माँँ की गोद एक शरण स्थान है,जहां हमें सुकून मिलता है सभी दुखों का इलाज होता है
मातृ देवो भवः माँ का प्रेम ऐसा अमृत है, जिसमें केवल त्याग, ममता,करुणा,संरक्षण और आशीर्वाद होता है- माँ के सम्मान में सर्वस्व समर्पण कर दें -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
गोंदिया – वैश्विक स्तरपर मानव सभ्यता के आरंभ से लेकरआज के आधुनिक वैज्ञानिक युग तक यदि किसी रिश्ते को सबसे
अधिक पवित्र,निस्वार्थ,अद्वितीय और ईश्वर तुल्य माना गया है,तो वह रिश्ता माँ और संतान का है।पृथ्वी पर विद्यमान करोड़ों जीवों और अनगिनत प्रजातियों में यदि कोई भावना सबसे अधिक स्वाभाविक, गहरी और आत्मिक है, तो वह मातृत्व है। एक माँ केवल जन्म देने वाली स्त्री नहीं होती, बल्कि वह वह शक्ति होती है जो अपने बच्चे के लिए स्वयं को पूर्णतः समर्पित कर देती है। संसार का हर रिश्ता किसी न किसी अपेक्षा पर आधारित हो सकता है, किंतु माँ का प्रेम ऐसा अमृत है जिसमें केवल त्याग, ममता,करुणा,संरक्षण और आशीर्वाद होता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में माँ को भगवान से भी ऊपर स्थान दिया गया है और कहा गया “मातृ देवो भवः” अर्थात् माँ देवता के समान है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र मैं अगर अपनी ब्रह्मलीन माँँ के साथ में अपनी सच्चाई बताऊं तो 20 नवंबर 2020, धनतेरस के दिन से मैं अपनी मां के प्यार से वंचित हो गया हूं क्योंकि इसी दिन मेरी आंखों के सामने मेरी माँ को साइलेंट अटैक आया था और मेरे नजरों के सामने, मेरे से बात करते हुए, मैन दुनियां से ओझल होते हुए अपनी आंखों से देखा था वह पल मैं जिंदगी में कभी नहीं भूल पाऊंगा और हमेशा सोचता हूं, चिट्ठी ना कोई संदेश ना जाने कौनसा देश जहां तुम चले गए, आज मैं कहता हूं कि माँँ दिवस 10 मई 2026 क़ो हे माँँ ! तुम्हारे साथ माँँ दिवस मनाना है, आओ इस लोक में या बुला लो परलोक में, इसीलिए ही कहता हूं जिनके पास माँँ है वह जीवन में भाग्यशाली जीव है।जब कोई व्यक्ति अपने बचपन की स्मृतियों में लौटता है, तो उसे सबसे पहले माँ की गोद, उसकी थपकी, उसकी लोरी और उसका स्नेह याद आता है। बचपन में गिरने पर जो हाथ सबसे पहले सहारा देता है, वह माँ का होता है। भूख लगने से पहले जो चिंता करती है,वह माँ होती है। बच्चे की आंखों के आंसू देखकर जिसका हृदय कांप उठता है, वह माँ होती है। यही कारण है कि संसार का हर व्यक्ति अपने जीवन में चाहे जितनी भी ऊँचाइयाँ प्राप्त कर ले, लेकिन उसकी आत्मा के सबसे कोमल हिस्से में उसकी माँ बसती है। जिस व्यक्ति के जीवन में माँ का साया मौजूद है, वास्तव में वह इस पृथ्वी का सबसे भाग्यशाली व्यक्ति है, क्योंकि माँ की उपस्थिति केवल एक संबंध नहीं बल्कि ईश्वर की जीवंत व सटीक अनुभूति होती है।
