जैसे ही हाजरा हुज़ूर सांईं साधराम साहेब के ब्रह्मलीन होने की जानकारी मिली सिंध और हिंद सहित पूरे विश्व का सिंधी समाज शोक में डूब गया *विश्ववंदनीय, परम पूज्य, श्रद्धेय संत शिरोमणि, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र, मानवता एवं प्रेम के दिव्य प्रतीक हजूरी रूप पूज्य सांईं साधराम साहेब जी मंगलवार 19 मई 2026 को सिंगापुर में ब्रह्ममुहूर्त के पावन समय अपने नश्वर शरीर का त्याग कर परमात्मा स्वरूप में विलीन होकर ब्रह्मलीन हो गए*
संत साईं साधराम साहब सिंध और हिंद के सिंधी हिंदू समाज के सरताज थे। वे सांईं सतराम साहब के सातवें गद्दीनशीं थे। उन्होने विश्वभर में सनातन का झंडा लहराया
तेईस मई 2026 शनिवार को पुरे विश्व में सिंधु समाज के द्वारा शाम 5 बजे से 6 बजे तक स्मृति सभा आयोजित कर दुखी मन से श्रद्धा सुमन अर्पित किया
रीवा में भी संत आसूदाराम सत्संग भवन कवंर नगर में,एस एस डी मंडल रीवा,संत बाबा आसूदाराम सेवा समिति रीवा, सिंधु समाज द्वारा पुज्य हाजरा हुज़ूर संत सांई साधराम साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की गई

श्रद्धांजलि सभा में हाजरा हुज़ूर संत साधराम साहब जी की अमृतवाणी सत्संग उनकी स्मृतियां संगत द्वारा श्रवण की गई साथ ही धुनी साहब का मंगल गायन किया गया
श्रद्धांजलि सभा में श्री सचखंड धाम आश्रम के मंहत स्वामी कमल दास उदासी जी ने बताया कि सिंध यात्रा के दौरान रहड़की साहब स्थान पर जाकर सांई साधराम जी के दर्शन करने का सौभाग्य मिला था, उनसे प्राप्त स्नेह आज भी हदय में अंकित है
अखिल भारतीय सिंधु संत समाज ट्रस्ट की तरफ से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी हंसदास उदासी जी ने कहा कि पूज्य साईं साधराम साहेब जी ने अपना संपूर्ण जीवन अध्यात्म, मानव सेवा, प्रेम, करुणा, सद्भाव एवं समाज कल्याण के लिए समर्पित किया। उनकी अमृतमयी वाणी, दिव्य उपदेश एवं पावन आशीर्वाद ने विश्वभर में लाखों-करोड़ों लोगों के जीवन को आध्यात्मिक प्रकाश से आलोकित किया।
स्वामी सरूपदास जी उदासी जी ने कहा उन्होंने सदैव मानवता, भाईचारे, सेवा एवं सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनके सान्निध्य में असंख्य श्रद्धालुओं ने आत्मिक शांति, नई दिशा एवं जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त किया।
स्वामी कृपालदास जिज्ञासी जी ने कहा आज उनका दिव्य स्वरूप भले ही हमारी आँखों से ओझल हो गया हो, किंतु उनके द्वारा दिया गया प्रेम, सेवा एवं अध्यात्म का संदेश युगों-युगों तक श्रद्धालुओं के हृदयों में प्रकाश बनकर जीवित रहेगा।
पुज्य सिंधी सेन्ट्रल पंचायत रीवा के अध्यक्ष श्री प्रहलाद सिंह जी ने कहा यह केवल एक संत का महाप्रयाण नहीं, बल्कि एक युग का विराम है।
*आज एक युगपुरुष पुनः उसी परम चेतना में विलीन हो गए, जिसका दिव्य प्रकाश वे जीवनभर संसार में फैलाते रहे। उनका जाना *मानवता और सनातन परम्परा को अपूरणीय क्षति है।*
परम पूज्य संत शिरोमणि साई साधराम साहेब की पावन स्मृति में
पावन स्मृति सभा में सांई जी के कृपा पात्र शिष्य कन्हैयालाल घंशाणी जी सांई साधराम साहब जी से मिले प्यार आशीर्वाद की स्मृतियां सुनाते ही भाव विभोर हो गये
आज देश के अधिकांश शहरों में विदेश में जहां-जहां सिंधी समाज रहता है वहां साई साधराम साहेब
के ब्रह्मलीन हो जाने पर परमात्मा में लीन हो जाने पर पावन स्मृति सभा
का आयोजन आयोजित किया गया जिसका संचालन पुज्य सिंधी सेन्ट्रल पंचायत रीवा के पुर्व महासचिव राजकुमार टिलवानी ने किया
बाबा आसूदाराम धाम रीवा में आयोजित की गई पावन स्मृति सभा, श्रद्धांजलि सभा में सिंधु समाज की श्रद्धालु भाईयों एंव बहनों ने सम्मिलित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की जिनमें वरिष्ठ प्रहलाद सिंह,संतूलाल आहूजा, नंदलाल कोटवानी,घनश्याम काकवानी,रमेश कुंजवानी, कैलाश कोटवानी,शंकर साहनी,कन्हैयालाल मंगलानी, राजकुमार टिलवानी,गोपाल पुरी,कन्हैयालाल घंशाणी,सुदामालाल तलरेजा,अशोक रोहड़ा,सुरेश मिहानी,गुलाब नागपाल,नानक राम पंजवानी, पप्पू मोटवानी,संदीप तलरेजा,ईशान घंशाणी,विजय रिझवानी,महेश ठारवानी, प्रकाश तारानी,अजय माधवानी,मुकेश हिरवानी, श्रीचंद रोहड़ा,सुन्दरदास,महेश आसनानी,राजू चेलानी, राजकुमार मोटवानी,अनेक श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया
