इन्हीं भावनात्मक पंक्तियों के साथ ब्रह्माकुमारीज बिलासपुर की क्षेत्रीय संचालिका श्रद्धेय ब्रह्माकुमारी गीता दीदी की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज हेमूनगर द्वारा एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमार-ब्रह्माकुमारियाँ एवं नगरवासी उपस्थित रहे।
सभा के दौरान गीता दीदी के दिव्य व्यक्तित्व, उनकी शिक्षाओं और उनकी पालनाओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए याद किया गया। उनका जीवन त्याग, तपस्या और समर्पण की सजीव मिसाल था। वे अक्सर कहा करती थीं— “चाहे इंसान को कोई भी फल खाने को मिले या न मिले, लेकिन कर्म का फल अवश्य खाना पड़ता है।” उनके इस संदेश ने अनगिनत लोगों को सच्चाई और जिम्मेदारी के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी हेमु नगर सेवा केंद्र की संचालिका बीके लता दीदी ने कहा कि गीता दीदी ने बिलासपुर क्षेत्र सहित पूरे छत्तीसगढ़ में ईश्वरीय सेवाओं के विस्तार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका स्वभाव अत्यंत मिलनसार, नम्र और करुणामय था। उन्होंने हर आत्मा को प्रेम, धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति से जोड़ा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी गढ़मान्य भाई-बहनों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए संकल्प लिया कि वे उनके बताए मार्ग पर चलते हुए ईश्वरीय सेवाओं को आगे बढ़ाते रहेंगे। आज भी उन्हें स्मरण करते ही हृदय कृतज्ञता और गर्व से भर उठता है कि हमें ऐसी महान विभूति का सान्निध्य और पालना प्राप्त हुई।