बिलासपुर में आयोजित पुलिस जनसुनवाई एवं शिकायत निवारण शिविर के दौरान उस समय एक गंभीर मामला सामने आया, जब एक व्यक्ति ने अपने नाम से फर्जी कथन बयान एवं कूटरचित हस्ताक्षर कर शपथ पत्र तैयार किए जाने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता कमल किशोर आंवड़े ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय बिलासपुर तथा पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय बिलासपुर रेंज को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया कि उनके नाम से फर्जी बयान तैयार कर न्यायालय एवं पुलिस जांच में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि यह न केवल उनके व्यक्तिगत अधिकारों का हनन है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर प्रयास भी है।


कमल किशोर आंवड़े के अनुसार मामला एक पारिवारिक विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच थाना सिविल लाइन द्वारा की जा रही थी। इसी दौरान कथित रूप से उनके नाम से एक बयान तैयार किया गया, जिसमें ऐसे तथ्यों का उल्लेख किया गया जिनका उन्होंने कभी समर्थन नहीं किया। उनका कहना है कि वे न तो थाना सिविल लाइन बयान देने गए थे और न ही किसी जांच अधिकारी ने उनसे संपर्क कर कोई कथन लिया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके हस्ताक्षर की कूटरचना कर फर्जी कथन बयान जांच प्रतिवेदन के साथ संलग्न कर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इतना ही नहीं, उनके नाम से कथित शपथ पत्र भी तैयार किया गया, जिसे उन्होंने पूरी तरह फर्जी एवं मनगढ़ंत बताया है।
कमल किशोर आंवड़े ने कहा कि जब उन्हें इन दस्तावेजों की जानकारी मिली तो वे स्वयं हैरान रह गए, क्योंकि उन्होंने ऐसा कोई दस्तावेज कभी तैयार नहीं कराया और न ही किसी न्यायालय अथवा पुलिस अधिकारी के समक्ष ऐसा कोई कथन दिया। उन्होंने बताया कि संबंधित कथनकर्ता स्वयं उपस्थित होकर शपथ पत्र के माध्यम से यह प्रमाणित कर चुका है कि वह कथन देने थाना नहीं गया था तथा कथित बयान की तिथि पर वह अपने कार्यस्थल बैलाडीला बचेली में ड्यूटी पर मौजूद था।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की अनुपस्थिति एवं बिना सहमति के उसके नाम से बयान और शपथ पत्र तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किए जा रहे हैं, तो यह कानून एवं न्याय व्यवस्था दोनों के लिए अत्यंत चिंताजनक विषय है।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कूटरचना, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने एवं न्यायालय को भ्रमित करने जैसी धाराओं के अंतर्गत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और अब सभी की नजर प्रशासनिक एवं पुलिस जांच पर टिकी हुई है।
आवेदिका सरोज जोशी एवं प्रकरण के जांचकर्ता विवेचक बृजेश मिश्रा पर लगे गंभीर आरोपों के बाद अब देखना होगा कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।
