
ब्रह्माकुमारीज़ ओम शांति सरोवर, उसलापुर (मुंगेली रोड), ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय, माउंट आबू से पधारी वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका एवं फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. बीके मनीषा बहन ने विभिन्न योगासनों, प्राणायाम एवं स्वास्थ्यवर्धक व्यायामों का अभ्यास कराते हुए उनके लाभों की विस्तृत जानकारी दी।डॉ. बीके मनीषा बहन ने प्रतिभागियों को ताड़ासन, वज्रासन, भद्रासन, मंडूकासन, शशांकासन, सेतुबंधासन, अर्ध उष्ट्रासन, त्रिकोणासन, अर्ध चक्रासन एवं शवासन का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि मंडूकासन अग्न्याशय को सक्रिय कर मधुमेह नियंत्रण में सहायक होता है। सेतुबंधासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाकर हृदय एवं फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है। अर्ध उष्ट्रासन रीढ़ की हड्डी को लचीला एवं मजबूत बनाता है, छाती का विस्तार कर श्वसन क्षमता बढ़ाता है तथा कंधों, गर्दन और कमर के तनाव को कम करने में सहायक होता है। त्रिकोणासन कमर एवं पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, अर्ध चक्रासन मेरुदंड को लचीला बनाकर कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है तथा शवासन शरीर और मन को गहन विश्राम देकर तनाव, थकान एवं मानसिक दबाव को दूर करता है। इसके साथ ही प्रतिभागियों को नाड़ीशोधन क्रिया का अभ्यास कराया गया। इस अवसर पर डॉ. बीके मनीषा बहन ने कहा कि “योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि तन, मन और आत्मा के समग्र संतुलन का विज्ञान है। यदि प्रतिदिन थोड़े समय के लिए भी योग, प्राणायाम और सकारात्मक चिंतन को जीवन का हिस्सा बनाया जाए, तो अनेक शारीरिक एवं मानसिक रोगों से बचाव संभव है। स्वस्थ जीवनशैली ही सच्ची संपत्ति है।”उसलापुर सेवाकेंद्र की मुख्य संचालिका बीके छाया दीदी ने राजयोग मेडिटेशन का महत्व बताते हुए कहा कि “आज संसार में अधिकांश लोग शारीरिक से अधिक मानसिक थकान, चिंता, भय और असंतोष का अनुभव कर रहे हैं। मन की अशांति का प्रभाव शरीर पर भी दिखाई देता है। इसलिए केवल शरीर का योग पर्याप्त नहीं है, मन का योग अर्थात् राजयोग भी उतना ही आवश्यक है। राजयोग हमें अपने विचारों, भावनाओं और संस्कारों का स्वामी बनना सिखाता है। जब मन परमात्मा शिव से जुड़ता है, तब आत्मा को शांति, शक्ति, प्रेम, पवित्रता और आनंद की दिव्य ऊर्जा प्राप्त होती है।”उन्होंने आगे कहा कि “राजयोग कोई कठिन साधना नहीं, बल्कि जीवन जीने की सहज कला है। यह हमें परिस्थितियों के बीच भी स्थिर, प्रसन्न और सकारात्मक रहना सिखाता है। जब हम स्वयं शांति और खुशियों से भर जाते हैं, तब वही दिव्य ऊर्जा हमारे परिवार, समाज और सम्पूर्ण विश्व तक पहुँचती है। आज विश्व को केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि मानसिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्वास्थ्य की भी आवश्यकता है। शारीरिक योग और राजयोग का समन्वय ही सम्पूर्ण स्वास्थ्य का आधार है। आइए, हम सभी प्रतिदिन योग के साथ परमात्म स्मृति को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाकर स्वस्थ, सुखी, तनावमुक्त एवं मूल्यनिष्ठ समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।” दीदी ने सभी प्रतिभागियों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराते हुए गहन शांति की अनुभूति कराई। ध्यान के दौरान उपस्थित सभी भाई-बहनों ने मन की एकाग्रता, आंतरिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया।कार्यक्रम के अंत में सभी ने स्वस्थ, संतुलित एवं तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित यह चार दिवसीय योग महोत्सव 21 जून को प्रातः 7 बजे से 8 बजे तक रहेगा।ईश्वरीय सेवा मेंबी.के. छाया