साथियों बात अगर हम मां के गहरे असीम प्यार को हम करीबी से महसूस कर सकते हैं इसको प्रैक्टिकल देखने की करें तो जिनके घर में छोटे दूध मुहें बच्चे हैं, तो हम देखेंगे की उस मां का अपने बच्चों पर कितना केयर रहता है।अपना पूरा समय वह बच्चों केलालन पोषण में लगा देती है, क्योंकि वह मां बच्चे के रोनें या नहीं सोने पर सारी रात आंखों में कांटे डालकर जैसे तैसे बिता देता है। यह मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि हमारे घर में अभी दो छोटे बच्चे हैं, कुमार और रूहान जिनकी परवरिश उनकी माएं कर रही है, तो एक मां और एक बच्चे की परवरिश की गहराई का एहसास मुझे होता है। मेरा मानना है कि जो मानवीय जीव अपनी मां का अपमान करते हैं उसे दुख देते हैं, घर से निकाल देते हैं या माँँ की शान में कोई कृत्य करते हैं, तो उनसे बड़ा पापी इस पृथ्वी पर कोई नहीं है उनसे बड़ा कोई दुराचारी नहीं है, उनको इस योनि में उनके इस कृत्य का हज़ार गुणा फल जरुर मिलेगा ऐसा मेरा विश्वास है। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति ने अपनी मां का सम्मान करते हुए मां दिवस 10 मई 2026 को पूरा दिन मां के साथ बिताना चाहिए,उसकी छत्रछाया में उसके चरणों में बैठकर उनसे वार्तालाप करना, खेलना हंसमुख मजाक कर उन्हें खुशी देना चाहिए,फिर बस माँँ को और क्या चाहिए।अगर उसकी औलाद उनकोखुशियां देती है तो मां के मुख से ऐसी दुआएं निकलती है जो उन बच्चों का यह लोक तो क्या परलोक भी सवेरा हो जाता है। अपने बारे में मुझे ऐसा पूरा विश्वास है कि 10 मई 2026 को अदृश्य रूप से ही सही मेरी मां जरूर आएगी, क्योंकि मैंने मन से कह दिया है माँँ तुम्हारे साथ मैं माँँ दिवस मनाना चाहता हूं आ जाओ इस लोक में या फिर बुला लो परलोक में। चूंकि मां की गोद एक शरण स्थान है, जहां हमें सुकून मिलता है, सभी दुखों का इलाज होता है, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे माँँ धरती पर भगवान का रूप होती है माँँ का स्थान हमारे जीवन में अद्वितीय होता है।साथियों बात अगर हम माँ के प्रेम की महानता को समझने की करें तो उसके लिए केवल मनुष्य समाज को देखना पर्याप्त नहीं है। यदि हम प्रकृति और जीव -जंतुओं के संसार का अवलोकन करें तो पाएंगे कि मातृत्व हर जीव की मूल प्रवृत्ति है। गाय अपने बछड़े के लिए चिंतित रहती है, पक्षी अपने बच्चों को पंखों के नीचे छिपाकर सुरक्षा देते हैं, बिल्ली अपने बच्चों को मुंह में उठाकर सुरक्षित स्थान तक ले जाती है और एक कुतिया अपने पिल्लों की रक्षा के लिए किसी भी खतरे से भिड़ जाती है। यदि कोई व्यक्ति किसी पशु के बच्चे को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करे, तो उसकी माँ तुरंत आक्रमण कर देती है। यह केवल स्वभाव नहीं, बल्कि प्रकृति द्वारा दिया गया वह दिव्य भाव है जिसे मातृत्व कहा जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि माँ का प्रेम केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि समस्त सृष्टि में व्याप्त है।मानव जीवन में माँ का महत्व इसलिए भी सबसे अधिक है क्योंकि वह अपने बच्चे के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर देती है। एक माँ अपने बच्चे को नौ महीने तक अपने गर्भ में रखती है, असहनीय पीड़ा सहकर उसे जन्म देती है और उसके बाद अपना हर सुख त्यागकर उसकी परवरिश करती है। बच्चे की एक मुस्कान उसके सारे दुःख भुला देती है। बच्चा रातभर रोता रहे तो माँ अपनी नींद भूल जाती है। वह स्वयं भूखी रह सकती है, लेकिन अपने बच्चे को भूखा नहीं देख सकती। यही त्याग मातृत्व को ईश्वर के सबसे निकट ले जाता है।

