बिलासपुर :- प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज , ओम शांति सरोवर, उसलापुर में आयोजित 10 दिवसीय “बाल व्यक्तित्व विकास शिविर” का भव्य रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ समापन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत परमात्मा की याद से हुई । सेवाकेन्द्र की निर्देशिका बीके छाया दीदी, (ताइक्वांडो कोच) गनेश सागर , (डांस टीचर) श्रीमती शानू भट्ट, ( जेल अधीक्षक)श्रीमति निधि मंडावी जी के द्वारा दीपप्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।इस कार्यक्रम का संचालन बीके छाया दीदी ने किया, दीदी ने सभी को मदर्स डे की शुभकामनाएं दीं और सभी को संबोधित करते हुए कहा कि ‘माँ’ शब्द भले ही छोटा है, लेकिन उसके प्यार की गहराई को मापा नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि हमारे जीवन में पांच माताएं की विशेष पालना मिलती हैं: जन्म देने वाली लौकिक माँ, परमात्मा माँ, ड्रामा माँ, धरती माँ और ब्रह्मा माँ। उन्होंने कहा कि माँ दया, करुणा और प्रेम का प्रतीक होती हैं। माँ बच्चों के लिए प्रथम गुरु होती है माँ के संकल्प ,बोल और कर्म का प्रभाव बच्चों पर पड़ता है

इसलिए हर माँ को बच्चों के लिए सकारात्मक बोल व आशीर्वाद के बोल ही मुख से निकालना चाहिए और माँ अपने बच्चों को जैसे शिक्षा देती है ,संस्कार देती है वैसा भाग्य का निर्माण होता है। घर के वातावरण को शुद्ध और सात्विक बनाना बच्चों को सही दिशा देने वाली मां है। और हमारी दूसरी माँ है, परमात्मा माँ जो हर आत्मा का सच्चा पालन हार है। परमात्मा माँ की गोद में आने से विकारों की तपन से शीतलता मिलती है। और वह आत्मा की गंदगी को साफ कर पावन बना देती है। और तीसरी माँ है ड्रामा, जो कि कर्म के परिणाम के रूप में हमारे सामने आते है। ड्रामा जो हर परिस्थिति में हमें सीख देकर आगे बढ़ाती है। तो ड्रामा भी हमारी मां है। और चौथी माँ है प्रकृति माँ जो असीम सहनशीलता से हम सबका भार उठाती है। प्रकृति माँ जो हमारे शरीर की आवश्यकता पूरी करती है। हमारी पालना करती है इस प्रकृति माँ की भी हमें सेवा करनी चाहिए। प्रकृति की सेवा करना अर्थात पांच तत्वों को संरक्षण करना उसकी बचत करना। और पांचवी माँ है ब्रह्मा माँ दिव्य श्रेष्ठ अलौकिक पालना ज्ञान से करती है, तो ब्रह्मा भी हमारी मां है। जगदंबा भी हमारी माँ है। जिनकी मधुर पालना, ज्ञान, गुण, शक्तियों से पूर्ण करती है । नारी के रूप में कन्या के रूप में अगर हम माँ की छवि देखे या हर नारी का हम सम्मान करते हैं, तो हमारा जीवन उत्थान की ओर अग्रसर होता है। तो इस मदर्स डे पर हम संकल्प ले हम अपनी मां का सम्मान सदा करेंगे एक दिन मां का सम्मान नहीं किया जाता परंतु “मां”का सम्मान करना दिल का प्रेम पूर्ण भाव है “मां” का संबंध बहुत ऊंचा संबंध है जिनकी दुआओं की छत्रछाया हमारी रक्षा करती है। इसलिए मां का दिल कभी नहीं दुखाना चाहिए “मां” सदा सम्माननीय है, पूजनीय है इस प्रेरणादायक संदेश के साथ बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सभी बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें ताइक्वांडो, नृत्य, नाटक और गीत शामिल थे।

विशेष रूप से शिवानी, गुंजन, शमिष्ठा , भावना, शिवम, प्रतीक, अनुज, सक्षम, श्रेष्ठ, अभिरूप और अनिकेत ने ताइक्वांडो और सूर्यनमस्कार की प्रस्तुति दी। रिद्धि ने श्रीरामचंद्र स्तुति और आरना ने मदर्स डे पर सुंदर स्पीच दिया। एलिना और श्रेष्ठ ने समर कैंप का अनुभव साझा किया, श्री ने भरतनाट्यम कि प्रस्तुति दी। शिवानी, मधु,प्रिया,महक, स्वाति ने वन्देमातरम् पर बहुत सुंदर नृत्य की प्रस्तुति दी। अनिका, आस्था, निष्ठा, रोली, आरुष, संज्ञा, धनिष्का, श्रीयसी, एलिना, आरना, खुशी इन सभी बच्चो के द्वारा नृत्य की बहुत सुंदर प्रस्तुति दी गयी। इसके अलावा, बच्चों के बीच खेल प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की गईं, जिनमें कुर्सी दौड़ में पहला शिवम, दूसरा अनुज और तीसरा एलिना ने स्थान प्राप्त किया, बलून दौड़ में वर्षा और आर्या ने पहला और दूसरा स्थान पाया, बिस्किट दौड़ में राघव और अदिति ने पहलाऔर दूसरा स्थान लिया। चम्मच दौड़ में प्रियल, गरिमा और प्रज्ञा ने पहला, दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया और जोड़ी दौड़ में रोली, भावना और श्रेष्ठ , प्रतीक ने पहला, दूसरा स्थान हासिल प्राप्त किया। समापन समारोह में सभी बच्चों को अतिथि द्वारा उपहार देकर सम्मानित किया गया।
ईश्वरीय सेवा में
बी के छाया
