बिलासपुर: टिकरापारा स्थित ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेंद्र में स्वर्गीय सुशील भाई जी की पावन स्मृति में सात दिवसीय ‘गीता ज्ञान यज्ञ’ का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता बीके शशिप्रभा दीदी ने गीता के आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर करते हुए बताया कि गीता मात्र एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने का ईश्वरीय मार्गदर्शन है।
सत्र के आरंभ में दिवंगत सुशील भाई सगदेव को याद करते हुए शशिप्रभा दीदी ने उन्हें एक हर्षितमुख, कर्मठ और सेवाभावी व्यक्तित्व बताया,। दीदी ने साझा किया कि वे आरएसएस (RSS) के सक्रिय सदस्य रहे और कोरोना काल के संकटपूर्ण समय में उन्होंने निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा की। विशेष रूप से, उनके परिवार द्वारा लिए गए ‘देह दान’ के साहसी निर्णय की सराहना करते हुए दीदी ने इसे मानवता के लिए एक महान उदाहरण और पुण्य कार्य बताया।
गीता: महाभारत की आत्मा और पंचम वेद
दीदी ने गीता की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता ‘सर्व शास्त्र शिरोमणि’ है और इसे ‘महाभारत की आत्मा’ माना जाता है,। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि महाभारत से गीता के ज्ञान को निकाल दिया जाए, तो वह शरीर से आत्मा के निकल जाने के समान होगा। इसे ‘पंचम वेद’ की संज्ञा दी गई है क्योंकि इसमें चारों वेदों और उपनिषदों का सार समाहित है,।
जीवन सुधारने और जीने का मार्ग
प्रवचन के दौरान दीदी ने जोर दिया कि गीता केवल लाल या पीले कपड़े में लपेटकर पूजा घर में रखने की वस्तु नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला और मृत्यु के पश्चात की यात्रा को सफल बनाने का विज्ञान है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शरीर की शुद्धि के लिए जल का स्नान आवश्यक है, उसी प्रकार मन की मलीनता को धोने के लिए ज्ञान का अमृतपान अनिवार्य है। दीदी ने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे जीवन के शुरुआती दौर में ही इस ज्ञान को अपनाएं, ताकि वे एक सफल और दिशा-युक्त जीवन जी सकें।
जन-जन की सेवा का संकल्प
दीदी ने उपस्थित भाई-बहनों से अपील की कि वे आगामी छह दिनों तक चलने वाले इस सत्र में नए लोगों को भी आमंत्रित करें ताकि अधिक से अधिक आत्माएं इस आध्यात्मिक ‘जूस’ (सरल ईश्वरीय ज्ञान) का लाभ उठा सकें।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने एकाग्र होकर योग के माध्यम से दिवंगत आत्मा की शांति और उनकी अगली सुखद यात्रा के लिए ईश्वरीय याद अर्पित कीं।
