सच का 🪞आईना
(अपनों को दिया धोखा और बेगानों को दिया मौका, सिंडिकेट बनाकर लूट रहे ? )
(समाज की शान झूलेलाल मंगलधाम बिलासपुर बना विवादों का नया घर? )
छत्तीसगढ़ सरकार ने झूलेलाल मंगलधाम के लिए जमीन दी, पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर को पूरे सिंधी समाज ने, पैसों का सहयोग दिया,
पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर को , फिर
श्री झूलेलाल सेवा समिति बनाकर श्री झूलेलाल मंगलधाम को अलग कर 2 लाख रुपए से ज्यादा सहयोग करने वाले 73 लोग इसे क्यों अपने कब्जे में कर चला रहे हैं.?
बिलासपुर :- हमर संगवारी के पाठक जन शुभचिंतकों और समस्त देशवासियों अभी तक आप लोगों ने हमर संगवारी का लगातार अंक पढ़ते रहे होंगे और खासकर विगत तीन अंक जिसमें हमने सच का आईना में झूलेलाल मंगल धाम बिलासपुर में हो रही घटनाओं का कहानी के माध्यम से सिढी दर सिढी आपको बताया है उसका वर्णन किया है किस तरह यहां पर सब गोलमाल हो रहा है?
किस तरह संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही है?
किस तरह एक व्यक्ति पूरे सिंधी समाज को गुलाम बनाकर रखा है?
किस तरह सिंधी समाज के मध्यम वर्ग की आंखों में धूल झोंक कर समाज सेवा का चोला ओढ़ कर काला धंधा किया जा रहा है? सब गोलमाल किया जा रहा है?
इस कहानी का यह चौथा भाग है अब यहीं पर इस कहानी को हम खत्म करेंगे अब आगे की कहानी नहीं बल्कि जो लड़ाई चलेगी वह जनता की अदालत में भी चलेगी और कानून की अदालत में भी चलेगी उसकी पूरी रिपोर्ट आपको मिलेगी हमर संगवारी में तो चलो चलते हैं भाग 4 से झूलेलाल मंगल धाम बिलासपुर की कहानी को आगे बढ़ते हैं अभी हम कुछ वर्ष पूर्व पीछे चलते हैं इतिहास में पहली बार पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर का अध्यक्ष जिसका नाम था अनिल शिवदासानी अच्छा व्यक्ति था मिलनसार था हंसमुख था और अच्छा बिजनेसमैन भी था पर पहले भी कहा था अध्यक्ष कोई भी बने पावर एक व्यक्ति के पास रहता है वह है तानाशाह?
बाकी सब कठपुतलियों की तरह नाचते रहते हैं? डोर उसके हाथों में रहती है?
समय कुछ निकला अचानक एक दिन खबर निकली कि इस व्यक्ति अनिल शिवदासानी ने अपने आप को दिवालिया घोषित कर दिया है जैसे समाज के लोगों को यह बात पता चली तो आग🔥 की तरह फैलती गई यह कोई मामूली खबर नहीं थी सेंट्रल पंचायत से जुड़ी हुई थी क्योंकि वह उस समय अध्यक्ष थे वर्तमान अध्यक्ष और इतने बड़े बिजनेसमैन थे अच्छा धंधा चाह रहा था अचानक क्या हो गया जो अपने को दिवालीया घोषित किया यह बात हर किसी के विचार में चल रही थी मन में आ रही थी पर इसका जवाब नहीं मिल पा रहा था अब आप लोग सोच रहे होंगे इससे मंगल धाम का क्या कनेक्शन है बहुत गहरा कनेक्शन है? क्योंकि झूलेलाल मंगल धाम की जमीन पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर (रजिस्ट्रेशन नंबर 1776)को मिली थी और यह श्री झूलेलाल मंगल धाम बिलासपुर उसी के अधीन था बाद में इसको अलग समिति बनाकर इसका अलग अध्यक्ष बना दिया गया। और उसका अलग संविधान बना दिया गया पर जो इसकी जो भी आमदनी होती है उसमें से 25% पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर को दिया जाता है?
बाकी का 75% आमदनी श्री झुलेलाल सेवा समिति (जो पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत से अलग करके नयी समिति बनाई गयी) वो अपने पास रखती है?
जो इसमें करता धर्ता है वही सेंट्रल पंचायत के भी हैं ?और समिति के में भी हैं दो-चार लोग अलग होंगे बाकी 99% वही व्यक्ति हैं?
