🚩“अक्षय” अर्थात इस दिन किया गया सुकृत पुण्य कर्म का क्षय नहीं होता। अक्षय तृतीया का पर्व बसंत और ग्रीष्म के संधिकाल का महोत्सव है। सिन्धी समाज में अक्षय तृतीया को ‘अखंडी’ कहा जाता है। यह वैशाख माह में मनाया जाता है।
अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किन्तु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है।
अक्षय रहे भाग्य सभी का
बढ़ता जाए सौभाग्य
प्रभु कृपा में तन लीन रहे
और पाएं खुशियों का उपहार।
सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ है। जिसमें भगवान श्री राम का प्राकट्य़ है। भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनाथ के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते हैं। वृन्दावन स्थित श्री बाँके बिहारी जी मन्दिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं, अन्यथा वे पूरे वर्ष वस्त्रों से ढकें रहते हैं। अक्षय तृतीया के दिन ही संपूर्ण श्री वृंदावन में भगवान की चंदन यात्रा शुरु होती है। श्री बिहारी जी के दिव्य मंगलमय चरण दर्शन का सौभाग्य बनता है। इसी दिन भगवान श्री परशुराम जी का प्राकट्य़ है। इसी दिन परम्बा भगवती गंगा इस धरती के ऊपर प्रकट हुई है। श्री सुदामा जी का श्री कृष्ण से मिलन हुआ है। पांडवों को अक्षय पात्र भगवान श्री सूर्य ने कृपा करके प्रदान किया। इसलिए उसका नाम अक्षय पात्र है। भगवान जगन्नाथ के रथ का निर्माण प्रारंभ होता है। वेदव्यास भगवान के द्वारा श्री महाभारत जी का लेखन प्रारंभ हुआ है। श्री मदनमोहन जी, श्री गोविंद देव जी और श्री गोपीनाथ जी यह वृंदावन के जो तीन वज्रनाभ जी के द्वारा स्थापित दिव्य मंगलमय विग्रह है, इनके सबसे विशेष दर्शन और वज्रनाभ जी के बाद में पुनः स्थापन की दिव्य मंगल भूमिका इसी दिन बनी है।
अक्षय तृतीया आयी है,
संग अपने खुशियां लायी है,
हमने सुख-समृद्धि पायी है,
चारों ओर प्रेम की बाहर छायी है।
🌾 बैसाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, जिसे अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है, यह दिन बहुत शुभ और फलदायी दिन माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन किए गए दान, जप, तप और अन्य शुभ कामों का दोगुना फल मिलता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी यह तिथि विशेष महत्व रखती है।
दिल का दरवाजा खोल दो,
जो मन में है बोल दो,
अक्षय तृतीया की खुशियों में,
प्रेम का शहद घोल दो।
अक्षय तृतीया की महिमा वसंत और ग्रीष्म की संधि का काल, इसी दिन गंगा का अवतरण हुआ, इसी दिन सुदामा और श्री कृष्ण का मिलन हुआ, इसी दिन जगन्नाथ पुरी में रथ बनना प्रारंभ हुआ, इसी दिन परशुराम जी का आविर्भाव हुआ, इसी दिन द्रौपदी को अक्षय पात्र प्राप्त हुआ सूर्यदेव से, इसी दिन भगवान नरनारायणी का जन्म हुआ, इसी दिन चारधाम के द्वार खुलते है, आज़ से चंदन यात्रा प्रारंभ होती है, भगवान का हयग्रीव नामक अवतार हुआ, आज़ से सतयुग का प्रारंभ हुआ।
🔱 अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना विशेष रुप से शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के छठवें अवतार परशुराम जी का भी जन्म हुआ था, इसलिए उनकी पूजा भी की जाती है। कुछ लोग इस दिन धन के देवता कुबेर और भगवान गणेश की भी पूजा करते हैं। कुबेर और भगवान गणेश की पूजा करने से धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया का दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए उत्तम माना जाता है, जैसे कि नए घर का निर्माण, व्यापार की शुरुआत, आदि। अक्षय तृतीया पर दान और खरीदारी करना भी बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन सोना, चांदी, वस्त्र, अनाज और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना चाहिए।
न माधव समो मासो न कृतेन युगं समम्।
न च वेद समं शास्त्रं न तीर्थ गंगयां समम्।।
वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं हैं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। उसी तरह अक्षय तृतीया के समान कोई तिथि नहीं है।
दुनिया में क्षय होता सबका,
अक्षय केवल भगवान ,
रहे सुख शांति वर्षभर,
ऐसा मांगो वरदान l
कृष्णस्तु भगवान् स्वयम्
हमारी धरती धन-धान्य से सदैव अक्षय (भरी) रहे, अक्षय तृतीया का पर्व इन्हीं महत्व को उजागर करता है, छत्तीसगढ़ में अक्ती त्यौहार पर अच्छी फसल के लिए धरती माता, बैल, खेती-बाड़ी के औजार और बीजों की पूजा अर्चना कर खेती किसानी की शुरुआत होती है, जीवन में किसी भी क्षय को रोकने और समृद्धि प्रदान करने वाले पर्व अक्षय तृतीया की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
भगवान श्री हरि विष्णु आप सबके जीवन में आरोग्य, सुख-समृद्धि, संपन्नता एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।
संकलन एवं साभार प्रस्तुति:-
इन्दू गोधवानी संत कंवरराम नगर, कटोरा-तालाब, रायपुर, 9425514255..✍️
