल पा रही है।
लोकार्पण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट मंशा जाहिर की थी कि ISBT के शुरू होने से शहर को वर्षों पुरानी यातायात समस्याओं और प्रदूषण से निजात मिलेगी। लेकिन लोकार्पण के 30 दिन बीत जाने के बाद भी शहर के भीतर बसों की ‘धमाचौकड़ी’ जारी है।
सतना में प्रशासन की ढुलमुल कार्यप्रणाली के कारण मुख्यमंत्री की घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं।
चंद ऑपरेटरों के आगे बेबस प्रशासन
शहर की चरमराई यातायात व्यवस्था के पीछे मुख्य कारण चंद रसूखदार बस ऑपरेटरों की जिद और मनमानी बताई जा रही है। इन ऑपरेटरों के दबाव के आगे जिला प्रशासन नतमस्तक नजर आ रहा है। इनकी हठधर्मिता के कारण न तो बसें नए टर्मिनल पर शिफ्ट हो पा रही हैं और न ही शहर के ट्रैफिक प्लान को लागू किया जा पा रहा है।
जनता पर दोहरी मार
प्रशासनिक विफलता का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है:
यातायात जाम: पुराने बस स्टैंड और व्यस्त इलाकों में बसों के कारण घंटों जाम लगा रहता है।
आर्थिक नुकसान: व्यवस्थित संचालन न होने के कारण यात्रियों को निजी वाहनों और ऑटो पर अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
असुविधा: आधुनिक सुविधाओं से लैस ISBT होने के बावजूद यात्रियों को धूल और भीड़भाड़ वाले पुराने स्टैंड पर बस का इंतजार करना पड़ता है।
सतना की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिर प्रशासन कब तक इन मुट्ठी भर बस ऑपरेटरों के आगे घुटने टेके रहेगा?
क्या मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन कराने के लिए प्रशासन कोई ठोस कदम उठाएगा या शहर की जनता यूं ही जाम और अव्यवस्था के बीच पिसती रहेगी?