करोड़ों रुपए लोगों से ब्याज में लिए बिलासपुर से भी लिए रायगढ़ से भी लिए उमरिया से भी लिए पेंड्रा से भी लिए रायपुर से भी लिए और रीवा से भी लिए एमपी के कई शहरों से लिए छत्तीसगढ़ के कई शहरों के लोगों से लिए, अपने दोस्तों यारों से लिए अपने रिश्तेदारों से लिए समाज के लोगों से लिए और दो-चार हजार या लाख नहीं करोड़ों रुपए लिए किसी से 5 लाख किसी से 10 लाख किसी से 50 लाख 1करोड 2 करोड़ इतना पैसा उन्होंने लिया? यह बोलकर के बिजनेस में लगाना है आपको ब्याज दूंगा और लोगों ने भरोसा विश्वास करके इसे अपने जमा पूंजी दे दी अब इसकी गारंटी क्या थी पहले तो यह पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर का अध्यक्ष था जो एक समानीय पद है दूसरा इसके जो गॉडफादर थे उनका चेहरा देखकर उन्होंने पैसा दिया पर जैसे ही इसने हाथ खड़ा कर दिया दिवालीया घोषित किया सबके पैरों से जमीन खिसक गई अचानक एक दिन उसने फोन किया तानाशाह और उसके लोगों को कि मैं कुछ रकम ला रहा हूं आप बुला कर दीजिए, ? जिसमें उसने लाखों रुपए साथ में सोना चांदी भी लेकर पहुंचा? एक ऑफिस में पहले तो इन लोगों ने अपना हिस्सा निकाल लिया?
फिर उन्होंने लिस्ट देखी किसको किसको पैसा देना है तो लिस्ट लंबी थी उसमें लंबी लिस्ट से अपने-अपने खास लोगों के नाम निकाले गए ?और फिर उनका अमाउंट जितना था उसमें उनको 10% , 20% पैसा दिया गया?
पूरा बाकी पैसा भूल जाओ इतने में ही खुश रहो नहीं तो यह भी नहीं मिलेगा?
मरता क्या न करता पूरा डूबने वाला था पैसा,
भैया ठीक है दे दो भैया 20% ही?
तो ऐसा समझौता कर कर उनको पैसा उन लोगों को दिया गया ?
पर आज भी कई लोग ऐसे हैं जिनका ₹ 1 भी नहीं मिला है सिर्फ खोखले वादे मिले हैं? ऊपर की पूरी मलाई 40 चोरों ने मिलकर खाई? और जिसने दिवालीया घोषित किया उस व्यक्ति ने भी रायपुर में प्रॉपर्टी बनाई? और बैंक बैलेंस बनाकर नौ दो ग्यारह हो गया?
यह बात तानाशाह और उसकी टीम जानते थे? फिर भी उसको रोका नहीं ?और किसी को बोला नहीं क्यों?
क्योंकि उनका भी इसमें हिस्सा था?
कुछ हिस्से की रकम को इन्होंने शहर में नहीं बल्कि प्रदेश में भी नहीं दूसरे स्टेट में प्रॉपर्टी खरीद कर रखी है? जिसमें पंजाब और महाराष्ट्र स्टेट है?
इस कहानी को बताने का मतलब यह था कि यह 40 चोर और तानाशाह शरीफ नहीं है ?
शुरू से ही लदड फंडी 420 का धंधा करते आए हैं? और आज भी कर रहे हैं ?
अब इस कहानी को अगले अंक में बताऊंगा अभी हम वापस चलते हैं श्री झूलेलाल मंगल धाम बिलासपुर की ओर सन 2014 में इसका पंजीयन (क्रमांक 23234 )कराया गया और 2026 चल रहा है 12 साल का हिसाब नहीं मिल रहा है? इनके जो सदस्य हैं उनमें एक वरिष्ठ सदस्य है उन्होंने यह बात कहीं भी हिसाब दीजिए 12 साल का कहां है पर इन्होंने कहा कोई हिसाब नहीं है? जो था हमने सब दे दिया है?

( खाया पिया कुछ नहीं गिलास तोडा़ बाराना)
वाली कहावत है मतलब कि इनका कहना है कमाई ₹1 हुई और खर्चा ₹5 हुआ इसलिए हम ₹4 और घाटे में है और ज्यादा अब बात मत करो वरना यह पैसा भी तुम्हें देने पड़ेंगे ?
इसलिए सवाल मत करो जो बोलते हैं उसे सुनो और चुप रहो?
(अपने संविधान की धजिया उड़ा उड़ा कर भजिया खा रहे हैं लोगों के सामने शरीफ बनकर गोलमाल कर रहे हैं? )
(न खाता न बही जो तानाशाह कहे वही सही?)
भवन के पैसे को अपने ही सिंडिकेट बनाकर ग्रुपों में अपने बिजनेस में लगा के रखा है ? और 60 पैसा 65 💰पैसे में ब्याज में अपने लोगों को देकर चला रहे हैं?
