बड़ी संख्या में भक्तजन पहुंचे, नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की
बिलासपुर / चक्करभाटा :-
सिंध प्रांत के रहड़की में सचो सतराम धाम के संत सांई साधराम साहब जी का विगत दिनों सिंगापुर में उपचार के उपरांत देहांत हो गया। वे ब्रह्मलीन हो गए। जैसे ही यह खबर पाकिस्तान के सिंध प्रांत एवं भारत के अनेक प्रदेशों में पहुंची, सिंधी समाज में दुख की लहर दौड़ पड़ी। लाखों भक्तों के आंसू रुक नहीं रहे थे। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि उनके सतगुरु, उनके हाजरा हजूर, संत सांई साधराम जी ब्रह्मलीन हो गए हैं।

पर यह कटु सत्य है कि जो आया है, उसको एक दिन जाना जरूर है। यह संसार रूपी जीवन है, हर कोई अपनी यात्रा पूरी करके प्रभु के चरणों में पहुंचता है। पर कुछ लोग ऐसे होते हैं जो जाने के बाद भी लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं और सांई साधराम जी ऐसे सच्चे संत थे। वैसे भी सिंध को संतों की नगरी कहा जाता है। सिर्फ भारत और पाकिस्तान ही नहीं बल्कि विश्व भर में जहां-जहां एसएसडी धाम है और उनके भक्त हैं, सभी जगह दुख की लहर दौड़ पड़ी। पूरे भारत देश में संत महात्मा व भक्तजन उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
इसी कड़ी में झूलेलाल मंदिर सिंधु अमर धाम आश्रम चक्करभाटा में भी संत सांई लाल दास जी के सानिध्य में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। रात्रि 8:00 बजे साधराम जी के छाया चित्र पर संत श्री लाल दास जी के द्वारा फूलों की माला अर्पण कर दीप प्रज्वलित करके उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कुछ समय के लिए राम नाम का जाप किया गया। उन्हें राम नाम का जाप बहुत पसंद था। कहीं भी सत्संग होता था, उससे पहले भजन के पूर्व यह जाप जरूर करते थे और भक्तों से भी करवाते थे।
पूज्य सिंधी पंचायत बिलासपुर के पदाधिकारी धनराज आहुजा, रुपचंद डोडवानी एवं पूज्य सिंधी पंचायत चक्करभाटा के अध्यक्ष सुरेश फोटानी, पूज्य सिंधी रीयासती पंचायत के अध्यक्ष मनोहरलाल मलघानी ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और अपने शब्दों के दो फूल अर्पण किए। प्रकाश जेसवानी के द्वारा उनके जीवन के बारे में प्रकाश डाला गया।
संत सांई लाल दास जी भाव-विभोर हो गए और उन बातों को याद करने लगे जब वे सिंध यात्रा पर गए थे और सचो सतराम धाम में रुके थे। तब उनके द्वारा जो इतना सारा प्रेम दिया गया और उनके साधकों ने जो सेवा की, उसको याद करने लगे। कुछ समय पूर्व ही वे चक्करभाटा में भी आए थे। उनके साथ बिताए हुए पल याद करते हुए भक्तों को बता रहे थे कि ऐसे संत बहुत दुर्लभ होते हैं, जो अपने लिए नहीं बल्कि साध संगत के लिए जीते हैं।

उन्होंने कहा कि हमेशा उनके चेहरे पर एक मुस्कान रहती थी। जब भी आते, जहां भी मिलते, किसी भी सत्संग में जाते, हमेशा उनके चेहरे पर मुस्कान जरूर देखने को मिलती थी। उनकी मुस्कान देखकर ही लोगों के आधे दुख-दर्द दूर हो जाते थे। ऐसे संतों को मेरा बारंबार नमन। हम भगवान झूलेलाल से यही प्रार्थना करते हैं कि उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें तथा सभी साध संगत को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
बड़ी संख्या में भक्तजन पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित कर माथा टेकते हुए, हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे। आज के इस कार्यक्रम का सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव प्रसारण किया गया। हजारों की संख्या में घर बैठे लोगों ने आज के इस कार्यक्रम को देखा।
इस पूरे कार्यक्रम को कवर करने के लिए हमर संगवारी के संपादक विजय दुसेजा विशेष रूप से बिलासपुर से चक्करभाटा पहुंचे। उन्होंने आज के इस पूरे कार्यक्रम को कवर किया और हमर संगवारी परिवार की ओर से भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
