सच का 🪞आईना
बिलासपुर :- दोस्तों और हमर संगवरी के पाठक गण, समाज के वरिष्ठ जन पिछले अंक में सच का आइना में मैने श्री झूलेलाल मंगलम सेवा समिति बिलासपुर के बारे में बताया था और कहा था की आगे की जानकारी भाग 2 में जरुर पढ़ें तो आज शुरुआत करते हैं इसी मुदद्दे को लेकर आगे बढ़ते हैं पहला सवाल :- समाज की सबसे पुरानी करीबन 54 साल पहले बनी युवाओं की समिति सिंधी युवक समिति उसी के अधीन सिंधी कॉलोनी भक्त कवंरराम नगर में सिंधु विद्या मंदिर बनाया गया है और साथ में ही जेपी विहार मंगला बिलासपुर में सिंधी युवक समिति के नाम से प्लॉट (जमीन)भी पड़ी है जब समाज के ही एक और संस्था सिंधी युवक समिति जिसके अधीन सिंधु विद्या मंदिर स्कूल है जो संचालित हो रहा है पर कहीं पर भी सिंधी युवक समिति के अध्यक्ष यां अन्य सदस्यओं के द्वारा सिंधु विद्या मंदिर का अलग से पंजियन या संविधान नहीं बनाया गया है बल्कि उसे चलाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है और जो सिंधी युवक समिति का पंजीकरण नंबर है वही नंबर सिंधु विद्या मंदिर का भी है। मतलब नंबर एक ही है और वह उसके अधीन है , ओर पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर के बारे में चर्चा करते हैं उसका जो पंजीयन क्रमाक 1776 नंबर है और संविधान है और झूलेलाल सेवा समिति बिलासपुर का जो गठन किया गया है झुलेलाल मंगलम को चलाने के लिए, उसका पंजीयन नंबर 23234 अलग कराया गया है और संविधान भी अलग है मतलब जमीन मिली पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर को जो सिंधी समाज की सर्वोच पंचायत है उसने मांगलिक भवन बनाया समाज से भी आर्थिक सहयोग लिया गया और सरकर से भी सहयोग मिला मंगल भवन बनने के बाद जो खेल शुरू किया एक व्यक्ति ने आपने एक कहानी या एक पिक्चर का नाम सुना होगा
(अली बाबा और 40 चोर)
जो 40 चोरो का एक गिरोह होता है जो जगह जगह चोरी कर के जंगल में पहाड़ों में जाकर एक गुफा बनाई थी और उस गुफा में लूट का माल पुरा छुपा देते थे पर उस गुफा के बहार खड़े होकर जब वह खुल जा सिम -सिम बोलते थे तब वह गुफा का दरवाजा खुलता था और वह अंदर जाते थे यहां पर भी कुछ ऐसा ही एक तिलशीम माया वीर की तरह चक्र रचा गया 2014 में श्री झुलेलाल सेवा समिति बनाई गई और 2 साल में अध्यक्ष बदलते रहे उसके बाद कई अध्यक्ष बने पर पावर एक ही व्यक्ति के पास था तानाशाह के पास जैसे आपने कई बार सुने हैं कि अमुक पार्टी का अध्यक्ष वो है लेकिन पावर ऊपर किसी और के पास है हाई कमांन के पास , वैसे ही यहां पर भी अध्यक्ष कोई भी बने पर पावर एक ही व्यक्ति के पास रहता है हाई कमांन के पास, और इंनका पुरा एक ग्रुप बना हुआ है उस तनाशाह ने सबसे पहले समिति बनाई, संविधान बनाया और संविधान की कॉपी चंद लोगों के पास थी? यहां तक की कई बार सुनने को मिला भी है जो उस भवन के अध्यक्ष रह चुके थे उन्होंने भी कहा की हमने भी आज तक संविधान की कॉपी नहीं देखी नहीं है ,
कभी संविधान पढ़ा ही नहीं है? इसका मतलब संविधान तो बना है पर उसकी कॉपी भी नहीं दी गई अपने सदस्यओं को ? ओर ना हीं बाटी गई ,अपने सदस्यओं को पता भी नहीं है की यहां का संविधान क्या है?
चंद लोग और एक तानाशाह मिलकर ही पुरा सिंडिकेट बनाकर इसका संचालन करने लगे? दिखाने के लिए तो 73 सदस्य थे पर आज तक कभी अपने संविधान पर अमल किया है ? क्या संविधान के हिसाब से झूलेलाल सेवा समिति कार्य कर रही है?