साथियों आज की आधुनिक दुनिया में जहां भौतिकता और स्वार्थ बढ़ता जा रहा है, वहाँ माँ का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस दौर में भी कोई मशीन माँ का स्थान नहीं ले सकती। दुनिया का सबसे महंगा उपहार भी माँ की गोद जैसी शांति नहीं दे सकता। एक माँ अपने बच्चों के लिए केवल पालनकर्ता नहीं होती, बल्कि वह उनकी पहली गुरु, पहली चिकित्सक, पहली मित्र और पहली मार्गदर्शक होती है। बच्चे के चरित्र निर्माण में माँ की सबसे बड़ी भूमिका होती है। वह अपने संस्कारों से समाज और राष्ट्र का भविष्य तैयार करती है।
साथियों समाज में जब कभी नैतिक मूल्यों के पतन की चर्चा होती है, तो उसका एक बड़ा कारण परिवारों में मातृत्व और पारिवारिक संस्कारों का सटीक कमजोर होना भी माना जाता है। जिस समाज में माँ का सम्मान होता है, वह समाज उन्नत और संस्कारित होता है। लेकिन दुर्भाग्य से आधुनिक समय में कई स्थानों पर वृद्ध माताओं के साथ दुर्व्यवहार, उपेक्षा और अपमान की घटनाएँ भी सामने आती हैं। कुछ लोग अपनी ही माँ को बोझ समझने लगते हैं, उन्हें वृद्धाश्रम भेज देते हैं या मानसिक पीड़ा देते हैं। यह केवल सामाजिक पतन नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं का सबसे बड़ा अपराध है। जो व्यक्ति अपनी माँ का सम्मान नहीं कर सकता, वह वास्तव में किसी भी रिश्ते का सम्मान नहीं कर सकता। भारतीय संस्कृति सदैव यह संदेश देती रही है कि माँ के चरणों में स्वर्ग बसता है। माँ की सेवा केवल कर्तव्य नहीं बल्कि जीवन का सबसे बड़ा पुण्य है।
साथियों माँ के आशीर्वाद की शक्ति को दुनिया की हर संस्कृति ने स्वीकार किया है। भारत में माँ दुर्गा, माँ सरस्वती और माँ लक्ष्मी के रूप में नारी शक्ति की पूजा की जाती है। ईसाई परंपरा में मदर मैरी को करुणा और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। इस्लाम में कहा गया है कि “जन्नत माँ के कदमों के नीचे है। दुनिया की लगभग हर सभ्यता और धर्म ने माँ को सर्वोच्च सम्मान दिया है। यह दर्शाता है कि मातृत्व किसी एक समाज या संस्कृति की अवधारणा नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता का साझा सत्य है।

साथियों मदर्स डे अर्थात मातृ दिवस इसी मातृत्व के सम्मान का वैश्विक प्रतीक है। हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को दुनिया के अनेक देशों में मदर्स डे मनाया जाता है। हालांकि माँ के लिए केवल एक दिन पर्याप्त नहीं हो सकता, क्योंकि माँ का महत्व वर्ष के 365 दिनों में हर क्षण बना रहता है। फिर भी यह दिन हमें अवसर देता है कि हम अपनी माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें, उनके त्याग को याद करें और उन्हें यह महसूस कराएँ कि वे हमारे जीवन में कितनी महत्वपूर्ण हैं।
साथियों मदर्स डे केवल उपहार देने का दिन नहीं है। यह दिन माँ के प्रति अपने प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता को व्यक्त करने का अवसर है। बहुत से लोग इस दिन अपनी माँ के साथ समय बिताते हैं, उन्हें भोजन पर ले जाते हैं, उपहार देते हैं या उन्हें धन्यवाद कहते हैं। लेकिन वास्तव में माँ को सबसे अधिक खुशी अपने बच्चों का प्रेम और सम्मान देखकर मिलती है। यदि कोई संतान अपनी माँ के साथ बैठकर कुछ पल हँस ले, उनसे बातें कर ले, उनका हाथ पकड़ ले और यह कह दे कि “आप मेरे जीवन की सबसे बड़ी शक्ति हैं,” तो वही माँ के लिए सबसे बड़ा उपहार होता है।