कोई अगर पूछता है पैसा कहां है तो कहते हैं पैसा हमारे पास पड़ा है बैंक में पड़ा है सेव पड़ा है?
हकीकत में पैसा उनके बिजनेस में लगा है ?और यह उसे पैसे से डबल डबल प्रॉपर्टी खरीद कर उसे बैचकर कमाई कर रहे हैं?
जिन गरीब लोगों के लिए जमीन मिली थी उनको इसका लाभ बिल्कुल नहीं मिल रहा है?
एक बार एक मीटिंग में एक व्यक्ति ने तानाशाह से सवाल पूछा था कि गरीब लोगों को भवन निशुल्क क्यों नहीं दिया जा रहा है? तब उसने कहा था कि गरीब लोग यहां शादी करने क्यों आ रहे हैं किसने कहा है यह तो पैसे वालों के लिए भवन बनाया गया है? उनके लिए थोड़ी बनाया गया कि हम फ्री में देंगे?
तो हमारा एक सवाल है जब मंदिर के बाहर या किसी मस्जिद के बाहर गुरुद्वारे के बाहर जब प्रसाद बटता है तब गरीब , आमिर सब खाते हैं सत्संग में भी जाते हैं तो लाइन लगाकर वेट सब कहते हैं वहां कोई गरीब न होता है न कोई अमीर होता है सब बराबर होते हैं तब तो यह नहीं कहते हैं कि गरीब को प्रसाद क्यों मिल रहा है या गरीब यह नहीं कहता है कि अमिर
को प्रसाद क्यों दे रहे हो?
जब जमीन मिली थी तो यह तो नहीं कहा था सरकार को इसमें जो भवन बनेगा सिर्फ पैसे वालों के लिए बनेगा गरीबों के लिए नहीं बनेगा? या उनको हम निशुल्क नहीं देंगे कम रेट में नहीं देंगे? ऐसा उन्होंने कहा था क्या तब तो बड़े-बड़े सपने दिखाए थे? लोगों को बेवकूफ बना दिए चूना लगा दिए?
चंदा लेने निकले थे तो कहा था 11000/= रुपए जो देगा वह सदस्य बनेगा?
पर आज कहां है वह सदस्य उन लोगों को सदस्य क्यो नहीं बनाया गया है, ? जबकि आप लोगों ने संविधान में भी लिखा है ?
बल्कि उन लोगों को ट्रस्टी बनाया गया है जिन्होंने 2 लाख से ऊपर चंदा दिया है इसीलिए मात्र 73 ट्रस्टी हैं?
यहां पर भी बिलासपुर सिंधी समाज के लोगों को धोखा दिया गया विश्वास घात किया गया?
ऊपर में जो नए रूम 20 बनाए गए उसका एक रूम का रेट चार लाख रुपये सहयोग राशि रखा गया ?
जब कुछ लोगों ने कहा कि हम चार लाख रुपए देने को तैयार है हमारे माता-पिता के नाम से आप एक रूम बुक कर लीजिए उनका नाम लिखिए तब इन लोगों ने कहा जरूरत नहीं है? पैसे की हम आपसे पैसा नहीं लेंगे?
क्यों ,क्योंकि अगर नए सदस्य आ जाएंगे तो जो ये लोग करोड़ों रुपए का हिसाब किताब पूछेंगे तो उनका भांडा फूट जाएगा? और जो यह सिंडिकेट चला रहे हैं वह सब खत्म हो जाएगा ? और इनका झूठ पकड़ा जाएगा? सच सबके सामने आ जाएगा? इसीलिए किसी नए सदस्य को एंट्री नहीं देना है ?जो अपने लोगों के बीच का है उन्हीं में से पैसा लेना है बाकियों को अंदर नहीं आने देना है?
समाज का भवन है और कोई व्यक्ति अगर अपने माता-पिता के नाम से आपको पैसा देना चाहता है जो आपका रेट है रूम का तो फिर आप क्यों नहीं ले रहे हो?
(क्योंकि दाल में कुछ काला है या पूरी दाल ही काली है? )

अगर इसके ऊपर लिखना शुरू करेंगे न तो पूरा एक ग्रंथ बन जाएगा पर उनके काले कारनामे कम नहीं होंगे इनके झूठ कम नहीं होंगे इनके पाप कम नहीं होंगे इनके धोखे अत्याचार कम नहीं होंगे विश्वास घात कम नहीं होंगे?
इसीलिए यह कुर्सी छोड़ना नहीं चाहते हैं? इसीलिए पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत बिलासपुर के चुनाव में काम दंड भेद बेमानी 420 सब अपनाते हैं?
ताकि कुर्सी बरकरार रहे क्योंकि इसी कुर्सी के सहारे इनका करोड़ों का धंधा चल रहा है?
