बिलासपुर उसलापुर, ब्रह्माकुमारीज:
प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज, ओम शांति सरोवर, उसलापुर के प्रांगण में चल रहे “बाल व्यक्तित्व विकास शिविर” (समर कैंप) में बच्चों के लिए ताइक्वांडो का विशेष सत्र रखा गया हैं, जिसमे बच्चों को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बच्चों ने (ताइक्वांडो कोच) भ्राता गणेश सागर की देखरेख मे बच्चों ने ताइक्वांडो के बेसिक एक्सरसाइज़ के साथ-साथ सेल्फ डिफेंस के महत्वपूर्ण स्टेप्स सिखे। खुद को बचाने के लिए पंच और किक मारने की तकनीकें सिखाई गईं, जिससे बच्चों के अंदर आत्मविश्वास और जोश बढ़ा। बच्चों ने इस सत्र का भरपूर आनंद लिया और सुरक्षा के महत्व को समझा।



सेवाकेन्द्र की निर्देशिका बीके छाया दीदी ने ‘दिल की बात’ विषय पर बच्चों को समझाते हुए कहा कि हमें अपने मन की या दिल की बातें माता-पिता व अपनो से ही करनी चाहिए है, वो हमें सही गाइड करते है। पर कई बार वो साथ में नहीं है या हम सारी बात नहीं बोल पाते या वो हमारी नहीं सुन पाते है। तो ऐसे में परमपिता भगवान से हमे अपने दिल की बात हमेशा करनी चाहिए। जो सदा हमें साथ देते है। भगवान जो हमारे सच्चे मित्र हैं, उनसे दिल की बात करने से उनका प्यार मिलता और हमे उनकी मदद और गाइडेंस मिलती है। वो हमें बुराई से बचाते है। उनसे बात करने से हमारा दिल साफ होता है। हमारी समस्याएँ हल हो जाती हैं। उनसे हमें गहरी शांति और शक्ति भी मिलती है। हम हल्के हो जाते हैं। दीदी ने बच्चों को भगवान को पत्र रोज लिखने की सलाह दी और तरीका समझाया कि हम रोज सोने से पहले खाश जो आज अच्छा बुरा किया या हुआ उसे भगवान को लिख कर देने से हमारा दिमाग साफ होता और आगे के लिए हम स्वयं को बदलने की हिम्मत करते और उनकी मदद के पात्र बनते है। समर कैम्प के दौरान, बच्चों ने भगवान को एक पत्र लिखा और फिर दीदी ने उन्हें मेडिटेशन भी करवाया, जिससे सभी बच्चों ने गहरी शांति और परमात्मा प्यार का अनुभव किया।
बीके हेमा बहन ने बच्चों को कॉमन सेंस के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने समझाया कि कॉमन सेंस का मतलब है कोई भी कार्य को सोच समझ करना फिर व्यवहार में आना ही कॉमन सेंस हैं। उदाहरण के तौर पर, खाना खाते समय शिष्टाचार बनाए रखना और बड़ों के सामने आवाज से बातें नहीं करना,अपने सामान को सही जगह व्यवस्थित रखना।
इसके साथ ही, उन्होंने बच्चों को यह भी सिखाया कि कम बोलना चाहिए ताकि कोई नाराज़ न हो, धीरे बोलना चाहिए ताकि कोई डरे नहीं, और मीठा बोलना चाहिए ताकि सब आपको पसंद करें। उन्होंने समझाया कि हमारी वाणी ऐसी होनी चाहिए जो वीणा की तरह मधुर हो, ताकि सुनने वालों को सुख मिले। इसलिए हमें हमेशा मधुर और शिष्ट भाषा का प्रयोग करना चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना से हुई बीके शिवानी बहन ने सभी बच्चों को हे शारदे मां… एवं जैसा सोचेंगे वैसा बन जाएंगे… गीत सिखाया और बीके गरिमा बहन ने बच्चों को एरोबिक डांस कराया और अनामिका बहन ने बच्चों को ड्राइंग पेंटिंग सिखाई। कार्यक्रम के अंत में सेवाकेंद्र के (फल) पके आम सभी बच्चों को दिया गया।
ईश्वरीय सेवा में
बी के छाया बहन