साथियों आज की व्यस्त जीवनशैली में लोग अपने परिवार के लिए समय निकालना भूलते जा रहे हैं। बच्चे करियर और सफलता की दौड़ में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि कई बार अपनी माँ की भावनाओं को समझ नहीं पाते। जबकि माँ का जीवन अपने बच्चों के इर्द-गिर्द ही घूमता है। वह वृद्ध हो जाए, कमजोर हो जाए, लेकिन उसके मन में अपने बच्चों के लिए चिंता कभी कम नहीं होती। इसलिए यह आवश्यक है कि हम केवल मदर्स डे पर ही नहीं बल्कि हर दिन अपनी माँ का सम्मान करें, उनका ख्याल रखें और उन्हें यह महसूस कराएँ कि वे अकेली नहीं हैं।
साथियों माँ का खो जाना जीवन का सबसे बड़ा दुःख होता है। जिन लोगों की माँ इस संसार में नहीं हैं, वे इस पीड़ा को गहराई से समझते हैं। माँ के जाने के बाद व्यक्ति को एहसास होता है कि उसने जीवन का सबसे बड़ा सहारा खो दिया है। माँ की आवाज, उसकी डाँट, उसकी सलाह और उसकी उपस्थिति जीवनभर स्मृतियों में जीवित रहती है। कई लोग अपनी माँ को खोने के बाद हर दिन उन्हें याद करते हैं और महसूस करते हैं कि यदि माँ होती तो जीवन कितना अलग होता। माँ भले ही भौतिक रूप से हमारे बीच न हो, लेकिन उसका प्रेम और आशीर्वाद सदैव हमारे साथ रहता है।
साथियों भारतीय परिवार व्यवस्था में माँ को परिवार की आत्मा माना जाता है। वह केवल घर संभालने वाली महिला नहीं होती बल्कि पूरे परिवार को जोड़कर रखने वाली शक्ति होती है।उसकी भावनात्मक ऊर्जा ही परिवार को एकता और प्रेम में बाँधती है। यदि घर में माँ मुस्कुराती है तो पूरा घर खुशहाल लगता है। माँ की उपस्थिति घर को केवल मकान से परिवार बनाती है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम मातृत्व का सम्मान केवल शब्दों में नहीं बल्कि व्यवहार में भी करें। हमें अपनी माँ के स्वास्थ्य, सम्मान और भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। वृद्धावस्था में उन्हें अकेला छोड़ने के बजाय उनका सहारा बनना चाहिए। बच्चों को भी बचपन से यह संस्कार दिए जाने चाहिए कि माँ का सम्मान जीवन का सबसे बड़ा व बहुमूल्य धर्म है।
साथियों माँ वास्तव में धरती पर भगवान का स्वरूप है। वह बिना किसी स्वार्थ के प्रेम करती है, बिना थके सेवा करती है और बिना शिकायत के त्याग करती है। संसार में यदि कोई व्यक्ति हमें बिना शर्त स्वीकार करता है, तो वह माँ ही होती है। इसलिए यह कहना बिल्कुल उचित है कि माँ का स्थान जीवन में अद्वितीय और अपूरणीय है। उसकी गोद में जो सुकून मिलता है, वह दुनिया की किसी दौलत में नहीं मिल सकता।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि मातृ दिवस केवल एक औपचारिक अवसर नहीं बल्कि मानवता को अपनी जड़ों और संवेदनाओं से जोड़ने वाला दिन है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि चाहे हम कितने भीआधुनिक क्यों न हो जाएँ, हमारी सबसे बड़ी शक्ति हमारी माँ का आशीर्वाद ही है। इसलिए आइए, केवल 10 मई 2026 को ही नहीं बल्कि जीवन के हर दिन अपनी माँ का सम्मान करें, उन्हें प्रेम दें और यह स्वीकार करें कि वास्तव में माँ धरती पर भगवान का सबसे सुंदर रूप है।
-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