(गंदा है पर यह धंधा है?)
बड़े धार्मिक बनते हैं बड़े-बड़े प्रवचन देते हैं घर और दुकानों में बड़े-बड़े अपने गुरु के फोटो लगा कर रखे हैं लोगों को चूना लगाने के लिए ? दिखाने के लिए कुछ रुपए दान में देते हैं ताकि उनकी आंखों में पट्टी बंधी रहे जो हम कर रहे हैं गलत कार्य वह उन्हें दिखाई न दे?
उन्हीं के साथी एक व्यक्ति ने कहा मुझे कि तू कहता है यार इस तानाशाह को निकाल दो मैंने कहा जो गलत करेगा उसे निकाल दो तो वह जो गलत कर रहा है कुछ भी कर रहा है समाज के लिए कर रहा है?
मैंने कहा समाज ने कब कहा कि तू गलत काम करके पैसा हमको दे कौन से समाज को पैसा दिया है? कब समाज ने पैसा मांगा है? जो गलत काम किया है उसका पैसा इसने अपने पास रखा है ?और समाज में अगर पैसा दिया भी है ना ₹1 तो उसके बदले में ₹10 लूट लिया है?
बड़े शर्म की बात है कि आप सब लोग धर्म कर्म की बात करते हो धार्मिक स्थलों में जाते हो दान पुण्य की बात करते हो और ऐसे अधर्मियों का साथ देते हो ?
किसी ने कहा तुझे क्या मिलेगा मैंने कहा यही बात अगर आजादी के समय हमारे वीर जवान आजादी के दीवानों ने सोची होती तो आज आजादी नहीं मिलती यह लड़ाई अपने लिए नहीं समाज के लिए लड़ रहा हूं सत्य के लिए लड़ रहा हूं धर्म के लिए लड़ रहा हूं
और कोई भी बड़ी जीत जल्दी से आसनी से नहीं मिलती है उसके लिए
कुर्बानी देनी पड़ती है और हर कोई कुर्बानी देना नहीं चाहता है इसीलिए आजकल आप देखते होंगे कुर्बानी के नाम पर जानवरों की कुर्बानी दी जाती है अपनी औलादे की अपनी संतानों की नहीं ?अपने विचारों की नहीं अपने कुर कर्मों की नहीं अपने पाप की नहीं अपने गलत कार्य की नहीं लालच की नहीं नहीं?
मेरी इस कुर्बानी से अगर समाज जाग जाता है और सच सबके सामने आता है और पपियो का अंत होता है तो इससे बड़ी खुशी की बात और क्या हो सकती है? इससे बड़ा तोहफा और क्या हो सकता है? वैसे भी मैं धार्मिक पर्वती का व्यक्ति हूं संतों के संग में रहा हूं तो मैं जो सुनता हूं सतसंग में और सत्य वचन ओं में चलने की कोशिश करता हूं और सच दिखाने का कार्य कर रहा हूं मैंने उनको भी कई बार हाथ पैर जोडे़ ओर कहा धर्म की राह पर चलो,
ओर पाप की राह छोड़ दो अत्याचार करना छोड़ दो और न्याय नीति धर्म से चलो समाज हित की बात करने से नहीं सामाज हित करने से होता है और यह कुर्सी समाज हित के लिए है बिजनेस और धंधा करने के लिए नहीं है? पर उन अधर्मी को धर्म की बात कहां से समझ में आएगी, ?
जिसे पैसा पावर और पद कि लालच हो वह धर्म की राह पर चलना नहीं चाहेंगे? एक व्यक्ति ने कहा अभी कि आज सबसे बड़ा अगर कोई चीज है तो वह पैसा है जीसके के पास पैसा है उसके लिए 100 खून भी माफ है ?और जिसके पास पैसा नहीं है वह सही भी है फिर भी वह गलत कहलाएगा? मैंने कहा आपकी बात तो भाई 100% सच नहीं है पर कुछ जगह सही जरूर हो सकती हैं हर जगह नहीं पर याद रखना जब पाप का घड़ा भरता है तब भगवान का अवतार होता है और पापीयो का सर्वनाश जरूर होता है?
भगवान के घर में देर है पर अंधेर नहीं और इनका काला चिट्ठा सच के आइना में खुलेगा साथ ही जनता की अदालत में भी आएगा अब अगला फैसला जनता की अदालत और कानून की अदालत करेगी हम सबूत रखेंगे और न्याय मांगेंगे अपने लिए नहीं पुरे सिंधी समाज के लिए शहर प्रदेश देश के लिए न्याय चाहिए श्री झूलेलाल मंगलधाम के करोड़ों रुपए का पूरा हिसाब किताब चाहिए ?
सत्यमेव जयते
