हमर संगवारी ने अपने कर्तव्य का पालन किया, विजय दुसेजा ने पत्रकारिता का धर्म निभाया
बिलासपुर :- आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां अधिकतर लोग केवल अपने स्वार्थ और लाभ के लिए कार्य कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों की खुशी में अपनी खुशी ढूंढते हैं। यही लोग समाज में मानवता और विश्वास की मिसाल कायम करते हैं।
ऐसी ही एक प्रेरणादायक घटना 6 अप्रैल, सोमवार की रात लगभग 8:30 बजे की है। हमर संगवारी के संपादक विजय दुसेजा और गोविंद दुसेजा किसी कार्य से कश्यप कॉलोनी गए हुए थे। वापसी के दौरान झूलेलाल धाम सिंधी गुरुद्वारा के पास सड़क पर उन्हें एक महंगा मोबाइल फोन गिरा हुआ मिला। आसपास काफी तलाश करने के बावजूद जब कोई नहीं मिला, तो उन्होंने उसे सुरक्षित अपने पास रख लिया।
कुछ ही देर बाद मोबाइल पर कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने बताया कि यह मोबाइल उनका है। विजय दुसेजा ने बिना देर किए उन्हें अपने जूना बिलासपुर स्थित निवास पर आने का पता दे दिया और मोबाइल लेने के लिए आमंत्रित किया।

थोड़ी ही देर में एक बड़े उम्र के व्यक्ति अपने परिवार के साथ वहां पहुंचे। पुष्टि के लिए उनसे मोबाइल का लॉक खुलवाया गया, जिसे उन्होंने सही तरीके से खोलकर दिखाया। इससे यह सुनिश्चित हो गया कि मोबाइल वास्तव में उन्हीं का है। उस व्यक्ति ने अपना नाम कमलेश ठाकुर बताया।
मोबाइल वापस मिलने पर कमलेश ठाकुर भावुक हो उठे। उन्होंने बताया कि मोबाइल में उनके महत्वपूर्ण दस्तावेज और पेटीएम खाते में लगभग 78 हजार रुपये भी थे। उन्होंने कहा कि अगर मोबाइल गलत हाथों में चला जाता, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता। उन्होंने विजय दुसेजा ,अनील शुक्ला और उनकी टीम का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा—
“आज भी ईमानदारी और सच्चे लोग जिंदा हैं, तभी दुनिया चल रही है।”
आभार स्वरूप उन्होंने कुछ पैसे देने की कोशिश की, लेकिन विजय दुसेजा ने विनम्रता से मना करते हुए कहा कि उन्हें केवल आशीर्वाद की आवश्यकता है। काफी आग्रह के बाद प्रतीकात्मक रूप में उन्होंने थोड़ी राशि स्वीकार की,और कमलेश ठाकुर के हाथों से अपने बच्चे गोविंद को आशीर्वाद के रूप दिया।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सच्चाई और ईमानदारी आज भी समाज में जीवित है। विजय दुसेजा ने बताया कि यह उनके परिवार और संस्कारों का परिणाम है, जहां उन्हें सत्य, धर्म और ईमानदारी के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारिता केवल खबर देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक माध्यम है। हमर संगवारी केवल एक अखबार नहीं, बल्कि आम जनता की आवाज और सेवा का प्रतीक है।
यह घटना समाज के लिए एक संदेश है कि यदि हम सच्चाई और ईमानदारी के रास्ते पर चलते हैं, तो उसका सकारात्मक प्रभाव न केवल हम पर बल्कि आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है।