गोलमाल और 420 चार सौ बीसी का गोरख धंधा 2014 से ही आरंभ हो गया था?
और धीरे-धीरे अपने लोगों को अध्यक्ष बनाने लगा और चंद लोगों को ही सत्य बात पता थी सबसे बड़ी आश्चर्य की बात एक थी की हर 2 साल में अध्यक्ष बदलते रहते थे पर 10 वर्षो तक कोषाध्यक्ष एक ही व्यक्ति रहा उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया उसे बदला नहीं गया ?
क्योंकि वह वफादार था, ईमानदार था और उसे पता था …. इसलिए उसे नहीं बदला जा रहा था? समाज का भवन पैसा भी समाज का पर हिसाब किताब और करता था ?
वह भी अपने हिसाब से?
जो अपने मेंबर को दिखाना था वही दिखता था जो समाज को बताना था वही बताता था असल में हिसाब कुछ और ही था जिसका हिसाब आज तक किसी को नहीं दिया?
संस्था के एक ईमानदार समाज सेवी सच्चे इंसान ने आवाज उठाई जो कि उन्ही के कमेटी का मेंबर था उन्होंने कहा मुझे हिसाब किताब दिखाइए बताइए । डॉक्यूमेंट दिखाइए तो उससे कहा गया तुम्हें देखने आता है, समझ में आता है तो उसने कहा मेरा परिवार है मेरी बेटी है वह चेक करेंगी आप पूरी फाइल दीजिए मुझे, जब यह बात सुनी गई उस बैठक में तब तानाशाह और बाकी जो उसके सहयोगी थे सबके नीचे से पांव के नीचे से जमीन खिसक गई कि आज अचानक इतने दिनों के बाद इस व्यक्ति ने कैसे हिसाब मांगा आज तक किसी ने मांगा नही ओर पूछा नहीं है ओर हमने बताया नहीं है?
सभी ने गांधी जी के तीन बंदरों की तरह अमल किया है?
तो उस बैठक में एक व्यक्ति खड़ा हुआ और संविधान के दो चार पहलू बताने लगा कि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है अथवा मानसिक रोगी (पागल) हो जाता है या जिसका चरित्र हनन होता है उस सदस्य की सदस्यता खत्म हो जाती है?
तब उस मेंबर ने कहा ना मैं मरा हूं ना मेरा चरित्र हनन हुआ है और ना ही मैं पागल हूं अगर आप लोग यह साबित करके मुझे कमेटी से निकलना चाहते हैं तो शौक से आप अपना यह सपना भी पूरा कर लीजिए पर साबित करने के बाद हिम्मत है तो करिए साबित ?
फिर तानाशाह उठा और उसको समझाने लगा की जो हिसाब किताब तू मांग रहा है उसके डॉक्यूमेंट हमारे पास नहीं है? क्योंकि हमने पहले ही उसे जला दिया है?
इसका मतलब की गोलमाल 420 थोड़ी बहुत नहीं बल्कि बहुत कुछ ज्यादा ही हो रही थी? और दाल थोड़ी सी काली नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली थी? तब उस व्यक्ति ने कहा समाज का भवन समाज का पैसा तो फिर हिसाब किताब भी समाज को पता चलना चाहिए ,?
आपने डॉक्यूमेंट क्यों जलाएं? आप ईमानदारी से पूरा हिसाब किताब समाज के जीतने मुखिया हैं उनको दीजिए और जब तक आप ऐसा नहीं करेंगे तब तक मैं चुप नहीं बैठूंगा?
यह बोलकर वह व्यक्ति बैठक छोड़कर कर चला गया और सबसे आश्चर्य की बात एक और है जब भी बैठक होती थी उस घटना के बाद सबका मोबाइल बाहर रखवा दिया जाता था कोई भी मोबाइल लेकर नहीं आएगा और हर 2 साल बाद अपने कार्यकाल पूरा होने के बाद हिसाब किताब देते थे,
सुन लो और सामने डॉक्यूमेंट पड़े हैं देख लो और गांधी जी के बंदर बन के रहना?
खाना खाओ और घर जाओ? यह सिलसिला चलने लगा पर जब बात हमें पता चली तो हम जब इसका पता करते-करते उस जगह तक पहुंचे तो हम खुद हैरान हो गए कि जिसे हम छोटा सा तालाब सोच रहे थे असल में वह तो बड़ी 🚣झील निकली जिसे हम 🐟 मछली समझ रहे थे असल में तो वो 🐊मगरमच्छ निकला और तार सिर्फ एक भवन तक सीमित नहीं बल्कि बहुत सारी चीजों में जुड़े हुए हैं ? जहां-जहां उसके पांव पड़े हैं वहां वहां पर भ्रष्टाचार और गोलमाल हुआ है?
बार-बार उसके मेंबर कहते हैं कि हम ईमानदार हैं कोई घपला नहीं है ईमानदारी से कार्य हो रहा है फालतू की बातें हो रही है तो मेरा सवाल सिर्फ एक ही है अगर आप ईमानदार हो, सच्चे हो तो आप हिसाब किताब ईमानदारी से क्यों नहीं दे रहे हो? समाज का भवन है सबके सामने रखिए,
हमको नहीं दे रहे हो तो समाज के मुखी सा. को लिखित मे हिसाब किताब की एक प्रति उनको दीजिए , संविधान की कॉपी दीजिए ताकि जिसे पता करना होगा वह अपने मुखी के पास जाकर पता कर लेगा देख लेगा ,
पर आप लोग ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि सच्चे तो आप हो नहीं और झूठ तो भरा पड़ा हैं?
ईमानदारी का ढोल बजाते रहते हैं और इस खेल में महिला विंग को भी शामिल किया गया है? क्योंकि कई महिलाओं के पति कई युवाओं के भाई रिश्तेदार भी इस खेल के हिस्सा है?
मतलब परिवारवाद समाज के प्रमुख समितियां में अपने लोगों को बिठाना ताकि कोई आवाज ना उठा सके? और अगर कोई आवाज़ उठाएं तो सब मिलकर इसका विरोध करें और उसे झूठा गलत साबित करें?
उसके बदले में उनको कुर्सी मिलती है और पैसा मिलता है साथ में गोलमाल करने का लाइसेंस मिलता है?
मेरा कहना है यह कुर्सी समाज की है ,सेवा के लिए है, सेवा कीजिए बिजनेस धंधा मत कीजिए और ईमानदारी से एक-एक रुपए का हिसाब पूरे बिलासपुर सिंधी समाज के सामने रखिए और संविधान की कॉपी भी रखिए और सच्चे ईमानदार हो तो अपने गुरु का अपने बच्चों का और अपने माता-पिता की कसम खाकर साबित कीजिए की जो काम आज तक हुआ है सब सही हुआ है कुछ इसमें गलत नहीं है? उनकी कसम पर विश्वास करेगा कौन ? क्योंकि यह तो केजरीवाल के रिश्तेदार है?
कसम खाकर भी पलटी खा जाते हैं?
तानाशाह ने कसम खाई थी की बीच में सोशल मीडिया में जो एक वीडियो चल रहा था यह वीडियो गलत है सही नहीं है एडिटिंग हुआ है और मैंने ऐसा कुछ नहीं बोला है उसने अपने बेटे की कसम खाई थी कि अगर मैं झूठ बोलूंगा तो मेरा बेटा मेरी औलाद नहीं है मेरा बीज नहीं है?
पर सच्चाई सामने आई तो उसकी बोलती बंद हो गई क्योंकि जो सोशल मीडिया में वीडियो चला बिल्कुल सही था, तो अब इसका मतलब कि उसकी औलाद उसका बिज नहीं है? तो ऐसे झूठे फरेबी 420 व्यक्ति पर कैसे विश्वास होगा?
अब आप लोग सोच रहे होंगे कि चंद लोग इतने सारे लोगों पर राज कर रहे हैं और कोई कुछ नहीं कर रहा है ऐसा क्यों
इसका जवाब आज से 80 वर्ष पूर्व जाइए जब देश गुलाम था 200 साल तक तब चंद अंग्रेज लोग ही थे और हमारे
अखंड भारत को गुलाम बना कर रखा था कैसे रखा था सबने कथा सुनी है फिल्में देखी भी हैं और इतिहास पढ़ा भी है और पढ़ लेना भी इस तरह यहां पर भी चंद लोगों ने पूरे समाज को गुलाम बनाकर रखा है? कैसे रखा है इसके बारे में अगले अंक में बताऊंगा तब तक जुड़े रहना सच के आईना के साथ सच का आईना आपको सच दिखाएगा और ऐसे लोगों का चेहरा इस आईने में साफ-साफ नजर आएगा .
सत्यमेव जयते !
